Teacher Recruitment Protest :40 डिग्री की तपिश में निकाली दंडवत यात्रा, शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि की मांग को लेकर सड़क पर उतरे अभ्यर्थी

भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास कर चुके अभ्यर्थियों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया। राजधानी भोपाल में बड़ी संख्या में वर्ग-2 और वर्ग-3 के चयनित उम्मीदवार जुटे और अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। तेज धूप और करीब 40 डिग्री तापमान के बावजूद अभ्यर्थी लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के बाहर डटे रहे और सरकार से जल्द शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। यह प्रदर्शन कोई पहला नहीं है। इससे पहले भी ये अभ्यर्थी कई बार भोपाल आकर अपनी मांगें सरकार और विभाग तक पहुंचा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
कैसे हुआ प्रदर्शन : दंडवत यात्रा से पहुंचा आक्रोश
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने अपनी नाराजगी और पीड़ा जताने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने भोपाल में जनजाति कार्य विभाग से लेकर लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) तक दंडवत यात्रा निकाली। इस यात्रा के दौरान कई अभ्यर्थी जमीन पर लेटकर आगे बढ़े और सरकार से जल्द न्याय की गुहार लगाई। उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत और परीक्षा पास करने के बाद भी उन्हें नौकरी नहीं मिल रही है, जिससे उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है।
मुख्य मांगें क्या हैं?
प्रदर्शन कर रहे चयनित अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने अपनी दो प्रमुख मांगें रखी हैं-
- 1. वर्ग-2 (Class 2) शिक्षकों की भर्ती बढ़ाई जाए- अभ्यर्थियों की मांग है कि वर्ग-2 के लिए कम से कम 10,000 नए पद बढ़ाए जाएं, ताकि चयनित उम्मीदवारों को जल्द नियुक्ति मिल सके।
- 2. वर्ग-3 (Class 3) में बड़े पैमाने पर भर्ती- वर्ग-3 यानी प्राथमिक शिक्षकों के लिए 25,000 पदों की वृद्धि की मांग की गई है। उनका कहना है कि प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों की भारी कमी है और इसे तुरंत पूरा किया जाना चाहिए।
- अभ्यर्थियों का दावा है कि राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग और जनजाति कार्य विभाग में कुल मिलाकर करीब 1 लाख 25 हजार पद खाली हैं, फिर भी भर्ती प्रक्रिया बेहद धीमी चल रही है।
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भर्ती प्रक्रिया की स्थिति: 2023 से अटका मामला
अभ्यर्थियों ने बताया कि वर्ष 2023 में शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें पूरे प्रदेश से लगभग 1.75 लाख उम्मीदवारों ने भाग लिया था। लंबी चयन प्रक्रिया के बाद सरकार ने करीब 10,700 पदों पर भर्ती निकालने की घोषणा की थी। लेकिन इसके बावजूद बड़ी समस्या यह है कि-
- चयन सूची जारी होने के बाद भी कई अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिली
- स्कूल एलॉटमेंट (School Allotment) अब तक नहीं हुआ
- चयनित उम्मीदवार आज भी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं
- इस स्थिति ने अभ्यर्थियों की चिंता और गुस्से को और बढ़ा दिया है।
अभ्यर्थियों की पीड़ा: 20 साल में बहुत कम भर्ती हुई
प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों का कहना है कि पिछले करीब 20 वर्षों में शिक्षक भर्ती बहुत सीमित रही है। उनका आरोप है कि इस दौरान लगभग केवल 10 हजार शिक्षकों की ही भर्ती की गई, जबकि स्कूलों में शिक्षकों की कमी लगातार बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि सरकार अगर समय पर भर्ती निकालती, तो आज हजारों युवाओं का भविष्य सुरक्षित होता।
विभाग के बाहर प्रदर्शन और नारेबाजी
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में युवा जनजाति कार्य विभाग के बाहर इकट्ठा हुए और जमकर नारेबाजी की। गर्मी और थकान के बावजूद उनका जोश कम नहीं हुआ। अभ्यर्थियों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
क्यों बढ़ रहा है असंतोष?
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अभ्यर्थियों में असंतोष बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं-
- लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया का अटकना
- चयन के बाद भी नियुक्ति न मिलना
- स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी होने के बावजूद नई भर्ती न निकलना
- बार-बार प्रदर्शन करने के बाद भी समाधान न निकलना












