संसद से दूरी :अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला होने तक सदन में नहीं जाएंगे स्पीकर ओम बिरला, एक महीने तक कौन चलाएगा संसद?

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तय किया है उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो जाता तब तक वे सदन में नहीं जाएंगे। विपक्ष की ओर से उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है।
अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला होने तक सदन में नहीं जाएंगे स्पीकर ओम बिरला, एक महीने तक कौन चलाएगा संसद?
AI जनरेटेड सारांश
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    नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक अहम और असामान्य फैसला लेते हुए कहा है कि वे अपने खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर निर्णय होने तक सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं होंगे। उनका यह कदम पूरी तरह नैतिक आधार पर बताया जा रहा है। कांग्रेस द्वारा उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जाने के तुरंत बाद स्पीकर ने यह रुख अपनाया। ओम बिरला ने लोकसभा सचिवालय को निर्देश दिए हैं कि उनके विरुद्ध दिए गए अविश्वास नोटिस की गहन समीक्षा की जाए और नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया तय की जाए।

    राजनीतिक हलचल के बीच सदन में बढ़ा तनाव 

    कांग्रेस के इस कदम के बाद संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्ष का कहना है कि यह प्रस्ताव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक हथकंडा बता रहा है। लोकसभा अध्यक्ष का खुद को कार्यवाही से अलग रखना संसदीय इतिहास में एक नैतिक उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने इस मुद्दे को और अधिक गंभीर बना दिया है।

    संबित पात्रा का पलटवार  

    इस बारे में भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसदों ने स्पीकर जैसे संवैधानिक पद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर संसदीय मर्यादाओं को कमजोर किया है। पात्रा ने यह आरोप भी लगाया कि कांग्रेस तमिलनाडु के एक जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की रणनीति पर भी काम कर रही है, जिससे उसकी नीयत पर संदेह पैदा होता है।

    कांग्रेस का दावा-118 सांसदों का समर्थन

    कांग्रेस की ओर से सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि नियम 94C के तहत लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दोपहर 1:14 बजे सौंपा गया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस नोटिस पर कुल 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी पार्टी के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि वे आगामी बजट भाषण की तैयारी में जुटे हैं। इस घटनाक्रम के बाद संसद का सियासी तापमान और तेज हो गया है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर तीखी बहस के आसार हैं।

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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