MP में जल्द लागू होगी तबादला नीति-2026:लोक अभियोजन संचालनालय ने शुरू की तैयारी, तीन साल से जमे अधिकारियों-कर्मचारियों की मांगी सूची

मध्यप्रदेश में बहुप्रतीक्षित तबादला नीति-2026 को लेकर हलचल तेज हो गई है। संभावना जताई जा रही है कि राज्य सरकार जल्द ही नई ट्रांसफर पॉलिसी लागू कर सकती है। इसी के मद्देनजर लोक अभियोजन संचालनालय ने विभागीय स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। संचालनालय ने प्रदेश के जिला मुख्यालयों और तहसील स्तर पर पदस्थ उन अभियोजन अधिकारियों और कर्मचारियों की जानकारी मांगी है जो एक ही स्थान पर तीन साल से अधिक समय से पदस्थ हैं। इसके लिए सभी जिलों को निर्देश जारी किए गए हैं।
कर्मचारियों से मांगे गए पसंदीदा जिलों के विकल्प
जारी आदेश में कहा गया है कि शासन की मंशा के अनुसार जल्द ही राज्य स्तरीय तबादला नीति घोषित हो सकती है। ऐसे में प्रशासनिक सुविधा और समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए पहले से जानकारी जुटाई जा रही है। संचालनालय ने अधिकारियों और कर्मचारियों से प्राथमिकता क्रम में तीन जिलों के विकल्प मांगे हैं। कर्मचारियों को 15 मई 2026 तक निर्धारित प्रोफार्मा में अपनी पसंद ईमेल के जरिए भेजनी होगी।
पुराने पदस्थ जिलों का नहीं कर सकेंगे चयन
इस प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण शर्त भी रखी गई है। कर्मचारी उन जिलों का चयन नहीं कर सकेंगे जहां वे पहले पदस्थ रह चुके हैं। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि तय समय सीमा के बाद प्राप्त आवेदन स्वतः निरस्त माने जाएंगे। यदि कोई कर्मचारी जानकारी नहीं भेजता है तो संचालनालय अपने स्तर पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगा।
वरिष्ठ अधिकारियों पर डाली गई जिम्मेदारी
संचालनालय ने यह जिम्मेदारी उपनिदेशक और सहायक निदेशक स्तर के अधिकारियों को सौंपी है। यदि किसी जिले से जानकारी समय पर नहीं पहुंचती है तो संबंधित वरिष्ठ अधिकारी जिम्मेदार माने जाएंगे। विभाग का कहना है कि तबादला नीति-2026 आने की पूरी संभावना है इसलिए प्रशासनिक तैयारी पहले से पूरी की जा रही है ताकि नीति लागू होते ही आदेश जारी किए जा सकें।
15 मई से हट सकता है तबादलों पर प्रतिबंध
जानकारी के मुताबिक मध्यप्रदेश सरकार वर्ष 2026 की तबादला नीति का प्रारूप लगभग तैयार कर चुकी है। संभावना है कि 15 मई से एक महीने के लिए तबादलों पर लगा प्रतिबंध हटाया जा सकता है। इस बार की नीति में बड़ा बदलाव यह होगा कि स्कूल शिक्षा विभाग को सामान्य तबादला नीति से अलग रखा जाएगा। यानी शिक्षा विभाग की अलग ट्रांसफर पॉलिसी जारी की जाएगी। कर्मचारियों को अपने वर्तमान पदस्थापना स्थल की ज्वाइनिंग तिथि के साथ पहली, दूसरी और तीसरी पसंद के जिलों की जानकारी देनी होगी।
कैबिनेट बैठक में सीएम मोहन यादव ने जताई नाराजगी
6 मई को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तबादला नीति में हो रही देरी पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि जब पहले ही तय हो चुका है कि तबादला नीति जल्द लाई जाएगी तो अब तक इसमें देरी क्यों हो रही है। सीएम ने यह भी कहा कि उनके पास लगातार आवेदन आते हैं, लेकिन अलग-अलग राय के कारण कई मामलों में ट्रांसफर नहीं हो पाते। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और प्रभारी मंत्रियों से कहा कि तबादलों में न्याय और पारदर्शिता का ध्यान रखा जाए।
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स्वैच्छिक ट्रांसफर का कोटा बढ़ाने की मांग
कैबिनेट बैठक में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने स्वैच्छिक तबादलों की सीमा बढ़ाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कोटा कम पड़ जाता है खासतौर पर शिक्षा विभाग जैसे बड़े कैडर वाले विभागों में। इस सुझाव का समर्थन स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप ने भी किया। वहीं जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने स्वास्थ्य विभाग को भी इस व्यवस्था में शामिल करने की बात कही।
तबादलों के लिए कैडर के आधार पर तय है सीमा
मौजूदा तबादला नीति के तहत कैडर स्ट्रेंथ के आधार पर तबादलों की सीमा तय की गई है।
- 200 तक के कैडर में 20% तक तबादले हो सकते हैं
- 201 से 1000 तक के कैडर में 15% सीमा तय है
- 1001 से 2000 तक के कैडर में 10% तक तबादले किए जा सकते हैं
सरकार अब नई नीति के जरिए तबादला प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की तैयारी में है।












