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टीवी चैनलों पर अब दिखेगा एंटी-ड्रग डिस्क्लेमर, MIB का सख्त संदेश

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को नशीली दवाओं के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए नया निर्देश जारी किया है। 20 अगस्त को जारी एडवाइजरी में चैनलों से कार्यक्रमों के दौरान तय एंटी-ड्रग डिस्क्लेमर प्रमुखता से दिखाने को कहा गया है। इस पहल के साथ सरकार का नशा विरोधी अभियान डिजिटल और OTT प्लेटफॉर्म से आगे बढ़कर अब लीनियर टेलीविजन तक पहुंच गया है।
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टीवी चैनलों पर अब दिखेगा एंटी-ड्रग डिस्क्लेमर, MIB का सख्त संदेश
निजी टीवी चैनलों पर अब दिखेगा एंटी-ड्रग डिस्क्लेमर

MIB ने निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को संदेश दिखाने का निर्देश दिया है, जिसमें अवैध नशीले पदार्थों से स्वास्थ्य को होने वाले नुकसान और जेल की सजा की चेतावनी दी गई है। चैनलों को डिस्क्लेमर साफ, पढ़ने योग्य और प्रमुख रूप से दिखाना होगा और उसे स्क्रीन पर पर्याप्त समय तक बनाए रखना होगा। यह निर्देश सिर्फ न्यूज चैनलों या समाचार कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि जनरल एंटरटेनमेंट और नॉन-न्यूज कार्यक्रम भी इसके दायरे में आ सकते हैं। मंत्रालय इससे पहले नवंबर 2024 में OTT प्लेटफॉर्म्स को नशीली दवाओं के चित्रण को लेकर एडवाइजरी जारी कर चुका है। नई एडवाइजरी में टीवी प्रसारण के दौरान नियमित अंतराल पर पब्लिक-हेल्थ मैसेज दिखाने पर जोर दिया गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक नशे के खिलाफ चेतावनी पहुंच सके।

निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों के लिए जारी हुआ निर्देश

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 20 अगस्त को निजी सैटेलाइट टेलीविजन चैनलों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें चैनलों को अपने कार्यक्रमों के दौरान नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खतरों से जुड़ा प्रमुख डिस्क्लेमर दिखाने के लिए कहा गया है। मंत्रालय की ओर से तय संदेश है, Illicit Narcotics Destroy Health and Guarantees Imprisonment. Say No to Drugs, जिसका अर्थ है कि अवैध नशीले पदार्थ स्वास्थ्य को बर्बाद करते हैं और जेल की सजा दिला सकते हैं, इसलिए नशे को ना कहें। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह संदेश दर्शकों को आसानी से दिखाई और समझ में आना चाहिए। इसके लिए डिस्क्लेमर को साफ, पढ़ने योग्य और स्क्रीन पर प्रमुख स्थान पर दिखाने का जिक्र है।

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न्यूज के साथ एंटरटेनमेंट कार्यक्रम भी दायरे में

इस एडवाइजरी की खास बात यह है कि इसका दायरा केवल न्यूज कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रखा गया है। मंत्रालय ने निजी सैटेलाइट चैनलों के सभी तरह के कार्यक्रमों के दौरान उचित अंतराल पर इस संदेश को दिखाने की बात कही है। इसमें जनरल एंटरटेनमेंट के साथ-साथ नॉन-न्यूज कार्यक्रम भी शामिल हैं। यानी ऐसे कार्यक्रम भी इस जागरूकता अभियान के दायरे में आ सकते हैं, जिनका मुख्य विषय नशीली दवाओं का इस्तेमाल या उसका दुरुपयोग नहीं है। मंत्रालय का उद्देश्य यह है कि टीवी के जरिए नशे के खतरों से जुड़ा पब्लिक-हेल्थ मैसेज अलग-अलग तरह के दर्शकों तक लगातार पहुंचाया जा सके। इससे सरकार का एंटी-ड्रग अभियान टीवी की व्यापक पहुंच का इस्तेमाल करते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

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डिस्क्लेमर स्क्रीन पर साफ और पढ़ने योग्य होना चाहिए 

MIB ने चैनलों को केवल डिस्क्लेमर दिखाने का निर्देश नहीं दिया है, बल्कि उसके प्रस्तुतीकरण को लेकर भी विशेष जोर दिया है। एडवाइजरी के मुताबिक संदेश साफ और पढ़ने योग्य होना चाहिए और स्क्रीन पर पर्याप्त समय तक दिखाई देना चाहिए। इसका मकसद यह है कि दर्शक संदेश को केवल कुछ सेकंड के लिए देखकर आगे न बढ़ जाएं, बल्कि उसे आसानी से पढ़ और समझ सकें। ब्रॉडकास्टर्स को अपनी प्रोग्रामिंग और कंप्लायंस व्यवस्था में इस संदेश के लिए उचित समय और स्थान तय करना होगा। साथ ही उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्रसारण के दौरान डिस्क्लेमर मंत्रालय की ओर से तय अपेक्षाओं के अनुरूप प्रमुखता से दिखाई दे।

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OTT के बाद अब टीवी पर बढ़ा एंटी-ड्रग फोकस

नशीली दवाओं और साइकोट्रॉपिक पदार्थों के मीडिया में चित्रण को लेकर MIB पहले भी दिशा-निर्देश जारी करता रहा है। नवंबर 2024 में मंत्रालय ने OTT प्लेटफॉर्म्स को एडवाइजरी जारी कर ऐसे कंटेंट को लेकर सावधानी बरतने को कहा था, जिसमें नशीली दवाओं के इस्तेमाल को अनजाने में बढ़ावा देने, ग्लैमराइज करने या आकर्षक तरीके से पेश करने की स्थिति बन सकती है। उस समय OTT प्लेटफॉर्म्स से कंटेंट की समीक्षा करते समय विशेष सावधानी बरतने और नशे के इस्तेमाल को फैशनेबल या समाज में स्वीकार्य दिखाने से बचने की सलाह दी गई थी। साथ ही उन कार्यक्रमों में पब्लिक-हेल्थ मैसेज और डिस्क्लेमर शामिल करने पर विचार करने को कहा गया था, जहां कहानी के किसी हिस्से में नशीली दवाओं का इस्तेमाल दिखाया जाता है। अब नई टीवी एडवाइजरी के जरिए मंत्रालय ने इसी जागरूकता प्रयास को लीनियर टेलीविजन तक विस्तार दिया है।

ज्यादा दर्शकों तक पहुंचेगा नशे के खिलाफ संदेश

मंत्रालय के इस कदम का एक बड़ा उद्देश्य टेलीविजन की व्यापक पहुंच का इस्तेमाल नशीली दवाओं के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने में करना है। खासकर ऐसे दर्शकों के बीच, जो OTT और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म का नियमित इस्तेमाल नहीं करते, टीवी अब भी बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचने वाला माध्यम है। ऐसे में कार्यक्रमों के बीच या उनके दौरान एंटी-ड्रग डिस्क्लेमर दिखाने से सरकार को अलग-अलग वर्गों तक यह संदेश पहुंचाने में मदद मिल सकती है। 

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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