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NASA के Perseverance Rover ने रचा इतिहास, मंगल पर सबसे ज्यादा दूरी तय करने का 15 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा, Opportunity को पछाड़ा  

Mars Rover Distance Record: 11 अक्टूबर 2026 को Perseverance ने 2006वें Sol पर 45.22 किलोमीटर दूरी पूरी की, Opportunity का 45.16 किलोमीटर का रिकॉर्ड टूटा, JPL ने कहा 2028 तक Jezero Crater के किनारों की खोज जारी रखेगा।
NASA के Perseverance Rover ने रचा इतिहास, मंगल पर सबसे ज्यादा दूरी तय करने का 15 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा, Opportunity को पछाड़ा   
NASA का Perseverance Rover मंगल ग्रह पर।

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न्यूयॉर्क। NASA के पर्सिवरेंस रोवर ने किसी दूसरे ग्रह की सतह पर तय की गई दूरी का नया रिकॉर्ड बनाया है। 11 अक्टूबर, 2026 को, मंगल ग्रह पर साढ़े पांच साल बिताने के बाद छह पहियों वाले इस रोवर के ओडोमीटर ने 45.22 किलोमीटर की दूरी दर्ज की। इसने NASA के ही 'ऑपर्च्युनिटी' रोवर के लगभग 15 साल की खोज के दौरान बनाए गए 45.16 किलोमीटर के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

2006 दिन में यह दूरी पूरी की

NASA की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के अनुसार पर्सिवरेंस ने अपने मिशन के 2,006वें मंगल-दिवस (इसे सोल भी का जाता है) पर यह उपलब्धि हासिल की। यह उपलब्धि सिर्फ आंकड़ों के लिहाज से ही अहम नहीं है। यह दिखाती है कि NASA के शुरुआती मंगल रोवर के बाद से रोबोटिक खोज कितनी आगे बढ़ चुकी है। साथ ही, इससे वैज्ञानिकों को जेजेरो क्रेटर और उसके आस-पास के पुराने इलाकों की अलग-अलग तरह की भू-संरचना को समझने में तेजी से मदद मिल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, पर्सिवरेंस अब अपने मूल मिशन प्लान से आगे काम कर रहा है। NASA ने इसके मिशन को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। इसके तहत यह लगभग 2028 के आखिर तक क्रेटर के किनारे वाले इलाकों की खोज जारी रखेगा।

आधे समय में बना रिकॉर्ड

इससे पहले दूसरे ग्रह पर सबसे ज्यादा दूरी तक गाड़ी चलाने का रिकॉर्ड सालों तक ऑपर्च्युनिटी रोवर के नाम था। यह रोवर 2004 में मंगल पर उतरा था और 2018 तक काम करता रहा। इस दौरान इसने 5,111 मंगल-दिवसों में 45.16 किलोमीटर की दूरी तय की। इसकी लंबी उम्र और काम करने की क्षमता ने इसे NASA के सबसे सफल मिशनों में से एक बना दिया। इसने ऐसा बेंचमार्क स्थापित किया, जिसकी बराबरी करना मुश्किल लग रहा था। पर्सिवरेंस ने सिर्फ साढ़े पांच साल में ही उससे थोड़ी ज्यादा दूरी तय कर ली। इसने अपने 2,006वें मंगल दिवस पर यह दूरी पूरी की। इसने 'ऑपर्च्युनिटी' की तुलना में आधे से भी कम समय में उससे ज्यादा दूरी तय की।

रूस और अमेरिका के चांद्रमा के रिकॉर्ड तोड़े

NASA का कहना है कि रोवर अपनी शुरुआती मिशन की जरूरत से कहीं ज्यादा दूर तक चल चुका है। पहले से तय दूरी 19.9 किलोमीटर से ज्यादा नहीं थी। इस रिकॉर्ड की वजह से पर्सिवरेंस दूसरे बड़े स्पेस व्हीकल्स से भी आगे निकल गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसने 1972 में चांद पर अपोलो 17 के एस्ट्रोनॉट्स जीन सर्नन और हैरिसन श्मिट द्वारा तय की गई 35.7 किलोमीटर की दूरी और 1973 में सोवियत यूनियन के लूनोखोद 2 रोवर द्वारा तय की गई 38.9 किमी की दूरी को भी पार कर लिया है।

पर्सिवरेंस कैसे चलता है

इस नए रिकॉर्ड की एक बड़ी वजह पर्सिवरेंस का ऑटोनॉमस नेविगेशन सिस्टम है। जिसे ऑटो-नैव कहा जाता है। जैसे-जैसे रोवर आगे बढ़ता है यह जमीन की तस्वीरें लेता है। खतरों का थ्री-डायमेंशनल मैप बनाता है और धरती पर मौजूद इंजीनियरों द्वारा चुने गए वे-पॉइंट्स के बीच रास्ता तय करता है। NASA इस क्षमता को चलते हुए सोचना कहता है।

खुद लेता है अपने फैसले

यह ऑटोनॉमी पर्सिवरेंस को धरती से हर फैसले का इंतजार किए बिना अपनी टॉप स्पीड या उसके आस-पास चलने की सुविधा देती है। मंगल ग्रह के एक दिन में रोवर मीटर तक की दूरी तय कर सकता है। NASA की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के अनुसार इसकी कुल दूरी का 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा ऑटो-नैव का इस्तेमाल करके तय किया गया है। वहीं, NASA के पहले के ऑपर्च्युनिटी और स्पिरिट रोवर्स के लिए यह आंकड़ा लगभग 5 प्रतिशत था।

कंप्यूटिंग पावर में भी बहुत बड़ा अंतर है

NASA के पहले मार्स रोवर ‘सोजर्नर’ ने 20 मेजरमेंट पॉइंट्स का इस्तेमाल करके आगे के रास्ते का आकलन किया था। पर्सिवरेंस हर बार देखने पर 6,00,000 पॉइंट्स को प्रोसेस करता है। इससे यह रुकावटों की पहचान कर पाता है और कहीं ज्यादा सटीकता के साथ सुरक्षित रास्ते चुन पाता है।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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