बस्ती जिले से एक बेहद अनोखा और चर्चा में बना मामला सामने आया है, जिसने रिश्तों, आस्था और संकल्प को लेकर नई बहस छेड़ दी है। यहां एक युवक ने अपनी पत्नी से अलग होने की मन्नत देवी मां से मांगी थी और जब उसका तलाक हो गया, तो उसने अपनी प्रतिज्ञा निभाते हुए करीब 9 किलोमीटर की दंडवत यात्रा कर मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इस घटना ने पूरे इलाके में लोगों का ध्यान खींच लिया है और अब यह कहानी तेजी से चर्चा का विषय बन गई है।
जानकारी के अनुसार युवक का नाम जोगेश है जिसकी शादी साल 2022 में हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ने लगे। हालात इतने खराब हो गए कि जोगेश मानसिक रूप से परेशान रहने लगा। इसी दौरान उसने देवी मां से प्रार्थना की कि अगर उसे इस रिश्ते से मुक्ति मिल जाती है, तो वह दंडवत यात्रा कर मंदिर में दर्शन करने जाएगा। समय के साथ दोनों के बीच मामला तलाक तक पहुंच गया और साल 2026 में उनका कानूनी तौर पर अलगाव हो गया। जोगेश ने इसे अपनी मन्नत पूरी होना माना और अपना वचन निभाने का फैसला किया।
मन्नत पूरी होने के बाद जोगेश ने अपने गांव से भानपुर स्थित मंदिर तक करीब 9 किलोमीटर की दंडवत यात्रा करने का संकल्प लिया। यह यात्रा सामान्य नहीं थी बल्कि बेहद कठिन मानी जाती है, जिसमें व्यक्ति जमीन पर लेटकर बार-बार आगे बढ़ता है। शनिवार सुबह उसने बिना कुछ खाए-पिए यात्रा शुरू की और लगभग 12 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद शाम तक मंदिर पहुंच गया। इस दौरान वह लगातार माता के जयकारे लगाता रहा और अपनी आस्था को मजबूत बनाए रखा।
इस अनोखी यात्रा को लेकर जोगेश ने पहले प्रशासन से अनुमति भी ली थी। उसने एसडीएम कार्यालय में आवेदन देकर सड़क मार्ग पर दंडवत यात्रा की इजाजत मांगी थी, जिसे मंजूरी मिल गई। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने उसके साथ दो पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की, जो पूरी यात्रा के दौरान उसके साथ रहे। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि यात्रा के दौरान किसी तरह की कोई समस्या या दुर्घटना न हो।
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जोगेश की इस यात्रा में उसके परिवार के सदस्य और गांव के कई लोग भी साथ रहे। पूरे रास्ते लोग उसके साथ चलते रहे और देवी मां के जयकारे लगाते रहे। इससे माहौल पूरी तरह धार्मिक और भावनात्मक बना रहा। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहली बार इस तरह की दंडवत यात्रा देखी, जिसमें किसी ने निजी जीवन की समस्या को आस्था से जोड़कर पूरा किया हो।
करीब 12 घंटे की कठिन यात्रा पूरी करने के बाद जोगेश शाम को भानपुर स्थित मंदिर पहुंचा। वहां उसने विधि-विधान से पूजा की, प्रसाद चढ़ाया और देवी मां का आशीर्वाद लिया। उसने कहा कि उसने जो संकल्प लिया था, उसे पूरा कर उसे मानसिक शांति मिली है। उसके अनुसार, यह यात्रा उसके लिए केवल शारीरिक नहीं बल्कि भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव भी रही।
इस पूरी घटना के बाद इलाके में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे आस्था और विश्वास की मिसाल मान रहे हैं, तो कुछ इसे निजी जीवन की जटिलता से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि लोग अपनी परेशानियों का समाधान कभी-कभी आस्था और संकल्प के जरिए खोजने की कोशिश करते हैं।