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--Bhopal, India

PU Special :भोपाल में बच्चों के इंतजार में रखा रहा बुजुर्ग का शव, इंदौर से आने में बहाना बनाते रहे बच्चे

भोपाल समेत मप्र के वृद्धाश्रमों में बुजुर्गों की मौत के बाद परिजनों के नहीं पहुंचने के मामले सामने आए हैं। कई मामलों में बच्चे अंतिम संस्कार से दूर रहे, लेकिन डेथ सर्टिफिकेट या अंतिम संस्कार की रिकॉर्डिंग मांगते रहे। बीते साल भोपाल में ऐसे छह मामले सामने आए, जबकि प्रदेश के वृद्धाश्रम फोरम के अनुसार संख्या करीब दो दर्जन रही।
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भोपाल में बच्चों के इंतजार में रखा रहा बुजुर्ग का शव, इंदौर से आने में बहाना बनाते रहे बच्चे

पल्लवी वाघेला, भोपाल। कोरोना काल में ऐसे कई मामले सामने आए जहां परिवारों को मलाल है कि वह अपनों का अंतिम संस्कार नहीं कर पाए। लेकिन यह मामले उससे भी अधिक व्यथित करने वाले हैं क्योंकि अपना जीवन बच्चों के लिए समर्पित करने वाले बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में छोड़ देने के बाद उनकी अंतिम क्रिया में भी बच्चे नहीं पहुंच रहे। यही नहीं, वृद्धाश्रम द्वारा अंतिम संस्कार के बाद बच्चे मौत का सबूत मांगने आते हैं ताकि बुजुर्ग की संपत्ति और अन्य पूंजी को आसानी से क्लेम कर सकें। अकेले भोपाल में बीते साल विभिन्न वृद्धाश्रम में ऐसे 6 मामले सामने आए हैं। वहीं, प्रदेश भर के वृद्धाश्रमों के फोरम पर चर्चा में सामने आया कि बीते साल प्रदेश में ऐसे मामलों की संख्या दो दर्जन के करीब है।

केस-1 एक-दूसरे पर डाली जिम्मेदारी 

बीते हफ्ते भोपाल में ऐसा ही वाकया सामने आया। परिवार से नाराज होकर भोपाल आए करीब 78 वर्षीय घनश्याम बाबा का 4 अगस्त को भोपाल के अपना घर वृद्धाश्रम में निधन हो गया। मृत्यु के बाद वृद्धाश्रम प्रबंधन राह देखता रहा, लेकिन चार बच्चों में से एक भी नहीं पहुंचा। शुरूआत में बच्चे टिकट न मिलने और इंदौर से भोपाल तक आने की सुविधा न होने का बहाना बनाते रहे। प्रबंधन ने जोर दिया तो बेटियों ने बेटों को संपत्ति मिलने और बेटों ने टायर ट्यूब का थोक कारोबार करने वाले पिता को नाकारा बताकर पल्ला झाड़ लिया। हां, बच्चे डेथ सर्टिफिकेट देने की हिदायत जरूर करते रहे। आखिर बच्चों के न आने पर दो दिन बाद वृद्धाश्रम द्वारा अंतिम संस्कार किया गया।

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केस-2 शव के सामने लड़ा परिवार

इंदौर में बीते साल सामने आए मामले में बुजुर्ग पिता की मौत के बाद छोटा बेटा और बड़ी विधवा बहू बच्चों के साथ पहुंचे और शव के सामने ही लड़ने लगे। दोनों पक्षों की रुचि पिता के पास मौजूद गोल्ड चेन और अंगूठी में थी जो पत्नी की निशानी के रूप में पिता अपने पास ही रखी थी। परिवार में कलह चलती रही और दोनों पक्ष अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी से बचते रहे, आखिर प्रबंधन ने खुद ही अंतिम संस्कार किया।

केस-3 मांगी वीडियो रिकॉर्डिंग

जबलपुर के वृद्धाश्रम में बीते साल मार्च माह में बुजुर्ग मां की मौत पर बेटे ने आने से इनकार कर दिया, लेकिन अंतिम संस्कार की वीडियो रिकॉर्डिंग मांगी। मौत के चौथे दिन बेटे आश्रम में डेथ सर्टिफिकेट लेने पहुंचे ताकि पिता के नाम बीमा और बैंक में जमा राशि क्लेम कर सकें।

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मुश्किल होता है समय 

किसी भी बुजुर्ग के निधन के बाद हर संभव परिजन से संपर्क का प्रयास करते हैं। लेकिन यह समय और बच्चों का न आना हमारे लिए बेहद मुश्किल भरा होता है। प्रॉपर व्यवस्था न होने से  शव को रखना हमारे लिए आसान नहीं होता, दूसरा इससे बाकी बुजुर्ग भी प्रभावित होते हैं। लेकिन ऐसे अनेक मामले हैं जहां परिवार संपत्ति पर दावे के लिए मौत के सबूत मांगते हैं, लेकिन खुद नहीं पहुंचते।

माधुरी मिश्रा, संचालक, अपना घर

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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