भोपाल:आखिरी सफर का सहारा बने पांडुरंग नामदेव, 50 साल में 4500 निराश्रितों का कराया अंतिम संस्कार

मनोज चौरसिया, भोपाल। शहर में जहां अधिकांश लोग अपने जीवन की दौड़ भाग और जिम्मेदारियों में व्यस्त रहते हैं, वहीं समाजसेवी पांडुरंग केवाले नामदेव पिछले लगभग पांच दशकों से एक ऐसे मानवीय कार्य में जुटे हैं जिसने उन्हें समाज में अलग पहचान दिलाई है। वे उन जरूरतमंद, निराश्रित और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए अंतिम संस्कार की व्यवस्था करते हैं जिनके पास अपने परिजन को अंतिम विदाई देने तक के संसाधन नहीं होते।

साल 1978 से लगातार जारी है सेवा
साल 1978 में शुरू हुई यह सेवा आज भी लगातार जारी है। पिछले 50 वर्षों में पांडुरंग नामदेव करीब 4500 निराश्रित और जरूरतमंद लोगों का अंतिम संस्कार करा चुके हैं। जब उन्होंने यह सेवा शुरू की थी तब एक अंतिम संस्कार का खर्च करीब 200 से 300 रुपए आता था जबकि वर्तमान में यह खर्च बढ़कर 5 से 6 हजार रुपए तक पहुंच गया है। यदि औसतन 2000 रुपए प्रति अंतिम संस्कार भी माना जाए तो अब तक वे इस सेवा कार्य में 90 लाख रुपए से अधिक खर्च कर चुके हैं।
मई महीने में 12 परिवारों की की मदद
पांडुरंग नामदेव आज भी जरूरतमंद परिवारों तक अंतिम संस्कार की सामग्री पहुंचा रहे हैं। केवल पिछले मई महीने में ही उन्होंने 12 जरूरतमंद परिवारों को अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जिससे उन्हें अपने परिजनों की सम्मानजनक विदाई देने में मदद मिल सकी।
कोरोना काल में भी नहीं रुकी सेवा
कोरोना महामारी का दौर हर किसी के लिए चुनौतीपूर्ण रहा लेकिन पांडुरंग नामदेव के लिए यह समय और भी कठिन था। महामारी के दौरान उनकी दुकान बंद हो गई थी और आर्थिक संकट गहरा गया था। इसके बावजूद उन्होंने जरूरतमंदों की मदद करना बंद नहीं किया। वे बताते हैं कि उस समय उनके परिवार और बच्चों ने भी इस सेवा कार्य में सहयोग किया। बच्चों ने अपनी जमा पूंजी तक इस कार्य के लिए दे दी। महामारी के दौरान प्रतिदिन 4 से 5 जरूरतमंद परिवार अंतिम संस्कार में सहायता के लिए उनके पास पहुंचते थे और उन्होंने यथासंभव सभी की मदद की।
बढ़ रही है निराश्रितों की संख्या
पांडुरंग नामदेव ने भोपाल के भदभदा और कोलार विश्राम घाट पर होने वाले निराश्रित मृतकों के अंतिम संस्कार का स्वतंत्र ऑडिट भी कराया। इस ऑडिट में सामने आया कि शहर में ऐसे मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022-23 में 170, वर्ष 2023-24 में 194 और वर्ष 2024-25 में 207 निराश्रित लोगों के अंतिम संस्कार हुए। यह लगभग 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वहीं वर्ष 2025-26 में अब तक 155 ऐसे अंतिम संस्कार हो चुके हैं। इन आंकड़ों में वे मामले शामिल नहीं हैं, जिनमें पुलिस द्वारा मर्ग कायम किया जाता है।
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पांच वर्षों में निराश्रितों के अंतिम संस्कार
- वर्ष 2022-23 : 170
- वर्ष 2023-24 : 194
- वर्ष 2024-25 : 207
- वर्ष 2025-26 (अब तक) : 155
हर खर्च का रखा जाता है पूरा रिकॉर्ड
पांडुरंग नामदेव का कहना है कि यह सेवा केवल भावनाओं के आधार पर नहीं बल्कि पूरी जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ की जाती है। अंतिम संस्कार में उपयोग होने वाली लकड़ी, कफन, वाहन और अन्य आवश्यक सामग्री पर होने वाले खर्च का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है। उनके अनुसार एक अंतिम संस्कार में वर्तमान समय में औसतन 5 से 6 हजार रुपए तक का खर्च आता है और प्रत्येक सहायता का दस्तावेजी रिकॉर्ड भी संजोकर रखा जाता है।
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सेवा ही सबसे बड़ा संतोष
समाजसेवी पांडुरंग केवाले नामदेव कहते हैं कि उन्हें सबसे ज्यादा खुशी तब मिलती है जब वे किसी दुखी और असहाय परिवार की मदद कर पाते हैं। 1978 में फुटपाथ पर पूजन सामग्री की छोटी-सी दुकान से इस सेवा की शुरुआत की थी। तब से लेकर आज तक यही प्रयास है कि कोई भी व्यक्ति आर्थिक अभाव के कारण अपने परिजन को सम्मानजनक विदाई देने से वंचित न रहे। जब तक जीवन है, मैं इसी सेवा कार्य में लगा रहूंगा।












