मध्य प्रदेश सरकार ने भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके तहत अब राजधानी का दायरा तेजी से बढ़ेगा और भोपाल एक बड़े महानगर क्षेत्र के रूप में विकसित होगा। नए मेट्रोपॉलिटन रीजन का कुल क्षेत्रफल करीब 12,098 वर्ग किलोमीटर (लगभग 13 हजार वर्ग किमी) होगा। इस रीजन में भोपाल के साथ आसपास के 6 जिलों के कुल 2510 गांवों को शामिल किया गया है।
इस नए रीजन में भोपाल के अलावा रायसेन, विदिशा, सीहोर, राजगढ़ और नर्मदापुरम जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों को जोड़ा गया है। इन सभी क्षेत्रों को एक साथ जोड़कर अब एक ही प्रशासनिक और विकासात्मक ढांचे के तहत काम किया जाएगा।
ये भी पढ़ें: भोपाल में शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन: 50 हजार से ज्यादा शिक्षक सड़कों पर, TET और सेवा शर्तों पर उठाए सवाल
सरकार का मानना है कि राजधानी में बढ़ती आबादी और औद्योगिक दबाव के कारण अब तक विकास बिखरे तरीके से हो रहा था। अब 2510 गांवों को एक साथ जोड़कर पूरे क्षेत्र के लिए एक ‘यूनिफाइड मास्टर प्लान’ तैयार किया जाएगा जिससे सड़क, आवास, उद्योग और बुनियादी ढांचे का विकास व्यवस्थित तरीके से किया जा सके।
इतने बड़े क्षेत्र के प्रबंधन के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त मेट्रोपॉलिटन रीजनल प्लानिंग बोर्ड का गठन किया जाएगा। यह बोर्ड पूरे रीजन के विकास कार्यों की निगरानी करेगा और भविष्य की योजनाओं को लागू करेगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक इतने बड़े ग्रामीण क्षेत्र को शहरी नियोजन में शामिल करना आसान नहीं होगा। भूमि अधिग्रहण, राजस्व प्रबंधन और स्थानीय स्तर पर समन्वय जैसी कई चुनौतियां सामने आ सकती हैं। हालांकि लंबे समय में यह कदम भोपाल को एक मजबूत आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर हब बना सकता है।
ये भी पढ़ें: सतना: डॉक्टर की सलाह पर भड़का मरीज, शराब पीने से मना करने पर की फायरिंग, वारदात के बाद फरार
यह पूरा प्रोजेक्ट दिल्ली-NCR की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है। सरकार की योजना है कि भोपाल को भी इसी तरह एक बड़े आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाए जहां बेहतर कनेक्टिविटी, इंडस्ट्री और रोजगार के नए अवसर पैदा हों।