MP News :जवान ने कपड़े धोने से मना किया तो 3 साल से गैरहाजिर बताकर सस्पेंड

मप्र में विशेष सशस्त्र बल के जवानों की बटालियनों की जगह अधिकारियों के बंगलों पर ड्यूटी कर रहे हैं। वर्षों तक बंगलों पर काम करने के कारण उनकी वापसी मूल स्थान पर नहीं हो पाती। वापसी की मांग पर जवानों की नौकरी तक जाने का खतरा बना रहता है।
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जवान ने कपड़े धोने से मना किया तो 3 साल से गैरहाजिर बताकर सस्पेंड

विजय एस. गौर, भोपाल। प्रदेश में लॉ एंड ऑर्डर संभालने के लिए तैनात विशेष सशस्त्र बल के जवानों को बंगलों में बेगारी का काम करना पड़ रहा है। बटालियन के सैनिकों को आईपीएस अधिकारियों के बंगलों पर मौखिक आदेश से तैनात किया जा रहा है। ऐसे जवानों की वापसी अपनी मूल इकाई में सालों तक नहीं हो पाती है। अगर कोई वापसी की मांग करता है या बंगला ड्यूटी के दौरान किसी से जरा भी चूक हुई तो नौकरी जाने का खतरा अलग रहता है।

बंगला ड्यूटी लगाने का कोई नियम नहीं

अघोषित बंगला ड्यूटी में लगाए गए जवानों की औसत मासिक सेलरी सीनियर्टी के हिसाब से 40 से 50 हजार रुपए के बीच होती है। इस वेतनमान के जवान घरेलू काम में लगे रहते हैं। जबकि जवानों को बंगला ड्यूटी पर लगाने के कोई नियम नहीं हैं। इसी से मौखिक आदेश से रवाना करके बटालियन में ही हाजिरी लिखी जाती है।

केस 1 - मैडम की नारफरमानी जवान को महंगी पड़ी

8वीं बटालियन छिंदवाड़ा के एक जवान (नाम प्रकाशन नहीं) ने 2023 में 7वीं बटालियन भोपाल में आमद दी, तो मौखिक आदेश पर एक एडीजी के बंगले पर भेजा दिया गया। तीन साल से बंगले पर है। पर, उसकी हाजिरी बटालियन में लगती रही और वेतन भी मिलता रहा। अभी एक दिन जवान ने मैडम के कहने पर कपड़े धोने से इनकार कर दिया। फिर क्या जवान को तीन साल से गैरहाजिर बताकर उसे सस्पेंड करके दिया गया और डीई शुरू हो गई।

केस 2 - यहां बंगले से चालक की वापसी ही नहीं हो रही

18वीं बटालियन शिवपुरी के एक वाहन चालक को भोपाल में एक पूर्व स्पेशल डीजी के यहां 2025 में लगाया गया। अब जरुरत नहीं होने से आईपीएस अधिकारी के परिवार ने कई बार कमांडेंट को सूचित किया है, बावजूद मूल इकाई में वापसी नहीं की जा रही है। दूसरी ओर बिना जरूरत भोपाल में रखे गए जवान को पीएचक्यू के पास वाले हॉस्टल से अरेरा कालोनी तक आने-जाने के लिए सरकारी मोटर साइकिल के साथ ही सरकारी पेट्रोल की सुविधा बरकरार है।

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100 करोड़ बचाने का प्रस्ताव डंप

पूर्व स्पेशल डीजी शैलेष सिंह ने 100 करोड़ रुपए मासिक बचाने का प्लान तत्कालीन डीजीपी सुधीर सक्सेना को सौंपा था। इसमें कलेक्टर रेट से घरेलू नौकर रखने पर होने वाले खर्च से तुलना की थी। इसमें करीब 100 करोड़ रुपए की बचत थी, लेकिन यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया।

फैक्ट फाइल

  • एसएएफ की हैं 22 बटालियन
  • लगभग 10 से 11 हजार जवान
  • 1000 जवान बंगला ड्यूटी में
  • समस्त सेवारत और सेवानिवृत्त आईपीएस के बंगलों पर तैनात

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सीधी बात - चंचल शेखर, एडीजी, एसएएफ 

 सवाल : क्या एसएएफ जवानों की ड्यूटी में बदलाव का प्रस्ताव है?

जवाब :  यह इंटरनल मैटर है, जो कमांडेंट डील करते हैं। सिर्फ हेडक्वार्टर में सालों से जो पदस्थ थे, उनको हटाकर मूल इकाई भेजा गया है।

सवाल : क्या बंगला ड्यूटी से तीन साल की गैर हाजिरी या बिना जरूरत पोस्टिंग की जांच हो रही है?

जवाब : यह जांच के बाद अवगत करा दिया जाएगा। तीन साल की गैर हाजिरी के मामले में कमांडेंट की रिपोर्ट और जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। इसके अलावा अगर कहीं बिना जरूरत जवान पदस्थ हैं तो कमांडेंट को वहां से तत्काल हटा लेना चाहिए। इसको चेक करवाते हैं।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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