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जैविक खेती से बदली जिंदगी:अर्चना सोनी बनीं किसानों के लिए मिसाल, 80 किसानों को दिया रोजगार का रास्ता

जबलपुर की महिला कृषक अर्चना सोनी ने जैविक खेती के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है। कोरोना के बाद जब लोगों में सेहत को लेकर जागरूकता बढ़ी, तब अर्चना ने इस मौके को अवसर में बदला और आज वे न सिर्फ खुद सालाना 7-8 लाख रुपए की आय अर्जित कर रही हैं।
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अर्चना सोनी बनीं किसानों के लिए मिसाल, 80 किसानों को दिया रोजगार का रास्ता

सतीश श्रीवास्तव, जबलपुर। शहर की महिला कृषक अर्चना सोनी ने जैविक खेती के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है। कोरोना के बाद जब लोगों में सेहत को लेकर जागरूकता बढ़ी तब अर्चना ने इस मौके को अवसर में बदला और आज वे न सिर्फ खुद सालाना 7-8 लाख रुपए की आय अर्जित कर रही हैं बल्कि 80 किसानों को प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से भी जोड़ चुकी हैं। अर्चना का मानना है कि 'सेहत ही सबसे बड़ी पूंजी है' और इसी सोच के साथ उन्होंने पिछले करीब एक दशक से जैविक खेती को अपनाया। आज उनके प्रयासों से कई परिवारों की आय का जरिया तैयार हुआ है।

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पिता के इलाज से मिली प्रेरणा, 2015 से शुरू किया सफर

अर्चना बताती हैं कि साल 2015 में उनके पिता के इलाज के दौरान डॉक्टरों ने जैविक उत्पादों के सेवन की सलाह दी थी। यहीं से उन्होंने जैविक खेती को गंभीरता से अपनाने का फैसला किया। धीरे-धीरे उन्होंने इसे अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया और लगातार प्रयोग करते हुए आज एक सफल मॉडल तैयार कर दिया।

80 किसानों को दिया प्रशिक्षण, रोजगार से भी जोड़ा

जबलपुर के खजरी खिरिया स्थित अपने फार्म हाउस से अर्चना अब तक 80 किसानों को जैविक खेती की ट्रेनिंग दे चुकी हैं। इन किसानों को सिर्फ तकनीक ही नहीं सिखाई गई बल्कि उन्हें बाजार से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने में भी मदद की गई है।

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खुद तैयार करती हैं खाद, गौ पालन से घटाई लागत

करीब 4 एकड़ जमीन पर खेती कर रहीं अर्चना 6 गायों का पालन करती हैं और गोबर से खुद जैविक खाद तैयार करती हैं। इससे खेती की लागत कम होती है और उत्पादन पूरी तरह प्राकृतिक बना रहता है। यह मॉडल दूसरे किसानों के लिए भी काफी उपयोगी साबित हो रहा है।

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मिलेट्स से बने व्यंजनों की बढ़ी मांग

अर्चना सिर्फ खेती तक सीमित नहीं हैं बल्कि वे मिलेट्स से बने कई आकर्षक व्यंजन भी तैयार करती हैं। बर्थडे केक, पिज्जा, बर्गर, इडली और सत्तू जैसे उत्पाद बाजार में खूब पसंद किए जा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने मुख्यमंत्री को भी प्राकृतिक सत्तू भेंट किया था, जिससे उनकी पहल को और पहचान मिली।

उत्पादन में तीन गुना तक बढ़ोतरी

शुरुआत में जहां एक एकड़ में 4-5 क्विंटल उत्पादन होता था, वहीं अब यह बढ़कर 14-15 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच गया है। चार एकड़ में कुल 65-70 क्विंटल तक पैदावार हो रही है। अर्चना साल में तीन फसलें लेती हैं जिनमें गेहूं, धान, मूंग और सब्जियां शामिल हैं।

प्रदेश से बाहर तक पहुंचा कारोबार

अर्चना के जैविक उत्पाद अब मध्यप्रदेश से बाहर दिल्ली, झारखंड और छत्तीसगढ़ तक भेजे जा रहे हैं। इससे उनकी पहचान लगातार बढ़ रही है और बाजार का दायरा भी विस्तृत हो रहा है।

कत्थक के जरिए संस्कृति से भी जुड़ाव

खेती के साथ-साथ अर्चना सोनी संगीत में एमए कर चुकी हैं और कत्थक नृत्य में भी पारंगत हैं। वे ग्रीष्मकालीन अवकाश में बच्चों को नि:शुल्क कत्थक सिखाती हैं। पहले वे स्कूलों में प्रशिक्षण देती थीं, लेकिन अब घर से ही यह काम जारी रखे हुए हैं।

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जैविक बाजार बना पहचान का मंच

हर रविवार को लगने वाले जैविक बाजार में अर्चना अपने उत्पादों का प्रदर्शन करती हैं और किसानों को जैविक खेती के लिए मार्गदर्शन देती हैं। इच्छुक किसानों को उनके फार्म हाउस पर प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता है। उप संचालक कृषि एसके निगम के मुताबिक, अर्चना सोनी ने जैविक बाजार के माध्यम से न सिर्फ लोगों को बेहतर उत्पाद दिए हैं, बल्कि किसानों को नई दिशा भी दी है।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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