BRICS में भारत का बड़ा फोकस, जानें क्या है नया ट्रेड प्लान

अमेरिका की टैरिफ धमकियों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच नई दिल्ली में BRICS बिजनेस फोरम का आयोजन हुआ। बैठक में BRICS देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और कारोबार से जुड़े नियम आसान बनाने पर जोर दिया गया।
बाजारों तक आसान पहुंच पर जोर
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि BRICS के सदस्य और पार्टनर देशों को एक-दूसरे के बाजारों तक पहुंच आसान करनी चाहिए। व्यापार बढ़ाने के लिए सिर्फ टैरिफ कम करना काफी नहीं है, बल्कि व्यापार से जुड़े नियम और प्रक्रियाएं भी सरल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सामान की मंजूरी में लगने वाला समय कम करने की जरूरत है, ताकि कारोबारियों के लिए दूसरे देशों में सामान भेजना आसान हो।
सप्लाई चेन मजबूत करने की जरूरत
गोयल ने BRICS देशों के बीच मजबूत और अलग-अलग स्रोतों वाली सप्लाई चेन बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कच्चे माल, जरूरी खनिजों और दूसरे उत्पादों के लिए बाजारों तक बेहतर पहुंच जरूरी है। भारत की मैन्युफैक्चरिंग में इंजीनियरिंग सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स का बड़ा योगदान है। दवा के क्षेत्र में भी भारत BRICS देशों के लिए एक भरोसेमंद सप्लायर की भूमिका निभा सकता है।
BRICS के 20 साल पूरे
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि BRICS के संस्थागत सहयोग के 20 साल पूरे हो रहे हैं। इन दो दशकों में संगठन की सदस्यता, एजेंडा और सहयोग के तरीकों में काफी बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय बड़े राजनीतिक और आर्थिक बदलावों से गुजर रही है। भू-राजनीतिक तनाव, महामारी और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
तकनीक से नए अवसर
जयशंकर ने कहा कि चुनौतियों के साथ नए अवसर भी सामने आ रहे हैं। डिजिटलाइजेशन और तकनीकी बदलाव से विकास और आर्थिक प्रगति के नए रास्ते खुल रहे हैं। ऐसे समय में BRICS देशों के बीच सहयोग बढ़ाना और व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करना जरूरी है। भारत ने साफ किया कि आसान नियम, बेहतर बाजार पहुंच और मजबूत सप्लाई चेन से BRICS देशों के बीच कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है।




















