ग्वालियर के एक युवक ने दहेज प्रथा के खिलाफ अनोखी पहल करते हुए समाज को मजबूत संदेश दिया है। यूथ कांग्रेस से जुड़े 28 वर्षीय अंकित आर्य फतेहपुरिया ने अपनी शादी को सामाजिक बदलाव का माध्यम बनाया है। 20 अप्रैल को झांसी में होने वाली अपनी शादी में उन्होंने दहेज में एक रुपया भी न लेने का संकल्प लिया है।
अंकित ने सिर्फ दहेज न लेने का फैसला ही नहीं किया बल्कि पूरी शादी को सादगी से करने का निर्णय लिया है। टीका की रस्म केवल पीले चावल से होगी और किसी तरह की फिजूलखर्ची नहीं की जाएगी। इतना ही नहीं उन्होंने शादी के बाद होने वाला रिसेप्शन भी रद्द कर दिया है, ताकि दिखावे की परंपरा को बढ़ावा न मिले।


अंकित ने अपने शादी के कार्ड को एक सामाजिक संदेश का जरिया बना दिया है। कार्ड पर साफ लिखा गया है कि दहेज लेना पाप है और इसका बहिष्कार किया जाना चाहिए। साथ ही यह भी संदेश दिया गया है कि विवाह दो लोगों और परिवारों का मिलन है कोई सौदेबाजी नहीं।
हाल ही में ग्रेजुएशन पूरा करने वाले अंकित अपने परिवार के मसाले के व्यवसाय से जुड़े हैं। वे बताते हैं कि महाराजपुरा क्षेत्र में दहेज के कारण हुई एक महिला की हत्या ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। इसी घटना के बाद उन्होंने ठान लिया कि वे अपनी शादी को दहेज मुक्त बनाकर समाज के सामने उदाहरण पेश करेंगे।
अंकित का मानना है कि दहेज प्रथा केवल आर्थिक बोझ नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उनका यह कदम युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकता है कि बदलाव की शुरुआत खुद से की जाए।
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अंकित आर्य फतेहपुरिया कहते हैं कि बदलाव किसी बड़े आंदोलन से नहीं बल्कि छोटे-छोटे संकल्पों से शुरू होता है। अगर युवा इसी तरह आगे आएं, तो दहेज जैसी कुरीति को खत्म करना संभव है।