इंदौर। नगर निगम के इस सम्मेलन में बीजेपी और कांग्रेस महिला आरक्षण के मुद्दे पर आमने-सामने आ गए। महापौर पुष्यमित्र भार्गव के नेतृत्व में भाजपा ने आक्रामक रुख अपनाया और धन्यवाद प्रस्ताव को निंदा प्रस्ताव में बदलते हुए बहुमत से पारित कर दिया, जबकि कांग्रेस ने इसका विरोध करते हुए इसे राजनीतिक कदम बताया।
इंदौर नगर निगम का विशेष सम्मेलन पहले प्रधानमंत्री के प्रति आभार प्रस्ताव के लिए बुलाया गया था, लेकिन नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा और राज्यसभा में खारिज होने के बाद भाजपा ने आक्रामक तेवर अपनाते हुए पूरे आयोजन को धन्यवाद प्रस्ताव से निंदा प्रस्ताव में बदल दिया। महिला आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गए और सदन में तीखी नोकझोंक, आरोप-प्रत्यारोप और जोरदार बहस देखने को मिली। भाजपा ने इस मुद्दे को महिला सम्मान और अधिकारों से जोड़ते हुए विपक्ष पर सीधा हमला बोला। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर दोहरी राजनीति करने के आरोप लगाए और कहा कि विपक्ष ने महिला सशक्तिकरण के ऐतिहासिक अवसर को ठुकराया है।
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विरोध दर्ज कराने के लिए भाजपा की महिला पार्षद काले वस्त्रों में सम्मेलन में पहुंचीं, जबकि महापौर पुष्यमित्र भार्गव काली शर्ट और पुरुष पार्षद बाजुओं पर काली पट्टी बांधकर सदन में शामिल हुए। पूरा सदन विरोध के प्रतीकात्मक रंग में रंगा नजर आया और भाजपा ने इसे महिला सम्मान का सवाल बताते हुए विपक्ष को घेरने की कोशिश की। इस दौरान सदन में जोरदार बहस और नोकझोंक जारी रही और माहौल कई बार तनावपूर्ण हो गया। भाजपा ने विपक्ष को महिला विरोधी मानसिकता का प्रतीक बताते हुए लगातार हमला बोला और अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश की।
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वहीं कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया और कहा कि वह महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि परिसीमन के साथ इसे लागू करने के प्रस्ताव का विरोध कर रही है। नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि वर्ष 2023 में पारित मूल अधिनियम को तत्काल लागू किया जाना चाहिए था, लेकिन भाजपा ने राजनीतिक लाभ के लिए इसे रोके रखा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अब सीटों के परिसीमन के जरिए अपने हित साधने का प्रयास किया जा रहा है और इसे चुनावी रणनीति करार दिया। सदन में बहस इतनी तीखी हुई कि कई बार माहौल तनावपूर्ण हो गया और दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों पर अड़े रहे।