जबलपुर। बैतूल जिले की मुलताई नगर परिषद अध्यक्ष चुनाव विवाद में हाईकोर्ट ने चुनाव ट्रिब्यूनल द्वारा नीतू परमार के खिलाफ दिए गए आदेश को खारिज कर दिया है। जस्टिस विवेक जैन की सिंगल बेंच ने कहा है कि ट्रिब्यूनल ने अपनी सीमाएं लांघते हुए मोरल पुलिसिंग की और कानून से बाहर जाकर निष्कर्ष निकाले। ट्रिब्यूनल का आदेश खारिज होने के बाद अब नीतू परमार को वापस अध्यक्ष पद पर बहाल होंगी।
नीतू परमार की ओर से दाखिल इस याचिका में कहा गया था कि वो कांग्रेस के समर्थन से नगर परिषद अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुईं थीं। वर्ष 2022 में हुए चुनाव में उसने भाजपा समर्थित वर्षा गडेकर को हराया था। उनके खिलाफ दायर किए गए मामले पर मुलताई की ट्रिब्यूनल ने 13 जून 2023 को उनका निर्वाचन रद्द करके अध्यक्ष का चुनाव फिर से कराने के निर्देश दिए थे। इसके खिलाफ यह याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी।
आवेदक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल, अधिवक्ता एश्वर्य ननदानी तिवारी और आदित्य राज शुक्ला ने दलीलें रखीं। सुनवाई के बाद मामले पर सुरक्षित रखा फैसला सुनाते हुए अदालत ने इलेक्शन ट्रिब्यूनल के फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा- ‘ट्रिब्यूनल ने भ्रष्ट आचरण का निष्कर्ष ऐसे आधार पर निकाल दिया, जो न तो याचिका में आरोपित था और न ही पक्षकारों ने उठाया था।’ इन आधारों के साथ कोर्ट ने इसे प्लीडिंग से बाहर जाकर फैसला करार देकर ट्रिब्यूनल का आदेश खारिज कर दिया।