युद्ध की आंच स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंची:हार्ट प्रोसीजर में उपयोग होने वाले डिस्पोजेबल आयटम महंगे, दिल का इलाज भी होगा महंगा

मिडिल ईस्ट में युद्ध की गूंज भले की शांत हो गई हो, लेकिन इसकी आंच अब भी बरकरार है। युद्ध से पेट्रोकेमिकल्स, मेडिसिन केमिकल्स और मेडिकल ग्रेड प्लास्टिक की वैश्विक सप्लाई अटक गई है। इससे ना केवल दवाएं महंगी हो गई बल्कि सर्जिकल आएटम्स के दाम भी 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।
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हार्ट प्रोसीजर में उपयोग होने वाले डिस्पोजेबल आयटम महंगे, दिल का इलाज भी होगा महंगा

भोपाल। इसका सबसे ज्यादा असर दिल के मरीजों पर होगा। दरअसल, पिछले तीन महीने में हार्ट प्रोसीजर में उपयोग होने वाले डिस्पोजेबल आयटम्स की कीमत भी 25 फीसदी तक बढ़ चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही तो हार्ट के इलाज की लागत प्रभावित हो सकती है।

हार्ट प्रोसीजर में सबसे ज्यादा असर

विशेषज्ञों के अनुसार कैथ लैब में इस्तेमाल होने वाले गाइड वायर, बैलून कैथेटर, गाइडिंग कैथेटर, आईवीयूएस और ओसीटी कैथेटर जैसे ज्यादातर उपकरण आयातित कच्चे माल या पेट्रोकेमिकल आधारित प्लास्टिक पर निर्भर हैं। इन सामानों की कीमत बढ़ने के बाद हार्ट प्रोसीजर (एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी) भी महंगी हो सकती है। मालूम हो कि शहर में हर दिन 50 से 60 हार्ट प्रोसीजर किए जाते है। हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल अस्पतालों ने यह अतिरिक्त बोझ मरीजों पर नहीं डाला है, लेकिन यदि कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही तो हार्ट उपचार की लागत प्रभावित हो सकती है। आगामी दिनों में कार्डियोलॉजिस्ट के राष्ट्रीय मंच पर भी इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है।

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स्टेंट की कीमत नियंत्रित, बाकी उपकरणों पर दबाव

कार्डियोलॉजिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी डॉ. सुब्रतो मंडल बताते हैं कि एंजियोप्लास्टी में उपयोग होने वाले बैलून, गाइड वायर, कैथेटर और इमेजिंग डिवाइस पूरी तरह डिस्पोजेबल होते हैं। एक मरीज के लिए उपयोग के बाद इन्हें दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। ऐसे में इनकी कीमत बढ़ने का सीधा असर प्रोसीजर की कुल लागत पर पड़ता है। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विवेक त्रिपाठी के मुताबिक स्टेंट की कीमतों पर सरकार का नियंत्रण है और अप्रैल 2026 से ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट (डीएएस) की अधिकतम कीमत लगभग 39 हजार रुपए निर्धारित की गई है। हालांकि देश में अब इंडियन स्टेंट ही लगते हैं, इसलिए फर्क नहीं पड़ता।

मरीजों की चिंता भी बढ़ी

भोपाल के एक 58 वर्षीय मरीज को हाल ही में एंजियोप्लास्टी कराने की सलाह दी गई है। परिवार का कहना है कि इलाज की तैयारी पहले से चल रही है, लेकिन अब मेडिकल सामग्री महंगी होने की खबरों से खर्च बढ़ने की चिंता भी जुड़ गई है। वहीं 65 वर्षीय हृदय रोगी को डॉक्टरों ने पेसमेकर लगाने की सलाह दी है। परिवार का कहना है कि अभी तक अस्पतालों ने शुल्क नहीं बढ़ाया है, लेकिन यदि उपकरणों की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो इलाज का कुल खर्च प्रभावित हो सकता है। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

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एंटी-टिटनेस इंजेक्शन महंगे

एंजियोप्लास्टी में सबसे ज्यादा उपयोग होने वाले डिस्पोजेबल आइटम गाइड वायर, बैलून कैथेटर, गाइडिंग कैथेटर और स्टेंट हैं। उदाहरण के तौर पर 15 हजार रुपए का बैलून 18 हजार रुपए का पड़ सकता है। इसी तरह अन्य आयटम भी महंगे होते हैं तो सिर्फ डिस्पोजेबल सामग्री पर ही 10 से 15 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है। वहीं एंटी-टिटनेस इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन की कीमतों में भी 50 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने बीसीजी, मीजल्स-रूबेला और मीजल्स वैक्सीन सहित कई टीकों की नई कीमतें भी तय की हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की लागत पर असर पड़ने की संभावना बढ़ गई है।

बीसीजी (0.10 एमएल)    8.20    9.89
मीजल्स-रूबेला (0.5 एमएल)    72.90    87.93
मीजल्स वैक्सीन (0.5 एमएल)    51.40    62.00

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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