खैरलांजी के जंगल में बाघ का आतंक, किसान की मौत; गाय-बछड़े को भी बनाया शिकार

खैरलांजी वन परिक्षेत्र में बाघ का आतंक अब ग्रामीणों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। पांडरवानी गांव से लगे जंगल में मवेशी चराने गए 50 वर्षीय किसान देवकराम पिता श्यामलाल बाघमारे पर बाघ ने हमला कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। बाघ ने किसान की गाय और बछड़े को भी अपना शिकार बना लिया। एक ही घटना में किसान समेत तीन जानें जाने से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। खास बात यह है कि बालाघाट जिले में करीब एक सप्ताह के भीतर बाघ के हमले में यह दूसरी मानव मौत बताई जा रही है। लगातार सामने आ रही घटनाओं से ग्रामीणों में वन विभाग की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी बढ़ रही है।
मवेशी चराने जंगल गए थे किसान
जानकारी के अनुसार रविवार दोपहर करीब 12 बजे देवकराम अपनी गाय और बछड़े को चराने के लिए गांव से लगे जंगल की ओर गए थे। शाम होने तक जब वह घर नहीं लौटे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। देर रात तक तलाश करने के बाद भी देवकराम का कोई पता नहीं चला। सोमवार सुबह परिजन ग्रामीणों के साथ दोबारा जंगल पहुंचे। यहां सबसे पहले उन्हें किसान की गाय और बछड़ा मृत अवस्था में मिले। कुछ दूरी पर देवकराम का शव भी खून से लथपथ हालत में पड़ा मिला। घटनास्थल पर वन्यप्राणी के पंजों और संघर्ष के निशान भी बताए गए हैं। शुरुआती परिस्थितियों के आधार पर बाघ के हमले की आशंका जताई जा रही है।
पहले से मवेशियों का शिकार कर रहा था बाघ
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी पहले से बनी हुई है और वह लगातार मवेशियों का शिकार कर रहा था। ग्रामीणों के मुताबिक, इसकी जानकारी वन विभाग को भी दी गई थी, लेकिन खतरे को लेकर पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। अब किसान की मौत के बाद ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। ग्रामीणों की मांग है कि इंसानी जान के लिए खतरा बन चुके बाघ को तत्काल पकड़ा जाए। कुछ ग्रामीण हिंसक बाघ को मारने की मांग भी कर रहे हैं।
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वन विभाग और पुलिस ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी और तिरोड़ी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने किसान का शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए कटंगी अस्पताल भेजा। वन विभाग की ओर से मृतक के परिजनों को तत्काल 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी गई है। विभाग ने शेष मुआवजे की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का भरोसा भी दिया है।
ग्रामीण बोले- लंबे समय से बनी है बाघ की दहशत
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से बाघ की आवाजाही बनी हुई है। इसके बावजूद जंगल में जाने वाले ग्रामीणों और मवेशी चराने वालों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। सरपंच दीपक देशमुख ने भी घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि इलाके में लंबे समय से बाघ की दहशत बनी हुई है। किसान की मौत के बाद ग्रामीणों में भय और नाराजगी दोनों बढ़ गई हैं।
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एक सप्ताह में दूसरी मानव मौत
इस घटना ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले कान्हा बफर जोन से लगे परार्पुर क्षेत्र में सगुनी बाई बैगा को भी बाघ ने अपना शिकार बनाया था। करीब एक सप्ताह के भीतर बाघ के हमले में दूसरी मानव मौत से ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। बाघ की निगरानी, ग्रामीणों की सुरक्षा और हिंसक बाघ से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।












