भोपाल:आदिवासी बस्ती हटाने पर मचा बवाल, विरोध में उतरे कांग्रेसी नेता

भोपाल के पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित मानस भवन के पास आदिवासी बस्ती हटाने की कार्रवाई ने शनिवार को बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। जिला प्रशासन की टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में सुबह से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की जो दोपहर करीब 3 बजे तक चली। इस दौरान इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
रात से घेराबंदी, सुबह शुरू हुई कार्रवाई
प्रशासन ने किसी भी विरोध को रोकने के लिए शुक्रवार रात से ही इलाके की घेराबंदी कर दी थी। शनिवार सुबह बैरिकेडिंग कर पूरी तरह आवाजाही बंद कर दी गई। सुबह करीब 7 बजे बुलडोजर के साथ टीम मौके पर पहुंची और बस्ती हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।
कांग्रेस नेताओं ने मौके पर दिया धरना
कार्रवाई की खबर मिलते ही कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, नगर निगम नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी और आसिफ जकी मौके पर पहुंचे और विरोध जताते हुए धरने पर बैठ गए। नेताओं ने प्रशासन पर बिना उचित पुनर्वास के कार्रवाई करने का आरोप लगाया।
टावर पर चढ़ा युवक
कार्रवाई के दौरान एक युवक विरोध में टावर पर चढ़ गया जिससे कुछ देर के लिए स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। हालांकि पुलिस ने समझाइश देकर उसे सुरक्षित नीचे उतार लिया।
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हंगामा बढ़ा तो पुलिस ने किया हल्का लाठीचार्ज
जब विरोध प्रदर्शन तेज हुआ और स्थिति बिगड़ने लगी तो पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज किया। इसके बाद भी जब प्रदर्शनकारी नहीं हटे तो पुलिस ने शबिस्ता जकी, आसिफ जकी समेत कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया। बाद में सभी को छोड़ दिया गया।
27 परिवारों को दूसरी जगह किया जाएगा शिफ्ट
प्रशासन के अनुसार इस बस्ती में रहने वाले 27 परिवारों को भौंरी, कलखेड़ा और मालीखेड़ी में पुनर्वासित किया जाएगा। बताया जा रहा है कि यह बस्ती करीब 70 साल पुरानी थी। कार्रवाई के लिए कुल 95 अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी।
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पुनर्वास को लेकर उठे सवाल
स्थानीय लोगों और विपक्ष का आरोप है कि बिना स्थायी और व्यवस्थित पुनर्वास के इस तरह की कार्रवाई से गरीब परिवारों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। वहीं प्रशासन का कहना है कि नियमानुसार कार्रवाई की गई है और प्रभावित परिवारों को दूसरी जगह बसाया जाएगा।











