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डॉक्टरों की तर्ज पर नए शिक्षकों को 3 साल गांवों में पढ़ाना होगा

प्रदेश सरकार एक जुलाई से नई पॉलिसी लागू करने की तैयारी में
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डॉक्टरों की तर्ज पर नए शिक्षकों को 3 साल गांवों में पढ़ाना होगा

रामचन्द्र पाण्डेय/भोपाल। डॉक्टरों की तर्ज पर अब नव नियुक्त शिक्षकों को ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में कम से कम तीन वर्ष और अपने पूरे सेवाकाल में न्यूनतम 10 साल तक सेवाएं देना अनिवार्य होगा। सरकार संभवत: एक जुलाई से इसे अमल में लाएगी। इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में 10 साल या इससे ज्यादा अवधि तक एक ही स्कूल में जमे शिक्षकों को भी ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में भेजा जाएगा। प्रदेश में पहली से 12वीं तक करीब 92 हजार सरकारी स्कूल हैं। इनमें पिछले छह वर्षों में तीनों वर्गों के करीब 55 हजार नए शिक्षक नियुक्त हुए हैं। इसमें वर्ग एक के करीब 21 हजार, वर्ग-2 के 17 हजार और वर्ग-3 के 17 हजार शिक्षक शामिल हैं। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में स्थिति यह है कि कई स्कूल शिक्षक विहीन हैं या फिर एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। नई ट्रांसफर पॉलिसी के अनुसार नवनियुक्त शिक्षक को पदस्थापना में कम से कम तीन साल रहना अनिवार्य है। इसके अलावा किसी शिक्षक की शहर के स्कूल में पदस्थापना के दस साल होने के बाद तीन साल के लिए ग्रामीण क्षेत्र में जाना होगा। हालांकि यह ट्रांसफर जिले के अंदर होगा। प्रदेश सरकार ने दो साल पहले स्कूल शिक्षा विभाग की नई ट्रांसफर पॉलिसी को मंजूरी दी थी। इस व्यवस्था को 2023-24 से पूरी तरह लागू करना था।

स्वैच्छिक ट्रांसफर के बाद तीन साल तक रहना होगा

स्कूल शिक्षा विभाग की नई नीति में एक बार यदि शिक्षक ने अपना स्वैच्छिक स्थानांतरण लिया है तो उसके बाद विशेष परिस्थिति को छोड़कर तीन वर्ष तक स्थानांतरण नहीं किया जा सकेगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई स्कूल शिक्षक विहीन न हो जाए। ताकि पढ़ाई पर असर न पड़े।

रिटायरमेंट के करीब और गंभीर बीमार रहेंगे मुक्त

ऐसे शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्ति में 3 वर्ष शेष हैं और गंभीर बीमारी या विकलांगता से पीड़ित हैं, उन्हें इस प्रक्रिया से मुक्त रखा जाएगा। स्थानांतरण में वरीयता क्रम निर्धारित किया गया है। नई नीति के अनुसार शिक्षकों को निर्वाचित जन प्रतिनिधियों की निजी पदस्थापना में पदस्थ नहीं किया जाएगा।

यह सरकार का बहुत अच्छा कदम है, इसे तो बहुत पहले लागू हो जाना चाहिए था। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल या तो शिक्षक विहीन हैं, या फिर एक शिक्षक के भरोसे हैं। गांव में अतिथि शिक्षक भी नहीं मिलते हैं। हर शिक्षक शहर में पदस्थ होना चाहता है। इसके लिए नियम लागू होना जरूरी है। - राकेश दुबे, प्रांताध्यक्ष, शासकीय शिक्षक संगठन, मप्र

जिन स्कूलों में बच्चे कम और शिक्षक अतिशेष हैं, वहां से शिक्षकों को अधिक बच्चों वाले स्कूलों में ट्रांसफर किया जाएगा। कई शिक्षक 15-20 सालों से एक ही स्कूल में हैं। उन्हें ग्रामीण क्षेत्र में भेजकर स्कूलों में शिक्षकों की पूर्ति की जाएगी। - उदय प्रताप सिंह, मंत्री, स्कूल शिक्षा विभाग

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