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गंदगी में जम रही कुल्फी!शेक में मिल रहा अरारोट, नल के पानी और घटिया बर्फ से तैयार हो रही ठंडक

गर्मियों में प्यास बुझाने वाली कुल्फी और शेक आपकी सेहत के लिए खतरा बन सकते हैं। पड़ताल में सामने आया है कि इन्हें बेहद गंदी परिस्थितियों में, अरारोट, नल के पानी और घटिया बर्फ का इस्तेमाल कर तैयार किया जा रहा है।
शेक में मिल रहा अरारोट, नल के पानी और घटिया बर्फ से तैयार हो रही ठंडक

प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। गर्मी बढ़ते ही शहर में कुल्फी, आइसक्रीम और फ्रूट शेक की मांग तेजी से बढ़ जाती है। बाजारों, कॉलोनियों और सड़कों पर शाम होते ही इन उत्पादों की बिक्री शुरू हो जाती है लेकिन इन ठंडी चीजों के पीछे छिपी सच्चाई लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। हाल ही में कुछ ब्रांडेड आइसक्रीम के सैंपलों में बीआर रीडिंग तय मानकों से अधिक मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने जांच शुरू की थी। इसी कार्रवाई के बाद पीपुल्स समाचार की पड़ताल में शहर के कई हिस्सों में कुल्फी, आइसक्रीम और फ्रूट शेक बनाने के दौरान गंभीर लापरवाही सामने आई। कई स्थानों पर गंदगी, खुले नालों और अस्वच्छ वातावरण में खाद्य उत्पाद तैयार किए जाते मिले। कहीं कुल्फी खुले सांचों में जमाई जा रही थी तो कहीं प्लास्टिक के ड्रमों में रखा संदिग्ध मिश्रण दूध बताकर उपयोग किया जा रहा था।

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खुले नाले के पास तैयार हो रही थी कुल्फी

दोपहर करीब ढाई बजे छोला क्षेत्र की एक गली में बड़े एल्यूमीनियम के बर्तन में कुल्फी का मिश्रण तैयार किया जा रहा था। जिस जगह यह काम चल रहा था, उसके ठीक पीछे खुला नाला बह रहा था और आसपास बदबू फैली हुई थी। मौके पर मौजूद दो युवक ऐसी बर्फ का उपयोग करते मिले, जिसका उपयोग खाद्य सामग्री में नहीं किया जाना चाहिए। बर्फ खुले में रखी थी और उस पर धूल जमी हुई थी। इसी बर्फ से कुल्फी जमाई जा रही थी।

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सीलनभरे कमरे में बन रहा था फ्रूट शेक बेस

करोंद इलाके में सड़क किनारे बने एक छोटे से कमरे में फ्रूट शेक और आइसक्रीम का बेस तैयार होता मिला। कमरे में सीलन, गर्मी और दुर्गंध थी। प्लास्टिक के ड्रमों में रखा सफेद गाढ़ा मिश्रण बिना ढके रखा था। इसके पास ही बर्तनों में फ्लेवर, रंग और अन्य सामग्री मिलाई जा रही थी। इन्हीं मिश्रणों का उपयोग बाद में फ्रूट शेक और आइसक्रीम तैयार करने में किया जाता है।

लागत घटाने के लिए हो रही मिलावट

खाद्य विशेषज्ञों के अनुसार सस्ती कुल्फी और आइसक्रीम बनाने के लिए कई बार असली दूध और मावे की जगह सिंथेटिक फैट, वनस्पति घी, स्टार्च, कृत्रिम फ्लेवर और रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। फ्रूट शेक में भी कई जगह असली फलों की जगह केवल एसेंस और मीठे सिरप मिलाए जाते हैं। गाढ़ापन बढ़ाने के लिए अरारोट पाउडर, ग्लूकोज पाउडर और इमल्सीफायर का उपयोग किया जाता है।

सेहत पर पड़ सकता है गंभीर असर

पेट रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रणव रघुवंशी बताते हैं कि सिंथेटिक मिल्क बेस, वनस्पति घी और केमिकल युक्त फ्लेवर का लगातार सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। इनके सेवन से उल्टी, पेट दर्द, अपच और बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक ऐसे उत्पाद खाने से पेट संबंधी गंभीर बीमारियां, अल्सर और कैंसर जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। कृत्रिम रंग और फ्लेवर एलर्जी, त्वचा रोग और लीवर पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।

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बीआर रीडिंग से होती है शुद्धता की जांच

खाद्य विभाग के अधिकारी देवेंद्र वर्मा के अनुसार आइसक्रीम की गुणवत्ता जांचने के लिए उसकी बीआर रीडिंग देखी जाती है। इससे दूध, घी, मक्खन और आइसक्रीम में मौजूद वसा की गुणवत्ता का पता चलता है। बीआर रीडिंग का निर्धारित मानक 40 से 44 के बीच होता है। यदि यह इससे अधिक पाई जाती है तो शुद्ध दूध की वसा के स्थान पर अन्य प्रकार के तेल या वसा की मिलावट की आशंका बढ़ जाती है।

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केवल भरोसेमंद दुकानों से खरीदें उत्पाद

हमीदिया अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अनिल शेजवार का कहना है कि लोगों को केवल भरोसेमंद और लाइसेंसधारी दुकानों से ही दूध आधारित उत्पाद खरीदने चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि गर्मी के मौसम में खुले और संदिग्ध खाद्य उत्पादों के सेवन से संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। विशेष रूप से बच्चों को सड़क किनारे बिकने वाली अत्यधिक सस्ती और खुले में रखी कुल्फी, आइसक्रीम और शेक से दूर रखना चाहिए।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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