भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जामे एहतमाम मसाजिद कमेटी के दारुल इफ्ता की ओर से जारी एक फतवा सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद की स्थिति बन गई है। इस दस्तावेज में एक धार्मिक सवाल के जवाब में बीमारी की स्थिति में इमामत से जुड़ा शरई मत बताया गया है। हालांकि सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे भोपाल के शहर काजी से जोड़कर इसे प्रमोट कर रहे हैं, जिससे भ्रम और चर्चा का माहौल बन गया है।
आगे इसमें कहा गया कि ऐसी स्थिति में वह व्यक्ति खुद नमाज पढ़ सकता है, लेकिन इमाम बनकर लोगों को नमाज नहीं पढ़ा सकता। अगर किसी ने ऐसे व्यक्ति के पीछे फर्ज नमाज पढ़ ली हो तो उसे दोबारा पढ़ने की जरूरत होगी।
यह भी पढ़ें: MP Weather Update : मार्च में ही झुलसाने लगी गर्मी, 17 मार्च के बाद बदलेगा मौसम; कई जिलों में बारिश का अलर्ट
बता दें यह फतवा 9 मार्च को नायब मुफ़्ती सैयद अहमद खान कासमी की ओर से जारी बताया गया है। दस्तावेज पर मुफ़्ती-ए-शहर भोपाल की मुहर भी लगी हुई है। इसमें यह भी उल्लेख है कि यह सवाल सहेल अली नाम के व्यक्ति ने पूछा था, जो पीरगेट इलाके के निवासी बताया गया हैं। दस्तावेज में कहीं भी भोपाल के मौजूदा शहर काजी का नाम नहीं लिया गया है।
यह भी पढ़ें: भोपाल में सरेराह झगड़ा: बस स्टाफ-पुलिस की भिड़ंत, वर्दी फटने तक चली मारपीट
इसके बावजूद सोशल मीडिया पर कुछ लोग इस फतवे को सीधे शहर काजी से जोड़कर कमेंट कर रहे हैं। इससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई है। धार्मिक जानकारों का कहना है कि इस तरह के फतवे आम तौर पर शरई नियमों को स्पष्ट करने के लिए जारी किए जाते हैं और यह जरूरी नहीं होता कि वह किसी खास व्यक्ति को ध्यान में रखकर दिए गए हों।
फतवे के वायरल होने के बाद मामला और तूल पकड़ता नजर आ रहा है। इस मुद्दे पर ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने आज एक अहम बैठक बुलाई है। समिति के संरक्षक शमसुन हसन ने बताया कि शहर काजी की बीमारी और नमाज को लेकर फतवा सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इसे लेकर मुस्लिम धर्मगुरुओं और संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाएगी। बताया जा रहा है कि इस मामले के बाद समुदाय के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आ रही हैं और इसी वजह से चर्चा के लिए यह बैठक आयोजित की जा रही है।