PU Special :कचरा प्रसंस्करण में मध्यप्रदेश की बड़ी उपलब्धि, 99.72% तक पहुंचा आंकड़ा; देश के औसत से काफी आगे

अशोक गौतम, भोपाल। स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 के तहत मध्यप्रदेश में नगर ठोस कचरा प्रबंधन की स्थिति में बड़ा सुधार सामने आया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अनुसार प्रदेश में कुल नगर ठोस कचरे के 99.72 प्रतिशत का प्रसंस्करण किया जा रहा है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज 81.01 प्रतिशत से काफी अधिक है। हालांकि कचरा प्रबंधन को लेकर प्रदेश के लिए स्वीकृत राशि और केंद्रीय हिस्से के रूप में किए गए दावे के बीच बड़ा अंतर भी सामने आया है।
2,200.20 करोड़ रुपए का हुआ था आवंटन
6 अगस्त को लोकसभा में स्वच्छ भारत मिशन शहरी के क्रियान्वयन को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने बताया कि मध्यप्रदेश के लिए मिशन के तहत 2,200.20 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया था। इसमें से 2,036.91 करोड़ रुपए की योजनाएं मंजूर हुई हैं जबकि 584.05 करोड़ रुपए केंद्रीय हिस्से के रूप में दावा किए गए हैं।
कचरा प्रसंस्करण में मध्यप्रदेश कई राज्यों से बेहतर
प्रदेश के लिए स्वीकृत अपशिष्ट प्रसंस्करण क्षमता 7,857.36 टन प्रतिदिन बताई गई है। कुल नगर ठोस कचरे के प्रसंस्करण में मध्यप्रदेश का आंकड़ा 99.72 प्रतिशत है, जो देश के कई बड़े राज्यों से बेहतर है। तुलना करें तो महाराष्ट्र में कचरा प्रसंस्करण 93.69 प्रतिशत, गुजरात में 97.84 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 97.66 प्रतिशत और राजस्थान में 58.87 प्रतिशत दर्ज किया गया है।
देश में 1.62 लाख टन से ज्यादा कचरा रोज निकलता है
स्वच्छ भारत मिशन शहरी के आंकड़ों के अनुसार देशभर में हर दिन करीब 1,62,372 टन नगर ठोस कचरा उत्पन्न होता है। इसमें से 1,31,530 टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा रहा है। मंत्रालय के मुताबिक वर्ष 2014 में देश में कचरा प्रसंस्करण का स्तर केवल 16 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 81 प्रतिशत से अधिक हो गया है। देश में घर-घर कचरा संग्रहण का कवरेज भी 97 प्रतिशत तक पहुंच गया है जबकि स्रोत पर कचरा पृथक्करण का आंकड़ा 89 प्रतिशत बताया गया है। यानी घरों और अन्य स्रोतों से निकलने वाले कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटने की दिशा में भी काम तेजी से आगे बढ़ा है।
पुराने कचरे के निस्तारण पर भी फोकस
स्वच्छ भारत मिशन शहरी के तहत पुराने कचरे के निस्तारण और डंपसाइट के उपचार पर भी जोर दिया जा रहा है। देशभर में 2,518 डंपसाइट चिन्हित की गई हैं, जहां एक हजार टन से अधिक पुराना कचरा मौजूद है। इन सभी स्थानों पर कुल मिलाकर करीब 27.75 करोड़ मीट्रिक टन पुराना कचरा जमा है। अब तक 1,297 डंपसाइट का पूरा उपचार किया जा चुका है। कुल पुराने कचरे में से 18.52 करोड़ मीट्रिक टन यानी करीब 67 प्रतिशत कचरे का उपचार हो चुका है। इस प्रक्रिया से करीब 10,434.90 एकड़ जमीन दोबारा उपयोग के लिए हासिल की गई है।
भोपाल में रोज करीब 900 टन कचरा
राजधानी भोपाल में प्रतिदिन करीब 900 टन ठोस कचरा निकलता है। शहर में ठोस कचरा प्रबंधन के लिए संग्रहण, पृथक्करण और प्रसंस्करण की व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। प्रदेश में 99.72 प्रतिशत कचरा प्रसंस्करण का आंकड़ा सामने आने के बाद भोपाल में वास्तविक प्रसंस्करण और कचरे के अंतिम निस्तारण की निगरानी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इंदौर में 6 श्रेणियों में कचरा अलग करने की व्यवस्था
इंदौर में प्रतिदिन करीब 1,115 टन ठोस कचरा निकलता है। स्रोत पर कचरा पृथक्करण के मामले में शहर ने निर्धारित न्यूनतम चार श्रेणियों से आगे बढ़कर छह-स्ट्रीम व्यवस्था अपनाई है। इस व्यवस्था में गीला कचरा, गैर-प्लास्टिक सूखा कचरा, प्लास्टिक, ई-वेस्ट, सैनिटरी वेस्ट और घरेलू खतरनाक कचरे को अलग किया जाता है। नई व्यवस्था को पोर्टल और प्रमाण-पत्र आधारित ट्रैकिंग से जोड़ने की तैयारी भी की जा रही है। इंदौर में 100 टन प्रतिदिन क्षमता वाले C&D वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट के संचालन और रखरखाव के लिए भी प्रक्रिया चल रही है।
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जबलपुर में रोज 340 टन कचरा
जबलपुर नगर निगम क्षेत्र में करीब 340 टन नगर ठोस कचरा प्रतिदिन उत्पन्न होने का उल्लेख केंद्रीय स्वच्छ भारत मिशन के दस्तावेज में किया गया है। शहर में प्लास्टिक और अन्य ज्वलनशील हिस्से को अलग कर सीमेंट संयंत्र में भेजने की व्यवस्था विकसित की गई है। इसके अलावा कचरा बीनने वालों के स्वयं सहायता समूह बनाकर उन्हें कचरा संग्रहण और पृथक्करण की व्यवस्था से जोड़ने का मॉडल भी अपनाया गया है। इससे कचरा प्रबंधन के साथ इस काम से जुड़े लोगों को व्यवस्थित तरीके से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्वालियर में नई प्रोसेसिंग सुविधा की जरूरत
ग्वालियर में रोज करीब 600 टन ठोस कचरा निकलता है। शहर में कचरा प्रसंस्करण के लिए बायोगैस प्लांट और MRF यानी मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। नगर निगम ने करीब 75.78 करोड़ रुपए के अनुमानित मूल्य वाली परियोजना के लिए फरवरी 2026 में निविदा जारी की थी। इससे साफ है कि शहर में मौजूदा कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई प्रसंस्करण क्षमता विकसित करने की जरूरत बनी हुई है।
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घरों से ही कचरा अलग करने पर जोर
प्रदेश के शहरों में कचरा प्रबंधन, पुराने कचरे के उपचार और रीसाइक्लिंग को लेकर लंबे समय से काम किया जा रहा है। कई शहरों में पुराने कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके साथ ही रोज निकलने वाले कचरे का घरों से ही अलग-अलग पृथक्करण कराने की व्यवस्था को भी मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे के मुताबिक शहरों में कचरा प्रबंधन और उपचार के साथ रीसाइक्लिंग पर लगातार काम किया जा रहा है। पुराने कचरे के निपटान और घरों से निकलने वाले कचरे के पृथक्करण की व्यवस्थाओं पर भी प्रयास जारी हैं।












