नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को लखनऊ के वकील अशोक पांडे की याचिका खारिज कर दी। वकील ने केंद्र सरकार से दावा किया था कि उन्होंने वर्ष 2018 में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा को बचाने के लिए छह मुकदमे दायर किए थे। इसके बदले में उन्होंने सरकार से एक करोड़ रुपये की फीस और खर्च देने की मांग की थी। शीर्ष अदालत ने याचिका को पूरी तरह अनुचित करार दिया और यह स्पष्ट किया कि कोई भी सामाजिक सेवा पैसों में आंकी नहीं जा सकती।
यह मामला लखनऊ के वकील अशोक पांडे की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के पिछले साल मार्च के एक आदेश को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने भी वकील की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें केंद्र सरकार से उनके द्वारा दायर छह मामलों के लिए एक करोड़ रुपये शुल्क और खर्च देने का निर्देश देने की मांग की गई थी। अशोक पांडे ने अदालत को बताया कि उन्होंने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा का बचाव करने के लिए छह मुकदमे दायर किए थे। उन्होंने कहा कि इन मामलों में मुकदमेबाजी और कानूनी खर्च पर लगभग दो लाख रुपये खर्च हुए, जिसके लिए उन्होंने अपनी बेटी से पैसे उधार लिए। वकील ने जनवरी 2018 में शीर्ष अदालत के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी उल्लेख किया और कहा कि उस समय मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करना नियमों के खिलाफ था।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली शामिल थे, ने याचिका को अनुचित करार दिया। मुख्य न्यायाधीश ने वकील से सवाल किया कि जब आपने पहले न्यायाधीशों पर आरोप लगाए थे, तो अब ‘माननीय’ शब्द क्यों प्रयोग कर रहे हैं?
अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी संस्था या न्यायिक प्रणाली के लिए की गई सामाजिक सेवा हमेशा अनमोल होती है। अदालत ने कहा कि इसे पैसों में मापना सही नहीं है।
ये भी पढ़ें: महाकुंभ वाली मोनालिसा के पापा बोले- एक्टिंग का बोलकर मेरी बेटी को केरल ले गए और शादी कर ली
इससे पहले, वकील ने कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा जुलाई 2024 में जारी आदेश को भी उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उस आदेश में उनके दावे को अस्वीकार किया गया था जिसमें केंद्र सरकार से उनके द्वारा दायर छह मामलों के लिए एक करोड़ रुपये शुल्क और खर्च देने का निर्देश देने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस दावे को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया।
पीठ ने वकील की दलीलों पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'आपने संस्था के लिए सामाजिक सेवा प्रदान की। सामाजिक सेवा हमेशा अनमोल होती है। इसे एक करोड़ या दो करोड़ रुपये में कैसे आंका जा सकता है? पीठ ने आगे कहा कि वकील ने सामाजिक सेवा की है और यदि वह सराहना चाहते हैं, तो 'हम इसके लिए आपकी सराहना करते हैं।' शीर्ष अदालत ने वकील की याचिका को खारिज कर दिया। इससे पहले, वकील ने कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा जुलाई 2024 में जारी एक आदेश को भी उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसके तहत तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश को बचाने के लिए छह मामले दायर करने के एवज में एक करोड़ रुपये शुल्क और खर्च के भुगतान के उनके दावे को अस्वीकार कर दिया गया था।