इंदौर। शहर के हीरानगर क्षेत्र से पकड़ा गया नाइजीरियन युवक डॉन पेड्रो चार्लिस अब अपने देश नाइजीरिया पहुंच चुका है। वीजा समाप्त होने के बावजूद भारत में रह रहे इस विदेशी नागरिक को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद डिपोर्ट कर दिया गया।हीरानगर पुलिस ने उसे 17 फरवरी 2026 को सनसिटी क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। करीब 10 दिन की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद टिकट की व्यवस्था कर उसे 1 मार्च को नाइजीरिया भेज दिया गया।
जांच में सामने आया कि डॉन पेड्रो इंदौर की एक बीपीओ कंपनी में काम कर रहा था। वह कई साल पहले शहर आकर रहने लगा था। पुलिस को उसकी जानकारी पहले नहीं मिल पाई थी। हीरानगर पुलिस ने उसे उस समय पकड़ा, जब वह अपनी एक गर्लफ्रेंड से मिलने के लिए आया था। बताया जा रहा है कि इंदौर में उसकी दो गर्लफ्रेंड थीं, जिन्हें छोड़कर वह अपने देश लौट गया।
पुलिस जांच में पता चला कि डॉन पेड्रो का वीजा 2023 में ही समाप्त हो गया था, लेकिन उसने इसकी जानकारी किसी भी विभाग को नहीं दी और इंदौर में ही रहकर काम करता रहा।
पूछताछ में डॉन पेड्रो ने पुलिस को बताया कि बेंगलुरु के एक व्यक्ति ने वीजा बढ़ाने के नाम पर उससे पैसे लिए थे। उस व्यक्ति ने उसे ऑनलाइन एक पीडीएफ भेजी थी, लेकिन जांच में वह दस्तावेज फर्जी निकला और वीजा की अवधि बढ़ी ही नहीं।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे थाने में ही अलग सेल बनाकर रखा था। इसके बाद विदेशी नागरिकों से संबंधित यूनिट को सूचना दी गई और सभी औपचारिकताएं पूरी कर उसे डिपोर्ट कर दिया गया।
डीसीपी राजेश व्यास के निर्देश पर टीआई सुशील पटेल ने उसकी पारिवारिक जानकारी जुटाई। जांच में सामने आया कि उसके पिता डॉन चार्ल्स नाइजीरिया के कोर्ट होसकोरच शहर में पुलिस कमिश्नर हैं।
पुलिस से बातचीत में डॉन चार्ल्स ने बताया कि बोको हराम आतंकी संगठन के खतरे के कारण उन्होंने अपने बच्चों को अलग-अलग देशों में भेजा है। डॉन पेड्रो भारत में रह रहा था, जबकि उसके अन्य भाई पुर्तगाल, यूके और अन्य देशों में रहते हैं।