NEET Paper Leak : NTA का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा, अगली बार से NEET में कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट लागू करने का है विकल्प

नई दिल्ली। नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानी NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) की ओर से दायर याचिकाओं पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट पर सुनवाई हुई। इस दौरान नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत हलफनामा दाखिल कर परीक्षा सुरक्षा, पेपर लीक रोकने के उपाय और भविष्य की परीक्षा प्रणाली पर अपना पक्ष रखा।
अभी CBT और पेन-पेपर दोनों विकल्पों पर विचार
सुनवाई के दौरान NTA ने स्पष्ट किया कि NEET-UG 2027 को कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित किया जाएगा या नहीं, इसका अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है। एजेंसी ने कहा कि री-NEET के बाद हाई-पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी (HPSC) बैठक करेगी, जिसके बाद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से चर्चा कर भविष्य की परीक्षा प्रणाली तय की जाएगी। फिलहाल CBT और पेन-एंड-पेपर दोनों विकल्पों पर विचार जारी है।
पेपर लीक के बाद बदली परीक्षा रणनीति
3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा पेन-पेपर मोड में हुई थी, लेकिन पेपर लीक की शिकायतों के बाद परीक्षा को रद्द करना पड़ा। इसके बाद दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया। उस समय सरकार और NTA ने संकेत दिया था कि भविष्य में परीक्षा को CBT मोड में शिफ्ट किया जा सकता है ताकि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
हाई-पावर्ड कमेटी ने दिए थे सुरक्षा सुझाव
NTA ने अपने हलफनामे में बताया कि 17 अप्रैल 2026 को हाई-पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, प्रश्नपत्रों के परिवहन और निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सुझाव दिए गए थे। कमेटी ने सभी परीक्षा केंद्रों पर CCTV कैमरों की अनिवार्य जांच, कम से कम 90 दिन तक फुटेज सुरक्षित रखने और परीक्षा के बाद फॉरेंसिक विश्लेषण कराने की सिफारिश की थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने पूछे कड़े सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने NTA से पूछा कि जब इतनी निगरानी व्यवस्था लागू की गई थी, तब पेपर लीक कैसे हुआ। कोर्ट ने कहा कि यदि हाई-पावर्ड कमेटी की मौजूदगी के बावजूद ऐसी घटना हुई है, तो या तो मूल सिफारिशों में कमी थी या फिर उन्हें सही तरीके से लागू नहीं किया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल दिशा-निर्देश बना देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
इसरो के पूर्व अध्यक्ष ने दी जानकारी
सुनवाई के दौरान इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन ने अदालत को बताया कि कमेटी ने लंबी अवधि के लिए 35 और अल्पकालिक सुधारों के लिए 60 सिफारिशें दी थीं। उन्होंने कहा कि अधिकांश सुझावों को लागू कर दिया गया है और आगामी RE-NEET परीक्षा में विशेष सतर्कता बरती जाएगी। उन्होंने यह भी माना कि NTA को तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर और मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
UPSC मॉडल से सीख लेने की सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) जैसी संस्थाओं में इस प्रकार की घटनाएं देखने को नहीं मिलतीं। अदालत ने NTA को UPSC की परीक्षा प्रणाली और सुरक्षा मॉडल से सीख लेने की सलाह दी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि आगामी री-एग्जाम के लिए नया सुरक्षा तंत्र तैयार किया गया है और इसकी निगरानी उच्च स्तर पर की जा रही है।
NTA ने बताए नए सुरक्षा इंतजाम
हलफनामे में NTA ने दावा किया कि NEET-UG 2026 में पहली बार आधार आधारित बायोमेट्रिक जांच, फेस रिकग्निशन और मल्टी-लेयर सिक्योरिटी सिस्टम लागू किया गया। देशभर के 5,432 परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल जैमर लगाए गए तथा लगभग 1.85 लाख CCTV कैमरों से निगरानी की गई। फुटेज के विश्लेषण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का उपयोग भी किया गया। प्रश्नपत्रों की छपाई और परिवहन के लिए पुलिस व अन्य सरकारी एजेंसियों की मदद ली गई थी।
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परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार का दावा
NTA ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि संस्था के भीतर बड़े प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं। 16 नए वरिष्ठ पद बनाए गए हैं और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को जोड़ा गया है। देशभर में 621 जिला स्तरीय समितियां बनाई गई थीं, जिनमें जिला प्रशासन, पुलिस और NTA अधिकारियों को शामिल किया गया। एजेंसी का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी तथा सुरक्षित बनाने की प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी। अब सुप्रीम कोर्ट ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से भी हलफनामा मांगा है, जिसमें भविष्य की परीक्षा प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था का पूरा रोडमैप पेश किया जाएगा।












