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पंगुनी उथिरम 2026 :क्यों खास है यह दिन, जानें पूजा विधि और धार्मिक मान्यता

पंगुनी उथिरम 2026 कब है? जानें इस पवित्र दक्षिण भारतीय पर्व की तिथि, धार्मिक महत्व, पूजा विधि, परंपराएं और इससे जुड़ी पौराणिक कथा। यह दिन भगवान शिव-पार्वती और भगवान मुरुगन के दिव्य विवाह से जुड़ा माना जाता है।
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क्यों खास है यह दिन, जानें पूजा विधि और धार्मिक मान्यता
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    पंगुनी उथिरम दक्षिण भारत का एक महत्वपूर्ण हिंदू पर्व है, जिसे विशेष रूप से तमिलनाडु में बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह पर्व तमिल माह ‘पंगुनी’ में ‘उथिरम’ (उत्तराफाल्गुनी) नक्षत्र के दिन आता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन कई दिव्य विवाह हुए थे, इसलिए इसे दिव्य विवाहों का दिन भी कहा जाता है। इस अवसर पर भक्त व्रत रखते हैं, मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं और भगवान से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। यह पर्व प्रेम, भक्ति और वैवाहिक जीवन की पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।

    पंगुनी उथिरम 2026 कब है?

    साल 2026 में पंगुनी उथिरम 01 अप्रैल, बुधवार को मनाया जाएगा।

    उथिरम नक्षत्र प्रारंभ: 31 मार्च 2026, दोपहर 3:20 बजे

    उथिरम नक्षत्र समाप्त: 01 अप्रैल 2026, शाम 4:17 बजे

    पंगुनी उथिरम शुभ मुहूर्त

    ब्रह्म मुहूर्त - 04:39 ए एम से 05:25 ए एम

    प्रातः सन्ध्या - 05:02 ए एम से 06:11 ए एम

    अभिजित मुहूर्त - कोई नहीं

    विजय मुहूर्त - 02:30 पी एम से 03:20 पी एम

    गोधूलि मुहूर्त - 06:38 पी एम से 07:01 पी एम

    सायाह्न सन्ध्या - 06:39 पी एम से 07:48 पी एम

    अमृत काल - 08:48 ए एम से 10:28 ए एम

    निशिता मुहूर्त - 12:02 ए एम, अप्रैल 02 से 12:48 ए एम, 02 अप्रैल

    सर्वार्थ सिद्धि योग - 04:17 पी एम से 06:10 ए एम, 02 अप्रैल

    रवि योग - 06:11 ए एम से 04:17 पी एम

    इस दिन भक्त विशेष पूजा और व्रत करके भगवान से परिवार की खुशहाली और वैवाहिक सुख की कामना करते हैं।

    पंगुनी उथिरम का धार्मिक महत्व

    धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार यह दिन कई दिव्य घटनाओं से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसके अलावा भगवान मुरुगन और देवी देवसेना का विवाह भी इसी दिन हुआ था।

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    कुछ मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान राम और माता सीता का विवाह भी हुआ था। साथ ही समुद्र मंथन के दौरान देवी महालक्ष्मी के प्राकट्य की मान्यता भी इस दिन से जुड़ी है। इसी कारण यह पर्व दांपत्य सुख, प्रेम और पारिवारिक समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

    पंगुनी उथिरम कैसे मनाया जाता है?

    तमिलनाडु और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में यह पर्व बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। कई मंदिरों में यह उत्सव लगभग 10 दिनों तक चलता है। मंदिरों को सुंदर फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। अंतिम दिन ‘थिरुकल्याणम’ (दिव्य विवाह समारोह) आयोजित किया जाता है, जिसमें भगवान और देवी के विवाह का प्रतीकात्मक आयोजन होता है। इस दौरान भजन-कीर्तन, विशेष पूजा और रथ यात्राएं निकाली जाती हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं।

    पंगुनी उथिरम की पूजा विधि

    • इस दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और साफ वस्त्र धारण करते हैं।
    • इसके बाद घर के मंदिर या किसी मंदिर में भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान मुरुगन की पूजा की जाती है।
    • भगवान को फूल, फल, नारियल और प्रसाद अर्पित किया जाता है। पूजा के दौरान भक्त ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘ॐ सरवनभवाय नमः’ जैसे मंत्रों का जप करते हैं।
    • कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं और शाम को पूजा के बाद ही भोजन करते हैं।

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    इस दिन किए जाने वाले विशेष अनुष्ठान

    पंगुनी उथिरम के अवसर पर भगवान मुरुगन के भक्त कावड़ी यात्रा भी करते हैं। भक्त कंधों पर सजी हुई कावड़ी लेकर मंदिर तक पैदल यात्रा करते हैं और भगवान को दूध या जल अर्पित करते हैं। कई लोग कई दिनों तक पैदल चलकर मंदिर पहुंचते हैं। इसे भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

    प्रमुख मंदिर जहां मनाया जाता है यह पर्व

    पंगुनी उथिरम का उत्सव दक्षिण भारत के कई प्रसिद्ध मंदिरों में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।

    • पलानी मुरुगन मंदिर
    • तिरुचेंदूर मुरुगन मंदिर
    • मीनाक्षी अम्मन मंदिर

    इन मंदिरों में इस दिन लाखों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं और विशेष पूजा-अर्चना में भाग लेते हैं।

    पंगुनी उथिरम से मिलने वाले लाभ

    धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान मुरुगन की आराधना करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है। इसके अलावा इस दिन दान-पुण्य करने से भी विशेष फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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