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NH-46 Case : हाईकोर्ट ने कहा-बैरिकेड्स लगा देंगे तो टाइगर सड़क कैसे पार करेंगे?

बैतूल-भोपाल फोरलेन NH-46 में केसला से बरेठा घाट तक सड़क निर्माण को लेकर मंगलवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने NHAI से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
 हाईकोर्ट ने कहा-बैरिकेड्स लगा देंगे तो टाइगर सड़क कैसे पार करेंगे?
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    जबलपुर। बैतूल-भोपाल फोरलेन में केसला-भौंरा-बरेठा के जंगल में चल रहे सड़क निर्माण के मामले में मप्र हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने कहा है कि सड़क किनारे यदि बैरिकेड्स लगा देंगे तो टाइगर सड़क पार कैसे करेंगे? बेंच ने कहा कि जब 19.5 किमी के जंगल में से 10.5 किमी का हिस्सा ऊपर से ले जाने की सिफारिश की गई है, तब क्यों उसका पालन नहीं किया जा रहा है? बेंच ने एनएचएआई को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश देकर अगली सुनवाई 24 अप्रैल को निर्धारित की है।

    फोरलेन बनाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए

    हाईकोर्ट ने ये निर्देश अमरावती महाराष्ट्र में रहने वाले वन्य जीव प्रेमी अद्वेत क्योले की ओर से वर्ष 2021 में दाखिल जनहित याचिका पर मंगलवार को दिए। दरअसल, इस याचिका में NH-46 (बैतूल-भोपाल) को फोरलेन में तब्दील करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। याचिका में आरोप है कि सड़क बनाने से वन्य जीवों को सड़क के एक ओर से दूसरी ओर जाने में काफी परेशानी होगी और उनकी जान को हमेशा खतरा बना रहेगा।

    निर्माण पर लगी है रोक

    इस मामले पर 1 अप्रैल 2022 को मप्र हाईकोर्ट ने सतपुड़ा और मेलघाट टाइगर रिजर्व के बीच चल रहे निर्माण पर नाखुशी जताई थी। हाईकोर्ट ने इस हिस्से में किए जा रहे निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। बीते 23 मार्च को हाईकोर्ट ने इस निर्माण कार्य पर लगी रोक हटाने से इनकार करके नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी और नेशनल बोर्ड फॉर वाईल्ड लाइफ के जिम्मेदार अधिकारियों को तलब किया था।

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    तो हाथियों की तरह टाइगर करेंगे पलायन

    मंगलवार को जनहित याचिका पर आगे हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने दलीलें रखीं। कोर्ट में हाजिर हुए दोनों विभागों के जिम्मेदार अधिकारी सवालों का उचित जवाब देने में नाकाम रहे। सुनवाई के दौरान बेंच ने यहां तक कहा- ‘जिस तरह से विकास कार्यों के कारण छत्तीसगढ़ के हाथियों ने मप्र का रुख किया है, ठीक वैसे ही इस फोरलेन के कारण मप्र के टाइगर भी पलायन करने लगेंगे।’

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    नीचे से रास्ता देंगे तो टाइगर नहीं जाएंगे

    अधिकारियों द्वारा दिए गए जवाब पर असंतोष जताते हुए बेंच ने कहा यदि सड़क के नीचे से आप टाइगर के लिए जो रास्ता बना रहे, वह पूरी तरह के अनुचित है। टाइगर की यह फितरत है कि यदि सामने उसे जंगल दिखेगा, तभी वह रास्ता पार करेगा। जिस तरह से आप उसके जाने के लिए संकरा रास्ता बना रहे, उससे वह कभी नहीं गुजरेगा और चाहे जब वह रोड पर आएगा। इससे टाइगर के साथ लोगों की जान को भी खतरा रहेगा। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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