ऑनलाइन खरीदारों के लिए खुशखबरी! 1 जनवरी से ऑनलाइन शॉपिंग में बड़ा बदलाव, नकली डिस्काउंट और छुपे चार्ज पर लगेगी लगाम

ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों के लिए आने वाला साल कई बड़े बदलाव लेकर आ रहा है। सरकार ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों को दी जाने वाली जानकारी और ऑनलाइन खरीदारी के तरीके को लेकर नियम सख्त करने का फैसला किया है। नए नियम लागू होने के बाद कंपनियों के लिए बड़े डिस्काउंट के नाम पर ग्राहकों को भ्रमित करना, अतिरिक्त शुल्क छिपाना और पेड प्रोडक्ट को सामान्य सर्च रिजल्ट की तरह दिखाना आसान नहीं होगा। इसके अलावा रिटर्न, रिफंड, वारंटी और डिलीवरी से जुड़ी जानकारी भी खरीदारी से पहले साफ बतानी होगी।
डिस्काउंट का सच छिपाना होगा मुश्किल
ऑनलाइन सेल के दौरान दिखने वाली पुरानी और नई कीमत को लेकर अब ज्यादा पारदर्शिता होगी। किसी सामान पर छूट दिखाते समय प्लेटफॉर्म को उसकी पुरानी कीमत भी बतानी होगी। यह कीमत डिस्काउंट से पहले पिछले 30 दिनों में उस प्रोडक्ट की सबसे कम बिक्री कीमत के आधार पर तय होगी। इससे पहले कीमत बढ़ाकर बाद में भारी छूट दिखाने जैसी चाल पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
पेड प्रमोशन का हिस्सा
कई बार सर्च करने पर कुछ प्रोडक्ट सबसे ऊपर दिखाई देते हैं। अगर किसी प्रोडक्ट को पैसे देकर ऊपर दिखाया गया है तो उसे Sponsored या विज्ञापन के तौर पर साफ बताना होगा। ग्राहक आसानी से समझ सकेगा कि कौन सा सामान सामान्य सर्च के जरिए सामने आया है और कौन सा पेड प्रमोशन का हिस्सा है।
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Best Before या Expiry Date
ई-कॉमर्स कंपनियों को प्रोडक्ट की अहम जानकारी ग्राहक से छिपानी नहीं होगी। सामान की Best Before या Expiry Date, रिटर्न और रिफंड की शर्तें, वारंटी, डिलीवरी और पेमेंट से जुड़ी जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध करानी होगी। विदेश से आने वाले सामान के मामले में आयातक और सामान किस देश से आया है, इसकी जानकारी भी दी जाएगी।
Loyalty और Membership Program
ग्राहक को ऐसी अतिरिक्त फीस से बचाने की कोशिश की गई है जिसका मुख्य सेवा से सीधा संबंध नहीं है। हालांकि तय नियमों के तहत Loyalty और Membership Program से जुड़ी फीस को अलग रखा गया है। इसका मकसद खरीदारी के अंतिम चरण में अचानक बढ़ने वाली कीमत को कम करना है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निजी जानकारी
कंपनियां ग्राहक की जानकारी का इस्तेमाल तय उद्देश्य के अलावा अपनी मर्जी से नहीं कर सकेंगी। इसके लिए ग्राहक की स्पष्ट सहमति जरूरी होगी। इससे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निजी जानकारी के इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
डार्क पैटर्न पर कंपनियों की जिम्मेदारी
ग्राहकों को भ्रमित करके खरीदारी करवाने वाली ऑनलाइन तरकीबों को Dark Patterns कहा जाता है। नए नियमों में 2023 की गाइडलाइंस का पालन जरूरी होगा। कंपनियों को हर साल अपने प्लेटफॉर्म की जांच करनी होगी और नियमों के पालन का प्रमाण भी प्रमुखता से दिखाना होगा।
शिकायत करने पर मिलेगा रिकॉर्ड
ई-कॉमर्स कंपनी के खिलाफ शिकायत करने वाले ग्राहक को उसकी शिकायत की कॉपी देनी होगी। साथ ही कंपनियों को National Consumer Helpline की प्रक्रिया से जुड़ना अनिवार्य होगा। सरकार के मुताबिक 2025 में हेल्पलाइन पर 17,71,622 शिकायतें आईं, जिनमें 5,11,196 मामले ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े थे। नए बदलावों का मकसद ग्राहकों को सुरक्षित और ज्यादा पारदर्शी ऑनलाइन खरीदारी का अनुभव देना है।




















