PU Special :मानसून अलर्ट पर मप्र के टाइगर रिजर्व, 40 दिनों से चौबीसों घंटे पैदल गश्त

संतोष चौधरी,भोपाल। मध्यप्रदेश के सतपुड़ा, पेंच, कान्हा और बांधवगढ़ समेत सभी टाइगर रिजर्व पिछले 40 दिनों से हाई मानसून अलर्ट पर हैं। बारिश के मौसम में वन क्षेत्रों में शिकारियों की घुसपैठ और अवैध गतिविधियों की आशंका अत्यधिक बढ़ जाती है। इसे देखते हुए वन विभाग ने वाहनों के बजाय पैदल गश्त (मानूसन पेट्रोलिंग) तेज कर दी है। वन विभाग का दावा है कि कड़े सुरक्षा इंतजामों और विशेष चौकसी के चलते इस मानसून सीजन में प्रदेश में शिकार की एक भी घटना दर्ज नहीं हुई है।
मानसून में शिकारियों के घुसपैठ के अवसर
मानसून के दौरान वन्यजीव संरक्षण पार्क प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। इस मौसम में जंगल घना होने, घास-पौधों के बढ़ने, रास्ते क्षतिग्रस्त होने और पर्यटकों की आवाजाही बंद रहने से रातें बेहद अंधेरी व सुनसान हो जाती हैं। यही परिस्थितियां शिकारियों को घुसपैठ का अवसर देती हैं।
24 घंटे पैदल गश्त पर अमला
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा के अनुसार, पार्क के कोर और बफर जोन में मानसून गश्त बढ़ाकर पूरे अमले को तैनात किया गया है। पूरे 24 घंटे पैदल गश्त की जा रही है। वहीं, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए 95 पेट्रोलिंग कैंपों में 200 गार्ड 24 घंटे मुस्तैद हैं। इसके अलावा, बफर व सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए 300 अतिरिक्त श्रमिकों को गश्त पर लगाया गया है। बांधवगढ़ की नौ रेंजों में प्रति रेंज 70-70 कर्मचारी तैनात हैं। पूर्व आईएफएस अधिकारी आरजी सोनी बताते हैं कि बारिश के मौसम में शिकार की प्रवृत्ति को देखते हुए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के निर्देशों पर 1 जुलाई से 30 सितंबर तक देशभर के टाइगर रिजर्व में विशेष गश्त चलाई जाती है।
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आठ माह में शिकार की 7 घटनाएं
मप्र में एक जनवरी से लेकर अब तक 46 बाघों की मौतें हुई हैं। इनमें से 7 मामले शिकार के हैं और 4 के खाल और अन्य अवशेष मिले हैं। वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि दो दर्जन से अधिक शिकारियों को हिरासत में लेकर जेल भेजा गया है।
विशेषज्ञों की राय
बारिश में मानवीय गतिविधियां और वाहनों से पेट्रोलिंग बंद होने के कारण शिकारी मानसून का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। इसलिए पैदल गश्त ही एकमात्र प्रभावी उपाय है। इसके अलावा, अत्यधिक बारिश के कारण जब बाघ रिहायशी इलाकों की ओर रुख करते हैं, तो मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ जाती हैं। कान्हा के मलावहा में एक बाघ ने महिला पर हमला कर दिया।
अजय दुबे, वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट
मानसून में पर्यटन बंद रहने और रास्ते खराब होने से सुरक्षा व्यवस्था सामान्य दिनों से कई गुना बढ़ा दी जाती है। 24 घंटे पैदल गश्त का ही नतीजा है कि इस सीजन में प्रदेश में शिकार का एक भी मामला सामने नहीं आया है।
डॉ. समीता राजौरा, पीसीसीएफ, वाइल्ड लाइफ
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