नरेंद्र मोदी की जीवन यात्रा: 2001 में केशूभाई पटेल को हटाकर बनाया गया था गुजरात का सीएम, सबसे लंबे समय तक पीएम रहने वाले गैर कांग्रेसी नेता
नई दिल्ली। आज प्रधानमंत्री मोदी का 71वां जन्मदिन है। वह देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म देश को आजादी मिलने के बाद हुआ। 1950 में आज ही के दिन गुजरात के वडनगर में पीएम मोदी का जन्म हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टेशन पर चाय बेचने से लेकर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के मुखिया बनने तक का सफर तय किया है। दरअसल, उनके पिता दामोदरदास मोदी रेलवे स्टेशन पर चाय बेचा करते थे। इस काम में नरेंद्र मोदी अपने पिता की मदद किया करते थे। प्रधानमंत्री के रूप में मोदी कई रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं। वह सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर रहने वाले पहले गैर कांग्रेसी नेता हैं।
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नरेंद्र मोदी स्कूल के दिनों में NCC के कैडेट थे।[/caption]
गुजरात में RSS की नींव रखने वालों में शामिल रहे लक्ष्मणराव ईनामदार के साथ नरेंद्र मोदी।[/caption]
गुजरात के पूर्व CM केशुभाई पटेल के साथ मोदी[/caption]
वाइब्रेंट गुजरात क्रायक्रम के दौरान नरेंद्र मोदी[/caption]
मोदी पहली बार लोकसभा पहुंचे तो सदन की चौखट को झुककर प्रणाम किया था[/caption]
नरेंद्र मोदी स्कूल के दिनों में NCC के कैडेट थे।[/caption]
सैनिक स्कूल में एडमिशन लेना चाहते थे मोदी
8 साल की उम्र में ही मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस से जुड़ गए थे। नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने 60 के दशक के आखिरी वर्षों में RSS की स्थायी सदस्यता ली। जिसके बाद वह अहमदाबाद के मणिनगर इलाके में संघ के क्षेत्रीय मुख्यालय में रहने चले गए। जहां वे प्रांत प्रचारक लक्ष्मणराव ईनामदार के सहायक के रूप में काम करते थे। 1971 में संघ का पूर्णकालिक कार्यकर्ता बनने के बाद उनकी राजनीतिक शिक्षा-दीक्षा शुरू हुई। नरेंद्र मोदी स्कूल के दिनों में NCC के कैडेट थे। खबरों के मुताबिक मोदी सेना में जाने के लिए जामनगर के सैनिक स्कूल में एडमिशन लेना चाहते थे, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते ऐसा नहीं हो सका। [caption id="attachment_4113" align="aligncenter" width="300"]
गुजरात में RSS की नींव रखने वालों में शामिल रहे लक्ष्मणराव ईनामदार के साथ नरेंद्र मोदी।[/caption]
कब हुई राजनीतिक पारी की शुरुआत
प्रांत प्रचारक लक्ष्मणराव नरेंद्र मोदी को मानस पुत्र मानते थे, वहीं मोदी भी उन्हें अपना संरक्षक मानते थे। 1972 में मोदी प्रचारक बनाए गए। इसके अगले साल से वह गुजरात में भ्रष्टाचार के खिलाफ छात्रों के नवनिर्माण आंदोलन में शामिल हो गए। मोदी ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत 1975 में इमरजेंसी के दौरान की, जब उन्हें गुजरात 'लोक संघर्ष समिति' का महासचिव नियुक्त किया गया था। इसी दौरान वे लालकृष्ण आडवाणी के संपर्क में आए और उनके करीबी हो गए। 1985 में भाजपा में संगठन का काम मिला।पहली बार म्यूनिसिपल इलेक्शन में जीत दर्ज करवाई
मोदी को 1978 में विभाग प्रचारक बनाया गया और इसके बाद सूरत और बड़ौदा का संभाग प्रचारक बनाया गया। 1981 में उन्हें प्रांत प्रचारक बनाया गया। इस दौरान उन्हें संघ के अलग-अलग संगठनों के बीच समन्वय का काम सौंपा गया। 1983 में भाजपा ने पहली बार गुजरात के राजकोट में हुए म्यूनिसिपल इलेक्शन में जीत दर्ज की। इसके चार साल अहमदाबाद म्यूनिसिपल इलेक्शन भी भाजपा जीत गई। इस चुनाव के प्रचार अभियान की कमान नरेंद्र मोदी के पास थी। 1986 में जब लालकृष्ण आडवाणी भाजपा के अध्यक्ष बने तो उन्होंने नरेंद्र मोदी को पार्टी में शामिल करने का फैसला किया। इसके बाद 1987 में मोदी को गुजरात में भाजपा के संगठन मंत्री की जिम्मेदारी दी गई। जन संघ के प्रमुख दीनदयाल उपाध्याय ने 1950 में संगठन मंत्री का पद बनाया था। तब से ही यह पद भाजपा के संगठन की रीढ़ की हड्डी रहा है।लोगों से संवाद करते हैं पीएम
नरेंद्र मोदी को 1990 में लालकृष्ण आडवाणी की चर्चित रथयात्रा का गुजरात वाला हिस्सा आयोजित कराने की जिम्मेदारी मिली थी। संघ प्रचारक नरेंद्र मोदी 90 के दशक की शुरुआत से ही राजनीति में सक्रिय होने लगे थे। नरेंद्र मोदी हमेशा अपनी बातें लोगों तक सीधे पहुंचाने पर भरोसा करते थे। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने रेडियो पर 'मन की बात' शुरू की तो अपने राजनीतिक करियर के शुरुआत में भी वो लोगों से संवाद करते नजर आते थे। [caption id="attachment_4114" align="aligncenter" width="300"]
गुजरात के पूर्व CM केशुभाई पटेल के साथ मोदी[/caption]
अमेरिका ने वीजा देने से कर दिया था इनकार
गुजरात के भुज में आए भूकंप के बाद प्रशासनिक व्यवस्थाएं चरमरा गई थीं, तब 2001 में मोदी को मुख्यमंत्री बनाया गया। गुजरात की राजनीति में मोदी को लाने का श्रेय केशुभाई पटेल को ही जाता है। हालांकि 2001 में उन्हें हटाकर भाजपा ने मोदी को सीएम बना दिया था। 2014 तक नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री रहे। उसी दौरान अमेरिका ने मोदी को वीजा देने से इनकार कर दिया था। मोदी गुजरात दंगों को लेकर आरोपों से घिरे, लेकिन गुजरात के विकास मॉडल को बेस बनाकर केंद्र की राजनीति में आए और 2014 में प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के तौर पर पहली बार किसी गैर-कांग्रेसी पार्टी यानी भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाई। भाजपा ने अपने दम पर 282 सीटें हासिल की थीं। वहीं 2019 में लगातार दूसरी बार सत्ता में लौटे। [caption id="attachment_4115" align="aligncenter" width="300"]
वाइब्रेंट गुजरात क्रायक्रम के दौरान नरेंद्र मोदी[/caption]
गुजरात वाइब्रेंट समिट की शुरुआत
मोदी ने गुजरात में नई इंडस्ट्रीज को लाने के लिए 2003 में गुजरात वाइब्रेंट समिट की शुरुआत की थी। तब से लेकर अब तक 9 बार गुजरात वाइब्रेंट समिट आयोजित हो चुका है। साल 2011 में मोदी ने अहमदाबाद में तीन दिन का सद्भावना उपवास रखा था। तब उन्होंने कहा था कि उनका उपवास सभी को जोड़ने के लिए है। प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद जब मोदी पहली बार लोकसभा पहुंचे तो सदन की चौखट को झुककर प्रणाम किया था। प्रधानमंत्री बनने के बाद सदन में अपनी पहली स्पीच के दौरान मोदी की आंखों से आंसू छलक गए थे। तब लालकृष्ण आडवाणी की एक बात पर उन्होंने कहा था कि भाजपा मेरी मां है। [caption id="attachment_4116" align="aligncenter" width="300"]
मोदी पहली बार लोकसभा पहुंचे तो सदन की चौखट को झुककर प्रणाम किया था[/caption]











