नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 2025 का आखिरी 'मन की बात' एपिसोड 129 में देशवासियों से सीधे संवाद किया। इस दौरान उन्होंने देश की उपलब्धियों का विवरण दिया और आने वाले 2026 के लिए चुनौतियों, संभावनाओं और विकास की दिशा पर प्रकाश डाला। पीएम ने कहा कि, 2025 भारत के लिए गर्व और मील के पत्थरों से भरा साल रहा। चाहे राष्ट्रीय सुरक्षा हो, खेल हो, वैज्ञानिक खोज हो या वैश्विक मंच पर भारत की उपस्थिति, हर क्षेत्र में देश ने अपनी मजबूती दिखाई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि, 'ऑपरेशन सिंदूर' इस साल हर भारतीय के लिए गर्व का प्रतीक बन गया। भारत ने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई समझौता नहीं किया। इसके अलावा विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। बच्चों और युवाओं में स्पेस और साइंस के प्रति रुचि जाग्रत हुई। पीएम ने कहा कि, छोटे-छोटे बच्चे अब कहते हैं कि वे भी भविष्य में स्पेस में जाएंगे।
पीएम मोदी ने स्वदेशी को लेकर देशवासियों की बढ़ती रुचि की सराहना की। उन्होंने बताया कि, मणिपुर के मोइरांगथेम जैसे युवाओं ने लोकल सोल्यूशन अपनाकर अपने क्षेत्र के सैकड़ों घरों में सोलर पावर पहुंचाई। इससे यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय समाधानों से बड़े बदलाव संभव हैं।
प्रधानमंत्री ने लोगों को एंटीबायोटिक दवाओं के अनियंत्रित इस्तेमाल से बचने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि, दवाओं का सेवन केवल डॉक्टर की सलाह से करना चाहिए। इसके अभाव में बीमारियों में दवाओं का असर कमजोर हो रहा है।
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पीएम मोदी ने जम्मू-कश्मीर के बारामूला में 2,000 साल पुराने बौद्ध स्तूपों और जेहनपोरा परिसर का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि, यह हमारे गौरवशाली अतीत का प्रतीक है और यह देशवासियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत की याद दिलाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भाषा और संस्कृति के संरक्षण के प्रयास निरंतर जारी हैं। उन्होंने दुबई में कन्नड़ पाठशाला और फिजी में पहली बार मनाए गए तमिल दिवस का उदाहरण दिया। इन पहलों से युवा अपनी मातृभाषा और संस्कृति से जुड़े हैं।
पीएम मोदी ने कच्छ के सफेद रण में आयोजित रणोत्सव का उल्लेख करते हुए कहा कि, यह देश की सांस्कृतिक विविधता और लोक कला का जीवंत उदाहरण है। 23 नवंबर से चल रहे इस उत्सव में 2 लाख से ज्यादा लोग शामिल हो चुके हैं। पीएम ने आम जनता से आग्रह किया कि, वे ऐसे उत्सवों में भाग लेकर भारत की विविध संस्कृति का अनुभव करें।
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प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानी पार्वती गिरि का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि, उनकी प्रेरक जीवन गाथा हर पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक है। हम सभी का दायित्व है कि, हम आजादी दिलाने वाले नायक-नायिकाओं की कहानियों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाएं।
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