RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की बैठक 6 से 8 अप्रैल के बीच होने वाली है। बाजार को इस बार ब्याज दरों में राहत की उम्मीद थी लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने पूरे समीकरण बदल दिए हैं। अब संकेत मिल रहे हैं कि आरबीआई इस बार भी ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है।
SBI रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक ग्लोबल अनिश्चितता और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को देखते हुए फिलहाल रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम है। इससे पहले फरवरी की बैठक में भी दरों को स्थिर रखा गया था और अभी रेपो रेट 5.25% पर बना हुआ है।
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रिपोर्ट के अनुसार इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने ग्लोबल बाजार को हिला दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा जैसी स्थिति से तेल सप्लाई प्रभावित हुई है जिसे 1973 के बाद का सबसे बड़ा व्यवधान माना जा रहा है। यही वजह है कि आरबीआई इस बार काफी सतर्क रुख अपना सकता है।
भारत भी इस संकट से अछूता नहीं है। कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है जिससे आयातित महंगाई बढ़ रही है। वहीं रुपया भी दबाव में है और डॉलर के मुकाबले 93 के पार पहुंच चुका है। इसके साथ ही ‘सुपर एल नीनो’ का खतरा भी महंगाई को और बढ़ा सकता है।
घरेलू स्तर पर महंगाई चिंता का विषय बनी हुई है। आयातित महंगाई 5.4% तक पहुंच चुकी है और आगे इसके और बढ़ने की आशंका है। अनुमान है कि अगले कुछ महीनों तक खुदरा महंगाई 4.5% से ऊपर बनी रह सकती है। ऐसे में आरबीआई के लिए ब्याज दरों में कटौती करना आसान नहीं होगा।
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रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव करने के बजाय बाजार की लिक्विडिटी और स्थिरता पर फोकस कर सकता है। इसके लिए ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ जैसे कदम उठाए जा सकते हैं जिससे बॉन्ड यील्ड को नियंत्रित रखा जा सके। हालांकि मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी रोकने के हालिया कदमों से बैंकों के सामने कुछ चुनौतियां भी आ सकती हैं।