भोपाल :फतवे पर बहस! दस्तावेज में लिखा- किसी को बार-बार पेशाब आने पर वह सिर्फ नमाज पढ़ सकता, लोगों ने शहर काजी से जोड़कर बताया बयान

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जामे एहतमाम मसाजिद कमेटी के दारुल इफ्ता की ओर से जारी एक फतवा सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद की स्थिति बन गई है। इस दस्तावेज में एक धार्मिक सवाल के जवाब में बीमारी की स्थिति में इमामत से जुड़ा शरई मत बताया गया है। हालांकि सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे भोपाल के शहर काजी से जोड़कर इसे प्रमोट कर रहे हैं, जिससे भ्रम और चर्चा का माहौल बन गया है।
किसी को बार-बार पेशाब आए तो वो नमाज न पढ़ाए!
आगे इसमें कहा गया कि ऐसी स्थिति में वह व्यक्ति खुद नमाज पढ़ सकता है, लेकिन इमाम बनकर लोगों को नमाज नहीं पढ़ा सकता। अगर किसी ने ऐसे व्यक्ति के पीछे फर्ज नमाज पढ़ ली हो तो उसे दोबारा पढ़ने की जरूरत होगी।
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नायब मुफ़्ती ने जारी किया फतवा
बता दें यह फतवा 9 मार्च को नायब मुफ़्ती सैयद अहमद खान कासमी की ओर से जारी बताया गया है। दस्तावेज पर मुफ़्ती-ए-शहर भोपाल की मुहर भी लगी हुई है। इसमें यह भी उल्लेख है कि यह सवाल सहेल अली नाम के व्यक्ति ने पूछा था, जो पीरगेट इलाके के निवासी बताया गया हैं। दस्तावेज में कहीं भी भोपाल के मौजूदा शहर काजी का नाम नहीं लिया गया है।
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सोशल मीडिया पर शहर काजी से जोड़ा जा रहा मामला
इसके बावजूद सोशल मीडिया पर कुछ लोग इस फतवे को सीधे शहर काजी से जोड़कर कमेंट कर रहे हैं। इससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई है। धार्मिक जानकारों का कहना है कि इस तरह के फतवे आम तौर पर शरई नियमों को स्पष्ट करने के लिए जारी किए जाते हैं और यह जरूरी नहीं होता कि वह किसी खास व्यक्ति को ध्यान में रखकर दिए गए हों।
विवाद के बाद बुलाई गई अहम बैठक
फतवे के वायरल होने के बाद मामला और तूल पकड़ता नजर आ रहा है। इस मुद्दे पर ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने आज एक अहम बैठक बुलाई है। समिति के संरक्षक शमसुन हसन ने बताया कि शहर काजी की बीमारी और नमाज को लेकर फतवा सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इसे लेकर मुस्लिम धर्मगुरुओं और संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाएगी। बताया जा रहा है कि इस मामले के बाद समुदाय के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आ रही हैं और इसी वजह से चर्चा के लिए यह बैठक आयोजित की जा रही है।











