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कूनो में दिखी दुर्लभ कैराकल कैट!वन्यजीव संरक्षण को मिली बड़ी सफलता, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जताई खुशी

मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी खुशखबरी सामने आई है। दशकों बाद दुर्लभ जंगली बिल्ली कैराकल की मौजूदगी कैमरा ट्रैप सर्वे में दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे प्रदेश की समृद्ध होती जैव विविधता और सफल संरक्षण प्रयासों का प्रमाण बताया है।
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वन्यजीव संरक्षण को मिली बड़ी सफलता, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जताई खुशी

श्योपुर। मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बेहद अच्छी और उत्साहजनक खबर सामने आई है। लंबे समय बाद यहां दुर्लभ जंगली बिल्ली कैराकल की मौजूदगी दर्ज की गई है। हाल ही में किए गए कैमरा ट्रैप सर्वे के दौरान इस दुर्लभ वन्यजीव की तस्वीरें सामने आई हैं। वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञ इसे बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सामने आई इस खबर ने वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों में खुशी की लहर पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कूनो में चल रहे संरक्षण कार्यों और प्रोजेक्ट चीता के सकारात्मक प्रभाव के कारण अब अन्य दुर्लभ प्रजातियों को भी सुरक्षित वातावरण मिलने लगा है।

कैमरा ट्रैप सर्वे में मिली कैराकल की तस्वीर

कूनो नेशनल पार्क में हाल ही में वन्यजीवों की निगरानी के लिए कैमरा ट्रैप सर्वे किया गया था। इस सर्वे के दौरान कैमरों में कैराकल की तस्वीरें रिकॉर्ड हुईं। यह जंगली बिल्ली भारत में बहुत कम संख्या में पाई जाती है और कई इलाकों से लगभग गायब हो चुकी है। ऐसे में कूनो में इसकी मौजूदगी दर्ज होना वन विभाग के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। यह इस बात का संकेत भी है कि पार्क का प्राकृतिक वातावरण दुर्लभ वन्यजीवों के लिए अनुकूल बन रहा है।

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जताई खुशी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैराकल के दिखाई देने पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस हमें प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के महत्व की याद दिलाता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, कूनो में कैराकल की वापसी यह साबित करती है कि राज्य में वन्यजीव संरक्षण के प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जैव विविधता को बढ़ाने और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए लगातार काम कर रही है।

प्रोजेक्ट चीता का दिख रहा सकारात्मक असर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू किया गया प्रोजेक्ट चीता केवल चीतों को बसाने की योजना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना भी है। कूनो में चीतों के आगमन के बाद वन क्षेत्र के संरक्षण, निगरानी व्यवस्था और प्राकृतिक आवासों को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके परिणाम अब सामने आने लगे हैं। कैराकल जैसी दुर्लभ प्रजाति का दिखाई देना इसी दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

दुर्लभ जीवों के लिए सुरक्षित बन रहा कूनो

वन विभाग के अनुसार, कूनो नेशनल पार्क में वन्यजीवों के लिए बेहतर प्राकृतिक वातावरण तैयार किया जा रहा है। जंगलों की सुरक्षा, जल स्रोतों का संरक्षण और आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए वन्यजीवों को सुरक्षित माहौल देने की कोशिश की जा रही है। कैराकल की मौजूदगी यह दर्शाती है कि कूनो का जंगल अब सिर्फ चीतों के लिए ही नहीं, बल्कि कई अन्य दुर्लभ प्रजातियों के लिए भी सुरक्षित आवास बनता जा रहा है।

क्या है कैराकल?

कैराकल एक बेहद खूबसूरत और फुर्तीली जंगली बिल्ली है। इसकी सबसे खास पहचान इसके लंबे कान और कानों के ऊपर मौजूद काले रंग के बालों के गुच्छे हैं। यही विशेषता इसे अन्य जंगली बिल्लियों से अलग बनाती है। यह आमतौर पर सूखे घास के मैदानों, झाड़ीदार क्षेत्रों और जंगलों में पाई जाती है। कैराकल बहुत तेज शिकारी मानी जाती है और छोटी-छोटी वन्य प्रजातियों का शिकार करती है।

भारत में इसकी संख्या बहुत कम है, इसलिए इसे दुर्लभ वन्यजीवों की श्रेणी में रखा जाता है। कई वर्षों से इसके दिखाई देने की घटनाएं बेहद कम रही हैं।

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वन्यजीव संरक्षण का मॉडल बन रहा कूनो

कूनो नेशनल पार्क पिछले कुछ वर्षों में देश और दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल रहा है। प्रोजेक्ट चीता के बाद यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है। अब कैराकल जैसे दुर्लभ जीव की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया है कि कूनो केवल चीतों का घर नहीं, बल्कि जैव विविधता को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण वन क्षेत्र बन रहा है।

जैव विविधता के लिए शुभ संकेत

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, जब किसी जंगल में शीर्ष या महत्वपूर्ण प्रजातियों का संरक्षण सफल होता है, तो उसका फायदा पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को मिलता है। इससे भोजन श्रृंखला मजबूत होती है और जंगल का प्राकृतिक संतुलन बेहतर बना रहता है।

कैराकल का दिखाई देना इसी बात का संकेत है कि कूनो का पारिस्थितिक तंत्र स्वस्थ और संतुलित हो रहा है। यह प्रदेश की जैव विविधता के लिए भी एक सकारात्मक खबर है।

संरक्षण प्रयास आगे भी रहेंगे जारी

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के लिए लगातार काम करती रहेगी। कूनो में आधुनिक तकनीकों के माध्यम से वन्यजीवों की निगरानी और संरक्षण गतिविधियों को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश का लक्ष्य केवल वन्यजीवों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उनके लिए सुरक्षित और स्थायी वातावरण तैयार करना भी है। कैराकल की वापसी इस दिशा में मिली एक महत्वपूर्ण सफलता है।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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