भारत में भगवान राम जी के कई प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिर है, लेकिन क्या आप जानते हैं भारत में राम जी का एक सबसे अनोखी परंपरा और आस्था वाला मंदिर हैं, जहां स्वयं भगवान राम को राजा के रूप में पूजा जाता है, इस मंदिर की अनोखी परंपरा यह है कि यहां राम भगवान को पुलिस गार्ड ऑफ ऑनर देती है। जो इसकी परंपरा को और भी खास बना देता है।
यह मंदिर मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर ओरछा में बना हुआ है, इससे राम राजा मंदिर के नाम से जाना जाता है, इस मंदिर का इतिहास बेहद खास और सबसे अनोखी परंपरा पर आधारित है। राम नवमी के मौके पर यहां का नजारा और भी भव्य हो जाता है। तो चलिए जानते है इसके पूरे इतिहास के बारे में।
राम नवमी के अवसर पर यहां विशेष कार्यक्रम और प्रकट्य पर्व आयोजित किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस दिन भगवान राम को तीन बार विशेष गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया जाता है। भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में सत्य, धर्म और आदर्शों का पालन किया, वे रामायणा के प्रमुख नायक हैं और उनके जीवन से हमें कर्तव्य, त्याग और सम्मान की सीख मिलती है। मध्य प्रदेश के ओरछा में स्थित राम राजा मंदिर करीब 400 से 500 साल पुराना माना जाता है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां भगवान राम को भगवान नहीं, बल्कि राजा राम के रूप में पूजा जाता है।
राम राजा मंदिर ओरछा भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां भगवान को आधिकारिक तौर पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता है, यह परंपरा सदियों पुरानी है, जहां स्थानीय पुलिस रोजाना भगवान राम को सलामी देती है, ठीक वैसे ही जैसे किसी राजा या वीआईपी को दी जाती है। यहां तक कि मंदिर में पुलिस के जवान स्थायी गार्ड की तरह तैनात भी रहते हैं।
मंदिर की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। कहा जाता है कि यह मंदिर पहले एक महल था। ओरछा की महारानी कुंवरि गणेश भगवान राम की परम भक्त थीं। जिन्होंने एक बार यह संकल्प लिया था कि वे आयोध्या से खुद भगवान राम को अपने साथ ओरछा लेकर आएंगी। उसके बाज रानी ने आयोध्या जाकर भगवान राम को बुलाने के लिए सरयू नदी के किनारे कई दिनों तक कठोर तपस्या की, जब भगवान राम प्रकट नहीं हुए, तो उन्होंने अपनी भक्ति की परीक्षा देने का निर्णय लिया और नदी में छलांग लगा दी, उस दिन उनकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान राम बाल रूप में प्रकट हुए थे।
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जब रानी ने भगवान राम के सामने अपने साथ ओरछा चलने का प्रस्ताव रखा था, तब भगवान राम ने कुछ शर्तें रखी, उन्होंने कहा की वे ओरछा में राजा के रूप में ही पूजे जाएंगे, और साथ ही कहां की जहां उन्हें पहली बार बैठाया जाएगा, वे वहीं अपना स्थान बना लेंगे और उसी स्थान पर स्थापित हो जाएंगे, इसके बाद जब रानी भगवान राम को लेकर ओरछा पहुंची तो उन्होंने उन्हें अस्थायी रूप से महल की रसोई में बैठा दिया। तभी से यह महल ही मंदिर बन गया और भगवान राम यहां राजा के रूप में विराजमान हो गए।
यहां की आरती भी आम मंदिरों से बिल्कुल अलग होती है। शाम की आरती के दौरान पुलिस द्वारा बंदूकों से सलामी दी जाती है, जिससे पूरा माहौल एक राजदरबार जैसा बन जाता है।