पंजाब सरकार बोली ‘रुकिए’, लेकिन नहीं रुकी प्रक्रिया! जस्टिस अश्वनी मिश्रा बने HC के चीफ जस्टिस

जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने सोमवार (7 सितंबर) को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। पंजाब के लोक भवन में आयोजित समारोह में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। जस्टिस मिश्रा इससे पहले जून से हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
शपथ ग्रहण समारोह में कई बड़े नेता रहे मौजूद
जस्टिस अश्वनी मिश्रा के शपथ ग्रहण समारोह में पंजाब और हरियाणा के कई वरिष्ठ नेता और अधिकारी मौजूद रहे। समारोह में हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण और शिरोमणि अकाली दल की विधायक गनीव कौर मजीठिया शामिल हुईं। पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। हालांकि, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान समारोह में शामिल नहीं हुए। खास बात यह है कि उनकी सरकार ने जस्टिस मिश्रा को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने का विरोध किया था।
पंजाब कैबिनेट ने शपथ रोकने की मांग की थी
जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति को लेकर पंजाब सरकार की आपत्ति शपथ ग्रहण से ठीक एक दिन पहले भी सामने आई थी। पंजाब मंत्रिमंडल ने रविवार (6 सितंबर) शाम एक प्रस्ताव पारित किया था। इसमें केंद्र सरकार से अपील की गई थी कि जब तक राज्य सरकार की चिंताओं का उचित समाधान नहीं होता, तब तक जस्टिस मिश्रा के शपथ ग्रहण की प्रक्रिया को आगे न बढ़ाया जाए। इसके बावजूद सोमवार को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जस्टिस अश्वनी मिश्रा ने मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ले ली।
केंद्र ने शनिवार को जारी की नियुक्ति की अधिसूचना
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने करीब एक महीने पहले जस्टिस अश्वनी मिश्रा को मुख्य न्यायाधीश पद पर नियुक्त किए जाने की सिफारिश की थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने शनिवार को उनकी नियुक्ति को लेकर अधिसूचना जारी कर दी। इस नियुक्ति को लेकर पंजाब सरकार और केंद्र के बीच मतभेद खुलकर सामने आए। पंजाब सरकार ने नियुक्ति पर अपनी आपत्ति जताई, जबकि केंद्र की ओर से नियुक्ति की प्रक्रिया को नियमों के तहत पूरा किए जाने की बात कही गई।
पंजाब कैबिनेट के प्रस्ताव पर ASG सत्य पाल जैन का पलटवार
पंजाब कैबिनेट के प्रस्ताव के बाद भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पंजाब सरकार के रुख को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों की ओर से दिए गए बयान संविधान और तय संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं हैं। सत्य पाल जैन के मुताबिक, 6 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने खाली पदों के लिए आठ नामों की सिफारिश की थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (MoP) के तहत संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों को इन नामों पर राय देने के लिए प्रस्ताव भेजा। उन्होंने दावा किया कि पंजाब को छोड़कर बाकी सात राज्यों ने इन नियुक्तियों पर सहमति दे दी थी। उनके मुताबिक, इन राज्यों में BJP और गैर-BJP दोनों तरह की सरकारें शामिल थीं। इसके बाद नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी की गई और संबंधित नए मुख्य न्यायाधीशों ने अपने पद संभाल लिए।
अब जस्टिस मिश्रा संभालेंगे हाई कोर्ट की जिम्मेदारी
जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा के शपथ लेने के साथ ही पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट को स्थायी मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। हालांकि, उनकी नियुक्ति को लेकर पंजाब सरकार की आपत्ति ने इस पूरे मामले को राजनीतिक और संवैधानिक चर्चा का विषय बना दिया है। अब जस्टिस मिश्रा बतौर मुख्य न्यायाधीश हाई कोर्ट की न्यायिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालेंगे।



















