यह घटना उपभोक्ताओं के लिए एक सीख है कि खरीदारी के समय बिल और एमआरपी जरूर जांचें। वहीं दुकानदारों के लिए भी यह चेतावनी है कि छोटी सी लापरवाही भी भारी जुर्माने का कारण बन सकती है।
शाहपुरा निवासी उपभोक्ता अनिल कुशवाह ने एक दुकान से घी का पाउच खरीदा। घर पहुंचकर जब उन्होंने पैकेट पर छपी कीमत देखी, तो पता चला कि एमआरपी 675 रुपये थी, जबकि उनसे 685 रुपये वसूले गए। उन्होंने तुरंत दुकान पर शिकायत की, लेकिन दुकानदार ने अपनी गलती मानने के बजाय कहा कि यही नया रेट है। इसके बाद उपभोक्ता ने इसे गंभीरता से लेते हुए जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
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मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने साफ कहा कि एमआरपी से ज्यादा कीमत वसूलना नियमों के खिलाफ है और यह उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। आयोग ने दुकानदार को आदेश दिया कि वह अतिरिक्त 10 रुपये के साथ ब्याज सहित कुल 28 रुपये वापस करे। साथ ही ग्राहक को हुई मानसिक परेशानी के लिए 10 हजार रुपये मुआवजा और 5 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने के निर्देश दिए। इस तरह कुल मिलाकर दुकानदार को 15 हजार 028 रुपये चुकाने पड़े।
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यह मामला इस बात का उदाहरण है कि अगर ग्राहक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो, तो छोटी सी रकम का मामला भी न्याय दिला सकता है। उपभोक्ता की सतर्कता और कानूनी कार्रवाई के चलते न सिर्फ उसे न्याय मिला, बल्कि यह संदेश भी गया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को सजा मिल सकती है।