क्या सच में सिंक हो जाते हैं पीरियड्स?सच्चाई जानकर रह जाएंगे हैरान!

क्या सच में साथ रहने वाली महिलाओं के पीरियड्स सिंक हो जाते हैं, या ये सिर्फ एक पुराना भ्रम है? सालों से चली आ रही इस धारणा पर अब साइंस ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जिस कनेक्शन को लोग शरीर की मिस्ट्री मानते थे, वो दरअसल एक संयोग भी हो सकता है।
सच्चाई जानकर रह जाएंगे हैरान!
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    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    आज भी कई घरों, हॉस्टल्स और फ्रेंड सर्कल में एक बात बार-बार सुनने को मिलती है हम सबके पीरियड्स एक साथ आ गए। सुनने में ये एक रहस्यमयी कनेक्शन लगता है, जैसे शरीर आपस में कोई गुप्त भाषा बोल रहे हों। लेकिन  शरीर कोई वाई-फाई नेटवर्क नहीं है जो अपने आप कनेक्ट हो जाए। अब सवाल ये है कि क्या ये सच में विज्ञान है या बस एक भ्रम?

    मासिक धर्म सिंक क्या होता है?

    इसे वैज्ञानिक भाषा में मासिक धर्म समकालिकता (Menstrual Synchronization) कहा जाता है। सीधे शब्दों में जब दो या उससे ज्यादा महिलाओं के पीरियड्स एक ही समय के आसपास आने लगते हैं।

    कई लोग मानते हैं कि ये कोई जैविक कनेक्शन है जैसे शरीर खुद-ब-खुद एक लय में आ जाते हैं।

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    कहां से आया यह विचार?

    1971 में मनोवैज्ञानिक Martha McClintock ने एक स्टडी की। उन्होंने कॉलेज की 135 लड़कियों को ऑब्जर्व किया, जो एक साथ हॉस्टल में रहती थीं। जो लड़कियां साथ रहती थीं या ज्यादा समय साथ बिताती थीं, उनके पीरियड्स धीरे-धीरे एक जैसी तारीखों पर आने लगे।
    बस यहीं से शुरू हुआ पीरियड सिंक का ट्रेंड जो आज भी सोशल मीडिया से लेकर रोजमर्रा की बातचीत तक आ गया है।

    कहानी और ट्रेंड में कितना सच?

    समय के साथ वैज्ञानिकों ने इस स्टडी को दोबारा जांचा और कई खामियां सामने आईं। 
    हर लड़की का पीरियड साइकिल अलग होता है, लेकिन स्टडी में सभी का 28 दिन का साइकिल मान लिया गया। पूरे समय के दौरान साइकिल की लंबाई रिकॉर्ड ही नहीं की गई। जो सिंक दिखा, वो शायद सिर्फ संयोग (coincidence) था।

    क्या हार्मोन और फेरोमोन्स जिम्मेदार हैं?

    एक थ्योरी ये भी दी गई कि शरीर से निकलने वाले फेरोमोन्स (गंध संकेत) हवा के जरिए दूसरी महिलाओं के हार्मोन को प्रभावित करते हैं, लेकिन आधुनिक रिसर्च अब तक इसे पुख्ता तौर पर साबित नहीं कर पाई है। यानी ये आइडिया सुनने में फिल्मी लगता है, पर साइंस अभी इसे कन्फर्म नहीं करता।

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    नई रिसर्च क्या कहती है?

    हाल के कई अध्ययनों में उल्टा रिजल्ट सामने आया है:

    • साथ रहने वाली महिलाओं के पीरियड्स सिंक होने के बजाय अलग-अलग हो जाते हैं।
    • हर महिला का साइकिल 28 से 35 दिन (या उससे भी अलग) हो सकता है।
    • डेट्स का मिलना सिर्फ ओवरलैप (overlap) हो सकता है, न कि सिंक।

    यानी अगर दो लोगों के पीरियड्स पास-पास आ जाएं, तो ये जरूरी नहीं कि वे कनेक्ट हो गए हों।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...

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