भुवनेश्वर। ओडिशा की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के एक विवादित बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री और बीजद प्रमुख नवीन पटनायक ने तीखी प्रतिक्रिया दी। अपने पिता और पूर्व दिग्गज नेता बिजू पटनायक को लेकर दिए गए बयान पर उन्होंने इसे आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि ऐसे बयान देने वाले को मानसिक उपचार की जरूरत है।
भुवनेश्वर में मीडिया से बातचीत के दौरान नवीन पटनायक ने साफ कहा कि उनके पिता पर लगाए गए आरोप न केवल निराधार हैं बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण भी हैं। उन्होंने कहा कि 1962 के चीन हमले के समय वे खुद किशोर अवस्था में थे और उन्हें अच्छी तरह याद है कि बीजू पटनायक उस हमले को लेकर कितने आक्रोशित थे और देश की रक्षा के लिए उन्होंने हर संभव प्रयास किया।
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इस बयान के खिलाफ बीजद ने संसद में भी मोर्चा खोल दिया। राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही बीजद सांसद सस्मित पात्रा ने इस मुद्दे को उठाया और निशिकांत दुबे के बयान को मनगढ़ंत और झूठा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल का स्तर गिरता जा रहा है। विरोध दर्ज कराते हुए बीजद सांसदों ने सदन से वॉकआउट कर दिया, जिससे मामला और गरमा गया।
दरअसल, 27 मार्च को निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में दावा किया था कि 1960 के दशक में जवाहरलाल नेहरू बीजू पटनायक और अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के बीच संबंध थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत ने 1962 का चीन युद्ध अमेरिका के इशारे और उसकी आर्थिक मदद से लड़ा था।
इसके अलावा दुबे ने यह भी कहा कि दलाई लामा के भारत आने में अमेरिकी भूमिका थी और उस समय भारत ने अमेरिका को रणनीतिक सहयोग दिया। उनके इन बयानों ने राजनीतिक गलियारों में विवाद को और हवा दे दी है।
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बीजू पटनायक ओडिशा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। वे दो बार (1961-63 और 1990-95) राज्य के मुख्यमंत्री रहे और एक साहसी स्वतंत्रता सेनानी तथा कुशल एविएटर के रूप में उनकी पहचान रही। 1947 में इंडोनेशिया के स्वतंत्रता सेनानियों को बचाने के लिए उन्होंने जान जोखिम में डालकर जकार्ता तक उड़ान भरी थी, जो आज भी उनके साहस का प्रतीक माना जाता है।
इस पूरे विवाद ने केंद्र और राज्य की राजनीति के बीच टकराव को और तेज कर दिया है। एक तरफ बीजेपी सांसद अपने बयान पर कायम हैं, तो दूसरी ओर BJD इसे अपने नेता के सम्मान से जोड़कर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक और गरमाने के संकेत दे रहा है।