यूके में मंदिर बनाने को लेकर टकराव:हिंदुओं ने क्रिश्चयन-मुस्लिमों के खिलाफ जमीन के लिए लगाई बोली

लंदन। नॉर्थ्सटो में रहने वाले हिंदू समुदाय के लिए धार्मिक स्थल की कमी लंबे समय से एक बड़ी समस्या बनी हुई है। इस इलाके में करीब 150 हिंदू परिवार रहते हैं लेकिन 40 मील के दायरे में कोई मंदिर नहीं है। ऐसे में जब धर्मस्थल के लिए आरक्षित जमीन उपलब्ध होने की खबर मिली तो समुदाय में उत्साह बढ़ गया।
त्योहार मनाने के लिए पार्क और किराए की जगहों का सहारा
हिंदू समुदाय की प्रोजेक्ट लीडर अपर्णा निगम सक्सेना के मुताबिक यहां के लोग अपने त्योहार पार्कों या किराए की जगहों पर मनाते हैं। कई बार पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों की अनुमति भी नहीं मिलती। उनका कहना है कि यहां पले-बढ़े बच्चों को अपने धर्म और परंपराओं की जानकारी सीमित रह जाती है।
0.25 हेक्टेयर जमीन पर दो दावेदार
स्थानीय काउंसिल के पास तालाब के किनारे करीब 0.25 हेक्टेयर जमीन है जिसे 999 साल की लीज पर धार्मिक स्थल के लिए देने की योजना है। इस जमीन के लिए दो प्रमुख दावेदार सामने आए हैं एक हिंदू समुदाय और दूसरा क्रिश्चयन नेटवर्क जो मुस्लिम समुदाय के साथ मिलकर प्रस्ताव लेकर आया है।
चर्च-मुस्लिम समूह का मल्टी-फेथ प्लान
क्रिश्चयन और मुस्लिम समुदाय के संयुक्त प्रस्ताव में प्रार्थना के लिए चर्च, जुमे की नमाज के लिए हॉल, इस्लामिक क्लासेस के लिए प्रेयर रूम, कैफे, कम्युनिटी स्पेस और गार्डन शामिल हैं। इसे एक मल्टी-फेथ और कम्युनिटी सेंटर के रूप में विकसित करने की योजना है।
हिंदू समुदाय का वेलबींग हब मॉडल
दूसरी ओर हिंदू समुदाय ने अपनी योजना में 79% क्षेत्र को कम्युनिटी और वेलबींग हब के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें किचन, कैफे, योग और कोडिंग क्लासेस जैसी सुविधाएं होंगी। साथ ही दो ऐसे प्रेयर रूम होंगे, जिनका उपयोग सभी धर्मों के लोग कर सकेंगे। मंदिर का निर्माण कुल जमीन के 21% हिस्से में किया जाएगा।
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काउंसिल के सामने फाइनेंशियल ट्रैक रिकॉर्ड बड़ी चुनौती
साउथ कैम्ब्रिजशायर डिस्ट्रिक्ट काउंसिल जून में इस जमीन को लेकर अंतिम फैसला लेगी। फिलहाल संकेत मिल रहे हैं कि हिंदू समुदाय को फाइनेंशियल ट्रैक रिकॉर्ड की कमी के चलते झटका लग सकता है। काउंसिल का मानना है कि उनके प्रस्ताव में व्यापक सामुदायिक दृष्टिकोण उतना स्पष्ट नहीं है।
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फिर भी इसी जमीन पर टिकी है उम्मीद
हालांकि हिंदू समुदाय के पास अन्य प्लॉट्स के विकल्प हो सकते हैं लेकिन उनका कहना है कि तालाब के किनारे स्थित यह जमीन सबसे उपयुक्त है। ऐसे में अब सबकी नजर जून में आने वाले फैसले पर टिकी है जो इस इलाके के धार्मिक और सामाजिक ढांचे को प्रभावित कर सकता है।












