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गर्मी में टूटते मॉलिक्यूल्स से मिला खजाना, वैज्ञानिकों ने खोजे छिपे हुए मटीरियल्स, सोलर फ्यूल और बैटरी में होगा बड़ा बदलाव

Hidden Materials Discovery: इंटरनेशनल रिसर्च टीम ने थर्मल प्रोसेसिंग के दौरान बनने वाले इंटरमीडिएट फेज को ट्रैक कर नई कैटेगरी खोजी, नेचर कम्युनिकेशन्स में पब्लिश स्टडी से हाई कैपेसिटी बैटरी और सोलर फ्यूल सिस्टम का रास्ता खुलेगा।
गर्मी में टूटते मॉलिक्यूल्स से मिला खजाना, वैज्ञानिकों ने खोजे छिपे हुए मटीरियल्स, सोलर फ्यूल और बैटरी में होगा बड़ा बदलाव
वैज्ञानिकों ने खोजे छिपे हुए मटीरियल्स।

 लंदन। एक इंटरनेशनल रिसर्च टीम ने गर्मी से मॉलिक्यूल्स के टूटने पर होने वाले बहुत तेजी से होने वाले बदलावों को ट्रैक करके, पहले से अनजान छिपे हुए मटीरियल्स की एक कैटेगरी का पता लगाया है। नेचर कम्युनिकेशन्स में पब्लिश हुई ये खोज ज्यादा कुशल सोलर फ्यूल सिस्टम और ज्यादा क्षमता वाली बैटरी बनाने के नए रास्ते खोल सकती है।

यह खोज क्या बदल सकती है

आमतौर पर जब मटीरियल साइंटिस्ट थर्मल प्रोसेसिंग के जरिए सॉलिड कंपाउंड बनाते हैं तो उनका पूरा ध्यान आखिरी नतीजे पर होता है। यानी शुरुआती मटीरियल A से सीधे आखिरी प्रोडक्ट B तक पहुंचना। हालांकि, हीटिंग साइकल के दौरान बनने वाले कुछ समय के लिए रहने वाले बीच के चरणों को रोककर उनका एनालिसिस करके रिसर्चर्स ने बिल्कुल नए स्ट्रक्चर खोजे हैं। इन्हें आम सिंथेसिस तरीकों से बनाना मुश्किल या नामुमकिन है। यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के केमिस्ट्री डिपार्टमेंट के डॉ. सेबेस्टियन पाइक ने कहा, जब मटीरियल को गर्म करके बनाया जाता है तो साइंटिस्ट आमतौर पर आखिरी प्रोडक्ट पर ध्यान देते हैं। लेकिन यह स्टडी दिखाती है कि A और B के बीच कई दिलचस्प चरण होते हैं। ये छिपे हुए चरण भी उतने ही जरूरी हो सकते हैं। हमें ठीक-ठीक नहीं पता था कि हमें क्या मिलेगा, लेकिन हमें भरोसा था कि बीच के चरणों में कुछ दिलचस्प और अनजान चीज जरूर मिलेगी। हमें यह जानकर बहुत खुशी हुई कि इनमें से कुछ का प्रैक्टिकल इस्तेमाल हो सकता है। पाइक ने कहा- यह बात शुरुआती एक्सपेरिमेंट से ही पता चल गई थी।

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बिस्मथ वैनाडेट के नए रूप की खोज

टीम ने अपने प्रयोगों की शुरुआत खास तौर पर तैयार किए गए सिंगल-सोर्स प्रीकर्सर से की। ये ऐसे सिंगल मॉलिक्यूल थे जिनमें टारगेट सॉलिड मटीरियल बनाने के लिए जरूरी सभी बुनियादी तत्व मौजूद थे। जैसे-जैसे तापमान लगातार बढ़ा वैज्ञानिकों ने देखा कि मॉलिक्यूलर बॉन्ड कैसे टूटते और फिर से जुड़ते हैं। इस निगरानी से मटीरियल के कई ऐसे रूप सामने आए जिनके बारे में पहले पता नहीं था।

रिन्यूएबल एनर्जी में अहम है बिस्मथ वैनाडेट

इस खोज में सबसे खास था बिस्मथ वैनाडेट काइनेटिकली स्टेबल रूप। स्टैंडर्ड बिस्मथ वैनाडेट को रिन्यूएबल एनर्जी इंजीनियरिंग में इसके बेहतरीन बैंड गैप के कारण बहुत अहम माना जाता है। बैंड गैप का अर्थ है- सूरज की रोशनी को सोखने और केमिकल रिएक्शन को कैटलाइज करने के लिए जरूरी सटीक एनर्जी थ्रेशोल्ड। यह खासियत इसे सोलर एनर्जी को कुशलता से इस्तेमाल करने और पानी के मॉलिक्यूल को साफ हाइड्रोजन फ्यूल में तोड़ने के लिए जरूरी केमिकल क्षमता देने में मदद करती है। नए पहचाने गए 'रूप' की एटॉमिक बनावट अलग है। यह इसे इस कंपाउंड के पहले से मौजूद सभी रूपों से अलग बनाती है। सबसे अहम बात यह है कि इसका बैंड गैप काफी ज्यादा है, जिससे यह मटीरियल रोशनी को सोखने और उस पर प्रतिक्रिया करने के तरीके को पूरी तरह बदल देता है।

मटीरियल को बेहतर बनाने के नए रास्ते खुलते हैं

रिसर्चर का कहना है कि इस बदलाव से कैटालिसिस, एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर फ्यूल बनाने के क्षेत्रों में मटीरियल को बेहतर बनाने के नए रास्ते खुलते हैं। अगली पीढ़ी की बैटरी के लिए एक उम्मीद भरी कामयाबीइन इंटरमीडिएट मटीरियल का इस्तेमाल सिर्फ सोलर एनर्जी तक ही सीमित नहीं है। टेस्टिंग प्रोसेस के दौरान वैज्ञानिकों ने एक और ट्रांजिएंट फेज की पहचान की जिसमें ज्यादा क्षमता वाला लिथियम स्टोरेज देखा गया। यह अगली पीढ़ी की बैटरी बनावट के लिए तुरंत उम्मीद जगाता है। बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ केमिस्ट्री के डॉ. डोमिनिक कुबिकी ने बताया कि दिलचस्प बात यह है कि ये बीच के मटीरियल सिर्फ एक सीढ़ी की तरह नहीं हैं, इनमें अपने आप में भी उपयोगी गुण हो सकते हैं। इनके बनने के तरीके को समझकर और नियंत्रित करके, हम बैटरी, कैटालिसिस और सोलर एनर्जी के लिए बेहतर मटीरियल डिजाइन करना शुरू कर सकते हैं।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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