मप्र हाईकोर्ट का बड़ा फैसला :भोजशाला में वाग्देवी की प्रतिमा लंदन से लाकर की जा सकेगी स्थापित, मुस्लिम पक्ष अपने लिए अलग जगह मांगे

इंदौर। भोजशाला मामले में मप्र हाईकोर्ट ने बड़ा निर्णय सुनाते हुए कहा है कि भोजशाला परिसर एक मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि भोजशाला परिसर-कमाल मस्जिद का विवादित हिस्सा धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से मंदिर स्वरूप रखता है। साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को देवी सरस्वती की मूर्ति स्थापित करने की अनुमति भी दी है। हालांकि परिसर का नियंत्रण पूरी तरह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पास ही रहेगा। हिंदू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के मुताबिक अदालत ने सरकार को परिसर की व्यवस्था और प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। फैसले के अनुसार अब परिसर में केवल पूजा-अर्चना की जा सकेगी। अदालत ने यह भी माना कि यह स्थान सरस्वती मंदिर के रूप में जाना जाता है।
विवादित परिसर पर मुस्लिम पक्ष का अधिकार नहीं
वहीं मुस्लिम पक्ष को लेकर अदालत ने कहा कि विवादित परिसर पर उनका कोई अधिकार स्थापित नहीं होता। हालांकि कोर्ट ने यह विकल्प खुला रखा कि मुस्लिम पक्ष कमाल मस्जिद के लिए सरकार से किसी अन्य स्थान की मांग कर सकता है। इस फैसले के बाद भोजशाला विवाद को लेकर लंबे समय से चल रही कानूनी बहस में एक नया मोड़ आ गया है।
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हाईकोर्ट ने 2003 के ASI के आदेश को रद्द किया
हाईकोर्ट ने वर्ष 2003 में ASI द्वारा जारी उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें हिंदू पक्ष के पूजा अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए थे और मुस्लिम समुदाय को नमाज की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि 2003 का आदेश हिंदू पक्ष के अधिकारों को सीमित करता था, इसलिए उसे निरस्त किया जाता है। साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार और ASI को भोजशाला परिसर के प्रबंधन और व्यवस्था को लेकर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पूरे परिसर का प्रशासन और प्रबंधन ASI ही जारी रखेगा।
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अदालत ने हिंदू पक्ष के हर तर्क को माना : वकील विष्णु शंकर जैन
भोजशाला मामले में हाईकोर्ट के फैसले के बाद वकील विष्णु शंकर जैन ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताया। उन्होंने कहा कि अदालत ने स्पष्ट रूप से भोजशाला को मंदिर माना है और हिंदू पक्ष की मूल मांग को स्वीकार किया है कि पूरा परिसर हिंदू मंदिर है। विष्णु जैन ने कहा कि कोर्ट ने हिंदू पक्ष के लगभग हर तर्क को माना है। उन्होंने कहा कि हिंदू पक्ष ने लंदन के म्यूजियम में रखी देवी वाग्देवी की मूर्ति को वापस लाने की मांग भी उठाई थी, जिस पर अदालत ने विचार करने को कहा है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार दिया है और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को निर्देश दिए हैं।
सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान का महत्वपूर्ण क्षण : डॉ. मोहन यादव
मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि
कैलाश विजयवर्गीय बोले-अमूल्य, अविस्मरणीय और आस्था के तेज से आलोकित अवसर
मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, 'सत्य सनातन धर्म की जय। हृदय आज गर्व, गौरव और आत्मिक आनंद से परिपूर्ण है। माननीय उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने विस्तृत सुनवाई एवं प्रस्तुत साक्ष्यों के गहन परीक्षण के उपरांत धार स्थित भोजशाला को मंदिर स्वरूप स्वीकार किया है। यह क्षण हम सभी के लिए इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों में अंकित होने वाला अमूल्य, अविस्मरणीय और आस्था के तेज से आलोकित अवसर है। यह निर्णय हमारी सांस्कृतिक चेतना, सनातन परंपरा और सभ्यता के स्वाभिमान का सम्मान है। यह सत्य, श्रद्धा और इतिहास की पुनर्प्रतिष्ठा का महत्वपूर्ण पल है। आप सभी को बहुत बहुत बधाई। जय माँ वाग्देवी।'
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DIG ने की दोनों पक्षों से शांति की अपील
भोजशाला मामले में हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद DIG मनोज कुमार सिंह और कलेक्टर राजीव रंजन मीणा ने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया है। कोई अफवाह ना फैसले इसलिए सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है। दोनों पक्षों की वरिष्ठ लोगों सेबातचीत करके अपने-अपने लोगों से शांति स्थापित करने की अपील की जा रही है।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा- सुप्रीम कोर्ट मामला सुलझाएगा
धार भोजशाला मामले में हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को सुलझाएगा और इस आदेश को रद्द करेगा। बाबरी मस्जिद मामले के फैसले से इसमें स्पष्ट समानताएं हैं।'
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रामेश्वर शर्मा बोले- सत्य कभी पराजित नहीं हो सकता
धार भोजशाला मामले पर MLA रामेश्वर शर्मा बोले- सत्य कभी पराजित नहीं हो सकता, यह आज फिर से एक बार साबित हुआ है। भोजशाला के लिए सनातनियों ने लंबी लड़ाई लड़ी, न्यायालय पर विश्वास बना रहा और आज सत्य की जीत हुई है।
हाईकोर्ट के फैसले का अध्ययन किया जाएगा : दिग्वियज सिंह
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इंदौर में कहा कि फैसले का अध्ययन किया जाएगा, देश के नियम व प्रचलनों के अनुसार ही आगे कदम उठने चाहिए। सिंह ने कहा जामिया मस्जिद, बनारस और अन्य तीन मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के रूप में लंबित हैं। उन्होंने कहा कि भोजशाला एएसआई प्रोटेक्टेड साइट है, ऐसे में वहां पूजा-अनुष्ठान की अनुमति का अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट ही करेगा। सिंह ने कहा एएसआई की रिपोर्ट में कई दावों का उल्लेख नहीं, इसलिए पूरे फैसले की गहराई से जांच जरूरी। सिंह ने कहा कि देश में सामाजिक चेतना और सौहार्द के संकट के समय सिर्फ एक समुदाय को निशाना बनाना उचित नहीं। सिंह ने दोहराया कानून व संविधान के दायरे में रहकर ही सभी निर्णय होना चाहिए, अंतिम निर्णय सर्वोच्च न्यायालय का होगा।












