टीम पीपुल्स समाचार। भोपाल में रसोई गैस सिलेंडरों की किल्लत लगातार छठे दिन भी बनी रही। हालात ऐसे हैं कि लोग खाली सिलेंडर लेकर गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर लंबी लाइनों में खड़े दिखाई दे रहे हैं। कई जगह उपभोक्ताओं को सुबह से दोपहर तक इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि कई लोगों को सिलेंडर मिले बिना ही वापस लौटना पड़ रहा है। इस संकट का असर अब घरों की रसोई के साथ-साथ बाजार, छोटे कारोबार और छात्रों की पढ़ाई तक पहुंच गया है।

शहर के पांच नंबर स्थित जौहरी गैस एजेंसी, ईदगाह हिल्स, नेहरू नगर, जवाहर चौक, अवधपुरी, बैरागढ़ और कोलार समेत कई इलाकों की गैस एजेंसियों पर लोगों की भारी भीड़ देखी गई। जिन लोगों की पर्ची कटी, उन्हें सुबह 8 बजे से लेकर दोपहर 2 बजे तक इंतजार के बाद सिलेंडर मिला। इससे लोगों की रोजमर्रा की दिनचर्या भी प्रभावित हुई और कई लोग ऑफिस भी देर से पहुंचे। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्होंने एक सप्ताह पहले सिलेंडर बुक कराया था, लेकिन अब तक उनके घरों पर डिलीवरी नहीं हुई है।
गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं को घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ रहा है। कई जगह लोगों और कर्मचारियों के बीच बुकिंग और सप्लाई को लेकर बहस भी देखने को मिली।

नेहरू नगर निवासी गजेंद्र तिवारी ने बताया कि वह सुबह 8 बजे से जवाहर चौक स्थित एजेंसी पर सिलेंडर लेकर खड़े हैं, लेकिन कई घंटे बाद भी पर्ची नहीं कटी। उन्होंने कहा कि वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन पिछले छह दिनों से गैस सिलेंडर के लिए परेशान हैं।

शास्त्री नगर के मुकेश तिवारी का कहना है कि उन्होंने मोबाइल से बुकिंग करने की कोशिश की, लेकिन नंबर नहीं लगा। मजबूरी में उन्हें एजेंसी पर आकर लाइन में लगना पड़ा और सुबह से भूखे-प्यासे इंतजार करना पड़ा।
गैस संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने अलग-अलग टीम बनाकर गैस एजेंसियों और उनके गोदामों की जांच शुरू कर दी है। एसडीएम के नेतृत्व में कई टीमों ने शहर के विभिन्न इलाकों में निरीक्षण किया। बैरागढ़ क्षेत्र में भैंसाखेड़ी स्थित भारत और इंडेन गैस एजेंसियों की जांच की गई। प्रशासन ने एजेंसी संचालकों को चेतावनी दी कि घरेलू गैस सिलेंडर होटल और रेस्टोरेंट को नहीं दिए जाएं। यदि ऐसा पाया गया तो एजेंसी का लाइसेंस तक निरस्त किया जा सकता है। इसी तरह जिंसी चौराहे और गोविंदपुरा क्षेत्र में भी गैस एजेंसियों की जांच की गई, लेकिन मौके पर कालाबाजारी का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया।
कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने लोगों से अपील की है कि जरूरत होने पर ही सिलेंडर की बुकिंग करें और होटल-रेस्टोरेंट संचालक वैकल्पिक व्यवस्था अपनाएं। उन्होंने कहा कि डीजल स्टोव, लकड़ी के चूल्हे, इंडक्शन और इलेक्ट्रिक तंदूर का इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कहीं सिलेंडर की कालाबाजारी की जानकारी मिले तो जिला प्रशासन के एलपीजी हेल्प डेस्क के हेल्पलाइन नंबर 9685404087 पर शिकायत की जा सकती है।
कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी का सबसे ज्यादा असर शहर के स्ट्रीट फूड बाजार पर पड़ा है। कई छोटे होटल, चाय-नाश्ते की दुकानें और ठेले गैस नहीं मिलने के कारण बंद हो गए हैं।

हमीदिया रोड के समोसा विक्रेता इमरान खान ने बताया कि सिलेंडर नहीं मिलने के कारण उन्हें दो दिन दुकान बंद रखनी पड़ी। कोलार के महेश यादव ने कहा कि इंडक्शन चूल्हा खरीदना पड़ा, लेकिन उस पर समोसे बनाना मुश्किल है और बिजली का बिल भी बढ़ रहा है।
गैस संकट का असर किचन अप्लायंसेज के बाजार में भी दिखाई दे रहा है। पिछले तीन दिनों में भोपाल में करीब 20 हजार से ज्यादा इंडक्शन कुकटॉप बिक चुके हैं। इनमें लगभग 8 हजार यूनिट ऑनलाइन और 12 हजार यूनिट ऑफलाइन बाजार से खरीदे गए हैं। अचानक बढ़ी मांग के कारण इंडक्शन कुकटॉप की कीमत भी बढ़ गई है। कुछ समय पहले जो बेसिक इंडक्शन कुकटॉप करीब 1499 रुपए में मिल रहा था, उसकी कीमत अब लगभग 2000 रुपए तक पहुंच गई है। कई दुकानों में तो स्टॉक भी लगभग खत्म हो गया है।
गैस संकट के चलते कई ढाबों और होटल संचालकों ने लकड़ी के चूल्हे का सहारा लेना शुरू कर दिया है। इससे शहर में जलाऊ लकड़ी की मांग भी तेजी से बढ़ गई है। पहले जहां रोजाना करीब 40 से 50 टन लकड़ी की खपत होती थी, वहीं अब यह बढ़कर 70 से 80 टन प्रतिदिन तक पहुंच गई है। लकड़ी व्यापारी अतीक खान के अनुसार कुछ महीने पहले तक जलाऊ लकड़ी 800 से 900 रुपए प्रति क्विंटल मिलती थी, लेकिन अब इसकी कीमत बढ़कर करीब 1100 रुपए प्रति क्विंटल हो गई है।
गैस संकट का असर छात्रों पर भी पड़ने लगा है। मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (मैनिट) की कैंटीनों में फिलहाल सिलेंडर की सप्लाई जारी है, लेकिन डीन स्टूडेंट वेलफेयर ने छात्रों के साथ बैठक कर संभावित आपात स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा है।


कुछ छात्रों का कहना है कि कैंटीन में अभी भोजन मिल रहा है, लेकिन शाम के नाश्ते में पके हुए नाश्ते की जगह फल दिए जाने लगे हैं। वहीं बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के बॉयज हॉस्टल फिलहाल बंद हैं क्योंकि अधिकांश छात्र होली की छुट्टियों में घर गए हुए हैं। निजी हॉस्टलों में भी संचालकों ने सावधानी के तौर पर सिलेंडर की खपत सीमित रखने के निर्देश दिए हैं।
शहर में कई टिफिन सर्विस संचालकों ने गैस की कमी का हवाला देकर सेवा अस्थायी रूप से बंद कर दी है। जहां टिफिन सेवा जारी है, वहां 70-80 रुपए में मिलने वाला टिफिन अब 150 रुपए तक में मिल रहा है। चाय और नाश्ते की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। गैस सिलेंडर की किल्लत ने राजधानी की रसोई से लेकर बाजार तक कई व्यवस्थाओं को प्रभावित कर दिया है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि गैस की सप्लाई कब सामान्य होगी।