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गुप्तचर ऐप :वन अपराध रोकने के लिए ग्रामीणों को कनेक्ट किया, अब हर जगह रहेगी 'फॉरेस्ट' की नजर

जंगल में अपराधों को रोकने के लिए दक्षिण सिवनी वन मंडल ने एक नई पहल की है। यहां एक गुप्तचर ऐप से ग्रामीणों को जोड़ा गया है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि ऐप से जुड़ने पर ग्रामीण अपराधों से संबंधित सूचनाएं साझा करेंगे, इससे अपराधों को रोका जा सकेगा।
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वन अपराध रोकने के लिए ग्रामीणों को कनेक्ट किया, अब हर जगह रहेगी 'फॉरेस्ट' की नजर

संतोष चौधरी,भोपाल। वन अपराधों पर अंकुश लगाने और वन संरक्षण में स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने के लिए दक्षिण सिवनी वन मंडल ने अभिनव पहल की है। वन विभाग द्वारा विकसित ‘गुप्तचर ऐप’ से ग्रामीण वन अपराधों की सूचना सीधे विभाग को दे रहे हैं। डेढ़ माह पहले शुरू हुए इस ऐप से अब तक करीब 650 ग्रामीण जुड़ कर एक दर्जन सूचनाएं दे चुके हैं, जिनमें से अधिकांश पर विभाग ने कार्रवाई भी की है।

ग्रामीण खुद को गुप्तचर बना सकते हैं

दक्षिण सिवनी वन मंडल के डीएफओ गौरव मिश्रा ने बताया कि ऐप विशेष रूप से वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों को वन सुरक्षा अभियान से जोड़ने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इससे कोई भी ग्रामीण स्वयं को गुप्तचर के रूप में पंजीकृत कर सकता है। पंजीकरण के बाद विशेष गुप्तचर कोड दिया जाता है, जिससे पहचान गोपनीय रहती है। ग्रामीणों को लगातार इस ऐप पर रजिस्ट्रेशन कराया जा रहा है। 

रिर्पोटिंग की अलग-अलग 15 श्रेणियां

ऐप में वन अपराधों की रिपोर्टिंग के लिए 15 अलग-अलग श्रेणियां हैं। इनमें अवैध कटाई, वन्यजीवों का शिकार, अतिक्रमण, आगजनी और अवैध गतिविधियों की जानकारी सीधे वन विभाग भेजी जा सकती है। सूचना मिलते ही अमला मौके पर कार्रवाई करता है।

बीट स्तर तक हैं गुप्तचर 

इस ऐप की एक और खासियत यह है कि इसमें रेंजर से लेकर डीएफओ तक के संपर्क नंबर उपलब्ध हैं। जरूरत पड़ने पर ग्रामीण सीधे अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं। वहीं विभाग के अधिकारी भी परिक्षेत्र और बीट स्तर पर पंजीकृत गुप्तचरों से संपर्क कर वन सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

गुप्तचर ऐप की विशेषताएं

  • ग्रामीणों के लिए आसान आॅनलाइन पंजीकरण
  • पहचान गोपनीय रखने के लिए विशेष गुप्तचर कोड
  • वन अपराधों की त्वरित आॅनलाइन शिकायत
  • अधिकारियों के संपर्क नंबर एक ही प्लेटफॉर्म पर
  • सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था

ग्रामीणों और वन विभाग के बीच समन्वय बढ़ेगा

यह तकनीकी पहल न केवल वन अपराधों की निगरानी को मजबूत करेगी, बल्कि ग्रामीणों और वन विभाग के बीच समन्वय भी बढ़ाएगी। गुप्तचर के लिए सम्मान का प्रावधान किया गया है। यह गुप्तचर पर निर्भर है कि वह सम्मान लेगा या नहीं। दक्षिण सिवनी में मिली शुरुआती सफलता के बाद अब इस मॉडल को पूरे मध्यप्रदेश में लागू करने पर विचार किया जा रहा है।

अमित कुमार दुबे, एपीसीसीएफ, संरक्षण

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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