नई दिल्ली। देश की राजनीति में हलचल के बीच आज रात एक बड़ा संबोधन होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रात 8:30 बजे देश को संबोधित करेंगे। इस संबोधन का विषय अभी आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि हाल ही में लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल इसका मुख्य मुद्दा हो सकता है।
प्रधानमंत्री का यह संबोधन ऐसे समय में हो रहा है, जब केंद्र सरकार लोकसभा में एक अहम संविधान संशोधन बिल पास कराने में सफल नहीं हो सकी। यह पिछले कई सालों में पहला मौका है, जब सरकार किसी बड़े बिल को पास कराने में नाकाम रही है। इस वजह से देशभर में इस मुद्दे पर चर्चा तेज है और अब सभी की नजर प्रधानमंत्री के संबोधन पर टिकी हुई है।
सरकार ने लोकसभा में संविधान का 131वां संशोधन बिल पेश किया था। इस बिल में लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके तहत राज्यों से 815 सीटें और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 सीटें तय करने की बात कही गई थी। यह बदलाव भविष्य में महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया से भी जुड़ा हुआ था।
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विवरण |
संख्या |
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कुल सीटें |
543 |
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भरी सीटें |
540 |
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मौजूद सांसद |
528 |
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जरूरी बहुमत (दो-तिहाई) |
352 |
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पक्ष में वोट |
298 |
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विरोध में वोट |
230 |
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कमी |
54 वोट |
बिल पास होने के लिए 352 वोट जरूरी थे, लेकिन सरकार को केवल 298 वोट ही मिल पाए। यानी 54 वोट कम पड़ने की वजह से बिल गिर गया।
इस बिल पर लोकसभा में करीब 21 घंटे तक चर्चा चली। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने तर्क रखे। हालांकि, लंबी बहस के बावजूद सरकार जरूरी समर्थन जुटाने में सफल नहीं हो पाई और आखिरकार वोटिंग में बिल गिर गया।
यह पहली बार है जब पिछले 12 साल के शासन में केंद्र सरकार किसी बिल को लोकसभा में पास नहीं करा सकी। इससे पहले सरकार लगातार अपने सभी प्रमुख विधेयकों को पास कराने में सफल रही थी, लेकिन इस बार संख्या बल कम पड़ गया।
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यह घटना इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि 24 साल बाद कोई सरकारी बिल संसद में गिरा है। इससे पहले साल 2002 में आतंकवाद से जुड़ा एक कानून पास नहीं हो पाया था। वहीं 1990 के बाद यह पहला मौका है जब कोई संविधान संशोधन बिल लोकसभा में गिरा है।
सरकार ने इस मुद्दे से जुड़े दो अन्य बिलों पर वोटिंग नहीं कराई। इनमें परिसीमन संशोधन और केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन से जुड़े प्रस्ताव शामिल थे। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि, ये दोनों बिल पहले बिल से जुड़े हुए हैं, इसलिए अलग से वोटिंग की जरूरत नहीं है।
महिला आरक्षण का मुद्दा इस पूरे मामले का सबसे अहम हिस्सा है। इस कानून के तहत लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जानी हैं। लेकिन इसके लागू होने से पहले परिसीमन जरूरी है। यानी यह तय करना होगा कि किस राज्य में कितनी सीटें होंगी और उनकी सीमाएं क्या होंगी। अब बिल गिरने के बाद यह साफ हो गया है कि महिला आरक्षण 2029 के चुनाव से पहले लागू नहीं हो पाएगा।
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परिसीमन का मतलब होता है आबादी के आधार पर चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं और सीटों की संख्या तय करना। यह काम एक विशेष आयोग करता है, जो तय करता है कि किस इलाके में कितनी सीटें होंगी। इसके बाद ही आरक्षण जैसे फैसले लागू किए जा सकते हैं।
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राज्य |
वर्तमान सीटें |
हिस्सा (%) |
नई सीटें |
नया हिस्सा (%) |
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कर्नाटक |
28 |
5.15% |
42 |
5.14% |
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आंध्र प्रदेश |
25 |
4.60% |
38 |
4.65% |
|
तेलंगाना |
17 |
3.13% |
26 |
3.18% |
|
तमिलनाडु |
39 |
7.18% |
59 |
7.23% |
|
केरल |
20 |
3.68% |
30 |
3.67% |
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कुल |
129 |
24% |
195 |
24% |
इसका मतलब है कि, परिसीमन के बाद भी दक्षिण भारत का कुल हिस्सा लगभग 24 प्रतिशत ही रहेगा।
प्रधानमंत्री पहले भी कई अहम मौकों पर देश को संबोधित कर चुके हैं।
2016: नोटबंदी की घोषणा
2019: जम्मू-कश्मीर से विशेष प्रावधान हटाने के बाद संबोधन
2020: कोरोना महामारी और देशव्यापी बंदी की घोषणा
2020: आत्मनिर्भर भारत अभियान का ऐलान
ऐसे में आज का संबोधन भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि आधिकारिक जानकारी नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री इस संबोधन में बिल गिरने के कारण, महिला आरक्षण पर सरकार का रुख और आगे की रणनीति जैसे मुद्दों पर बात कर सकते हैं।