SIR पर ओवैसी का बड़ा बयान, सपा से पूछा- वोटरों के नाम बचाने के लिए क्या किया?

उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। सभी पार्टियां अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी हैं। इसी बीच AIMIM प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आजमगढ़ में जनसभा को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सवाल उठाए और पूछा कि PDA के मसीहा इस मुद्दे पर क्या कर रहे हैं। ओवैसी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में SIR के बाद हजारों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
SIR को लेकर ओवैसी ने सपा से पूछे सवाल
असदुद्दीन ओवैसी ने अपने भाषण में कहा कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद कई लोगों के नाम हटाए जाने का मुद्दा गंभीर है। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि खुद को पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों का हितैषी बताने वाले नेता इस मामले में क्या कर रहे हैं। ओवैसी ने कहा कि PDA के समर्थक भी अपने नेताओं से सवाल पूछेंगे कि मतदाताओं के नाम सूची में बनाए रखने के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए। उनके इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सपा और AIMIM के बीच बढ़ती राजनीतिक खींचतान के तौर पर देखा जा रहा है।
हैदराबाद और तेलंगाना का उदाहरण देकर कही ये बात
AIMIM प्रमुख ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने हैदराबाद और तेलंगाना में मतदाता सूची से जुड़े काम के दौरान लाखों लोगों के नाम खोजने और उन्हें सूची में शामिल कराने में मदद की। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने अपने राजनीतिक विरोधियों को भी मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया। ओवैसी के मुताबिक, मतदाता सूची में पात्र नागरिकों का नाम होना जरूरी है, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन करते हों। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चुनाव में मतदान करने के लिए मतदाता सूची में नाम दर्ज होना बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, हैदराबाद और तेलंगाना में नाम खोजने तथा उन्हें सूची में शामिल कराने को लेकर ओवैसी ने जो बातें कही हैं, वे उनके अपने दावे हैं।
अखिलेश यादव पर सीधा हमला
अपने संबोधन में ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी निशाने पर लिया। उन्होंने PDA के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस गठबंधन के नेताओं को बताना चाहिए कि उन्होंने लोगों के लिए वास्तव में क्या काम किया है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि सपा केवल खुद को PDA का मसीहा बताती है, जबकि उनकी पार्टी जमीनी स्तर पर काम कर रही है। उन्होंने अखिलेश यादव के नेतृत्व और सपा की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को अपने काम का हिसाब देना चाहिए। गौरतलब है कि PDA का अर्थ पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों से है। समाजवादी पार्टी अपनी राजनीति में इन वर्गों की भागीदारी और अधिकारों को प्रमुख मुद्दा बनाती रही है। ओवैसी इसी मुद्दे पर सपा को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।
बोले- मुकाबले से नहीं डरता ओवैसी
असदुद्दीन ओवैसी ने अपने भाषण में चुनावी मुकाबले को लेकर भी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि वह किसी भी राजनीतिक मुकाबले से नहीं डरते। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे चुनाव में हिस्सा लें और निष्पक्ष मुकाबले के लिए आगे आएं। ओवैसी ने कहा कि वह नहीं चाहते कि किसी का वोट बेकार जाए। उन्होंने अपने विरोधियों को चुनौती देते हुए कहा कि वे उनसे मुकाबला करें। उनके इस बयान को उत्तर प्रदेश में AIMIM की राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
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'लाल टोपी' का जिक्र कर सपा पर साधा निशाना
ओवैसी ने समाजवादी पार्टी के चुनाव चिह्न लाल टोपी का जिक्र करते हुए भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर लोग लाल टोपी वाली पार्टी से जुड़ते हैं, तो वे अपने स्वतंत्र नेतृत्व के बजाय उसके अधीन रह जाएंगे। उनके इस बयान का मकसद सपा के नेतृत्व और राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाना था। ओवैसी लगातार यह मुद्दा उठाते रहे हैं कि विभिन्न समुदायों को राजनीति में अपनी स्वतंत्र आवाज और नेतृत्व विकसित करने का अवसर मिलना चाहिए।
2027 के चुनाव से पहले बढ़ सकती है सियासी खींचतान
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले SIR, मतदाता सूची, सामाजिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक गठबंधन जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। आजमगढ़ में ओवैसी का बयान इसी राजनीतिक माहौल का हिस्सा है। उन्होंने जहां सपा और अखिलेश यादव पर सवाल उठाए, वहीं अपनी पार्टी के कामकाज का उदाहरण देकर मतदाताओं के सामने AIMIM का पक्ष रखा। अब देखना होगा कि समाजवादी पार्टी इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और चुनाव से पहले मतदाता सूची के मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच बहस किस दिशा में आगे बढ़ती है।




















