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तेल 125 रुपये पार जाने के आसार:पेट्रोल-डीजल पर कंपनियों को भारी घाटा, कीमतें बढ़ने के संकेत

देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें भले ही लंबे समय से स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन इसके पीछे तेल कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव छिपा हुआ है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद सरकारी कंपनियां आम लोगों को राहत देने के लिए कीमतें नहीं बढ़ा रहीं, जिससे उनका घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है।
पेट्रोल-डीजल पर कंपनियों को भारी घाटा, कीमतें बढ़ने के संकेत
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड जैसी सरकारी तेल कंपनियां प्रति लीटर पेट्रोल और डीजल पर भारी नुकसान उठा रही हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में ईंधन के दामों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

    कीमत स्थिर, लेकिन कंपनियों का घाटा बढ़ा

    देश में अप्रैल 2022 से पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत जरूर मिली है लेकिन इसका सीधा असर तेल कंपनियों की कमाई पर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद कंपनियां बाजार दर पर कीमतें नहीं बढ़ा पा रहीं जिससे प्रति लीटर पेट्रोल पर करीब 18 रुपये और डीजल पर 35 रुपये तक का नुकसान हो रहा है। यह घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है और कंपनियों के वित्तीय संतुलन को प्रभावित कर रहा है। सरकार के दबाव और महंगाई नियंत्रण के चलते कंपनियां कीमतों को स्थिर बनाए हुए हैं।

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    ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव से बढ़ी मुश्किलें

    वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में पिछले कुछ सालों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है जिसने भारतीय कंपनियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थीं, वहीं बाद में गिरावट भी आई लेकिन हालिया तनाव के चलते फिर उछाल देखा गया है। कभी 70 डॉलर तक गिरने के बाद अब कीमतें 120 डॉलर के करीब पहुंच चुकी हैं जिससे लागत बढ़ गई है। इस अस्थिरता का सीधा असर कंपनियों के मुनाफे और रणनीति पर पड़ रहा है।

    तेल कंपनियों को रोजाना हजारों करोड़ का नुकसान

    रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकारी तेल कंपनियां हाल तक प्रतिदिन करीब 2,400 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही थीं जो अब घटकर लगभग 1,600 करोड़ रुपये रह गया है। सरकार ने उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की लेकिन इसका फायदा उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचाया गया बल्कि कंपनियों के घाटे को कम करने में इस्तेमाल किया गया। इसके बावजूद नुकसान पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है और मार्च महीने में हुए घाटे ने पहले की कमाई को भी समाप्त कर दिया है। इससे कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी असर पड़ने की संभावना है।

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    चुनाव के बाद बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में एनर्जी की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय है खासतौर पर चुनावों के बाद इसका असर देखने को मिल सकता है। भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है जिससे वह वैश्विक कीमतों पर काफी निर्भर है। पश्चिम एशिया, रूस और अमेरिका से आयात होने वाले तेल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। अगर कंपनियों को घाटे से उबरना है तो पेट्रोल के दाम 125 रुपये प्रति लीटर से ऊपर जा सकते हैं जिससे आम लोगों की जेब पर बड़ा असर पड़ेगा।

    Rohit Sharma
    By Rohit Sharma

    पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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