NEET Cancellation : परीक्षा रद्द होने से छात्रों में बढ़ा डिप्रेशन, कई की नींद ही उड़ी तो कई भविष्य को लेकर चिंतित

NEET परीक्षा रद्द होने से कई छात्र डिप्रेशन का शिकार हो गए हैं। पूरे साल पढ़ाई करने के बाद दोबारा परीक्षा और अनिश्चितता को लेकर छात्र चिंतित हैं। ऐसे में परेशान बच्चों के माता-पिता उन्हें डॉक्टर के पास भी ले जा रहे हैं। मनोचिकित्सकों के मुताबिक कई छात्रों ने खुद को कमरे में बंद कर लिया है।
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परीक्षा रद्द होने से छात्रों में बढ़ा डिप्रेशन, कई की नींद ही उड़ी तो कई भविष्य को लेकर चिंतित

प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। पूरा साल सिर्फ पढ़ाई की अब समझ नहीं आ रहा फिर से वही सब कैसे शुरू करें। यह कहते हुए 19 वर्षीय छात्रा रोशनी की आंखें भर आईं। उसने बताया कि पिताजी मजदूरी करते हैं, जैसे तैसे कोचिंग की फीस जमा की थी। नीट परीक्षा में अच्छे नंबर और अच्छा मेडिकल कॉलेज का भरोसा था, लेकिन परीक्षा रद्द होने से सब खत्म हो गया। इससे रोशनी इतनी टूट गई है कि डिप्रेशन का शिकार हो गई।

सिर्फ रोशनी ही नहीं पिछले कुछ दिनों में शहर के मनोचिकित्सकों के पास ऐसे कई छात्र पहुंच रहे हैं जो निराशा, तनाव और डिप्रेशन से जूझ रहे हैं। मनोचिकित्सकों के मुताबिक कई छात्रों ने खुद को कमरे में बंद कर लिया है। कुछ छात्रों की नींद प्रभावित हुई है, तो कुछ लगातार रोने, घबराहट और भविष्य को लेकर डर महसूस कर रहे हैं। इन छात्रों को डर है कि दूसरा एग्जाम अगर और कठिन हुआ तो उनका रिजल्ट बिगड़ सकता है।

खाना पीना बंद किया, हालत बिगड़ी

जेपी अस्पताल के क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. राहुल शर्मा ने बताया कि एक छात्र ने परीक्षा के लिए पिछले डेढ़ साल से सोशल मीडिया और दोस्तों से दूरी बना ली थी। उसे भरोसा था कि इस बार सरकारी मेडिकल कॉलेज मिल जाएगा। परीक्षा रद्द होने की खबर सुनने के बाद उसने खाना कम कर दिया और लगातार चुप रहने लगा। हालत बिगड़ने पर परिवार ने उसकी स्थिति देखकर मनोचिकित्सक से संपर्क किया। छात्र को एंग्जायटी और पैनिक जैसी परेशानी होने लगी, जिसके बाद काउंसलिंग शुरू कराई गई।

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दूसरी परीक्षा और कठिन होने का डर

एक छात्र शशांक शर्मा ने बताया कि एक परीक्षा रद्द होने पर दूसरी परीक्षा और कठिन होती है। ऐसे में उन्होंने जो तैयारी की है, वो खराब हो जाएगी। जो पहले पढ़ लिया दोबारा उसे पढ़ने का मन नहीं होता। दूसरी परीक्षा के लिए कैसे तैयारी करें समझ नहीं आ रहा। उसे डर है कि अगर फिर कुछ ऐसा हुआ तो क्या होगा।

दोबारा तैयारी करने का मन नहीं

पिछले कुछ दिनों में मनोचिकित्सकों के पास पहुंच रहे अधिकांश छात्र लगातार तनाव, डर और असुरक्षा की भावना की शिकायत कर रहे हैं। कई छात्रों का कहना है कि उन्हें अब दोबारा तैयारी शुरू करने का मन नहीं हो रहा। कुछ छात्र यह सोचकर परेशान हैं कि एक साल की मेहनत और परिवार की उम्मीदों का क्या होगा। डॉक्टरों के मुताबिक कई छात्रों की नींद कम हो गई है, भूख प्रभावित हुई है और वे लोगों से बातचीत से बच रहे हैं।

खुद को ऐसे संभालें छात्र

मनोचिकित्सक डॉ. अवंतिका वर्मा बताती हैं कि ऐसी घटनाएं मानसिक रूप से झटका जरूर देती हैं, लेकिन इसे जीवन का अंत नहीं मानना चाहिए। छात्र खुद को अकेला न रखें और परिवार या करीबी दोस्तों से बातचीत जारी रखें। रोजाना हल्की एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और मोबाइल- सोशल मीडिया से सीमित दूरी मानसिक तनाव कम करने में मदद करती है। डॉक्टरों के मुताबिक यदि लगातार घबराहट, रोने का मन, चिड़चिड़ापन या आत्मविश्वास में कमी महसूस हो रही हो तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेना चाहिए। 

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परिवार का सहयोग, काउंसलिंग बेहद जरूरी

नीट परीक्षा रद्द होने के बाद कई छात्र भावनात्मक रूप से टूटे हुए महसूस कर रहे हैं। लगातार तनाव और भविष्य की चिंता के कारण उनमें एंग्जायटी और डिप्रेशन के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। अगर इन्हें सही समय पर ना संभालें तो नकारात्मक विचार स्थाई हो सकते हैं। ऐसे समय में परिवार का सहयोग और सही काउंसलिंग बेहद जरूरी है।

डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी, वरिष्ठ मनोचिकित्सक

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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