नेशनल डेस्क। नारी शक्ति वंदन (महिला आरक्षण) बिल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि परिसीमन से लोकसभा की सीटें बढ़ने से किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अगर आपको गारंटी चाहिए तो वो भी देता हूं। उन्होंने कहा कि कश्मीर हो या कन्या कुमारी हम एक देश के रूप में ही इसे सोच सकते हैं। ये प्रक्रिया किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी। भूतकाल में जो सरकार रहीं, जो उस समय से अनुपात चला आ रहा है उसमें भी बदलाव नहीं होगा। अगर गांरटी शब्द चाहिए तो मैं वह शब्द भी उपयोग करता हूं, वादा की बात करते हो तो उसे भी इस्तेमाल करता हूं। तमिल में कोई शब्द हो तो मैं उसे भी कहता हूं, क्योंकि जब नीयत साफ है तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि-हम भ्रम में न रहें, मैं और तुम की बात नहीं कर रहा हूं मैं कि हम देश की नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं। ये उनका हक है और हमने कई दशकों से उसको रोका है। आज उसका प्रायश्चित करके उस अपराध से मुक्ति पाने का अवसर है। पीएम ने इस बिल में आई बाधाओं का जिक्र करते हुए कहा कि हम सब जानते हें कि कैसे चालाकी चतुराई की है। हम इसके पक्ष में ही हैं, लेकिन हर बार कोई न कोई टेक्निकल पूंछ लगाकर रोक दिया गया। लेकिन अब देश की नारी को नहीं समझा पाओगे। सदन में नंबर का खेल तो बाद में सामने आएगा। 3 दशक तक इसको फंसाकर रखा, जो करना था कर लिया। अब छोड़ दो न भाई। यहां कुछ लोगों को लगता है, इसमें कहीं न कहीं मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है।
पीएम मोदी ने कहा कि- इसका अगर विरोध करेंगे तो स्वाभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे होगा, अगर साथ चलेंगे तो किसी को भी नुकसान नहीं होगा। हमें क्रेडिट नहीं चाहिए जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने तैयार हूं। सबकी फोटो छपवा देंगे। ले लो जी क्रेडिट। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि-मैं अपील करने आया हूं कि इसको राजनीतिक तराजू से मत तौलिए। आज का यह अवसर एक साथ बैठकर एक दिशा में सोचकर विकसित भारत बनाने में खुले मन से स्वीकार करने का अवसर है। मैंने पहले भी कहा कि आज पूरा देश विशेषकर नारी शक्ति हमारे निर्णय तो देखेगी लेकिन उससे ज्यादा हमारी नीयत को देखेगी, इसलिए हमारी नीयत की खोट देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी।
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पीएम मोदी ने कहा- पिछले दिनों जब हम 2023 में चर्चा कर रहे थे तब हर कोई कह रहा था कि इसे जल्दी करो। तब हमारे पास समय नहीं था। अब हम इसे 2029 में करने वाले हैं, इसलिए समय की मांग है कि हम और ज्यादा विलंब न करें। इस दौरान संविधान के जानकार लोगों से चर्चा की, सारा मंथन करते-करते यह सामने आया कि कुछ रास्ता निकालना होगा तब हम माता-बहनों की शक्ति को जोड़ सकते हैं।