मप्र बना देश का पहला ‘केज कल्चर हब’:3 लाख प्रपोजल पहुंचे, ₹10 हजार करोड़ निवेश और डेढ़ लाख रोजगार की तैयारी

पुष्पेन्द्र सिंह भोपाल। मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहां केज कल्चर यानी जलाशयों में बड़े पैमाने पर मछली उत्पादन के लिए रिकॉर्ड स्तर पर निवेश प्रस्ताव पहुंचे हैं। प्रदेश में लागू नई मत्स्य नीति के बाद सिर्फ दो महीनों के भीतर करीब 10 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। खास बात यह है कि सरकार ने एक साल में एक लाख केज कल्चर लगाने का अनुमान लगाया था लेकिन महज दो महीने में ही तीन लाख केज कल्चर लगाने के प्रस्ताव आ गए हैं। इन प्रस्तावों के जरिए प्रदेश में करीब डेढ़ लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई जा रही है। विभाग का दावा है कि आने वाले चार महीनों में प्रदेश में पहली यूनिट्स जमीन पर दिखाई देने लगेंगी।
कई राज्यों के निवेशक पहुंचे मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश में केज कल्चर के बढ़ते अवसरों को देखते हुए उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और आंध्रप्रदेश के निवेशकों ने बड़े पैमाने पर रुचि दिखाई है। निवेशकों का मानना है कि मछली उद्योग आने वाले समय का सबसे तेज मुनाफा देने वाला कारोबार बन सकता है।
मत्स्य उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त मध्यप्रदेश
प्रदेश में 15 बड़े बांधों सहित करीब 65 पुराने जलाशय मौजूद हैं। विशाल जल क्षेत्र और बेहतर जल संसाधनों की वजह से मध्यप्रदेश को मत्स्य उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त माना जा रहा है। इन्हीं संभावनाओं को देखते हुए मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग ने मार्च 2026 में ‘मप्र एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति-2026’ लागू की। इस नीति के तहत सरकार मात्र 10 रुपए प्रति क्यूबिक मीटर लीज रेंट पर 15 साल के लिए जल क्षेत्र उपलब्ध करा रही है।
विदेशों में भी है मप्र की मछली की भारी डिमांड
मध्यप्रदेश में उत्पादित मछलियों की मांग विदेशों में तेजी से बढ़ रही है। खासतौर पर पश्चिमी एशिया के देशों जैसे सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन, ओमान, जॉर्डन, लेबनान और अजरबैजान में मप्र की मछलियों का निर्यात किया जा रहा है। केज कल्चर के जरिए सबसे महंगी मछलियों में शामिल तिलापिया और पंगाशियस का उत्पादन किया जाएगा, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।
केज कल्चर से पर्यटन और आयुर्वेद को भी बढ़ावा
सरकार के मुताबिक केज कल्चर केवल मछली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा। इसके जरिए पर्यटन और दूसरे उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।
- केज कल्चर के ऊपर फ्लोटिंग सब्जी उत्पादन की सुविधा विकसित की जा सकेगी।
- फ्लोटिंग हट और वाटर टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।
- आयुर्वेदिक दवाओं के लिए जरूरी संसाधनों का उत्पादन भी संभव होगा।
एक साल में निवेश वसूल होने का दावा
विभाग का दावा है कि यदि एक हेक्टेयर जल क्षेत्र में केज कल्चर और मोती पालन के लिए करीब 8 करोड़ रुपए का निवेश किया जाए तो एक साल के भीतर पूरा निवेश वापस निकाला जा सकता है। इसी वजह से निवेशकों का रुझान तेजी से इस सेक्टर की ओर बढ़ रहा है।
इन बड़े बांधों में केज कल्चर की तैयारी
प्रदेश के जिन प्रमुख जलाशयों और बांधों में केज कल्चर की संभावनाएं देखी जा रही हैं उनमें इंदिरा सागर, गांधी सागर, तवा, बाणसागर, बरगी, भदभदा, ओंकारेश्वर, महान, राजीव सागर और पेंच बांध शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर एक हजार हेक्टेयर से अधिक जल क्षेत्र उपलब्ध है। भोपाल के बड़े तालाब में भी केज कल्चर लगाने के प्रस्ताव विभाग को मिले हैं।
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मप्र में मत्स्य उद्योग की मौजूदा स्थिति
- प्रदेश में कुल 4.43 लाख हेक्टेयर जल क्षेत्र उपलब्ध
- मत्स्य उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में 10वें स्थान पर
- वर्ष 2024-25 में 4.50 लाख मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन दर्ज
सरकार के सामने कई लक्ष्य
नई मत्स्य नीति के जरिए सरकार कई बड़े लक्ष्य हासिल करना चाहती है
- प्रदेश को गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना
- ग्रामीण, आदिवासी और मछुआ समुदाय की आय बढ़ाना
- स्वरोजगार और उद्यमिता के नए अवसर तैयार करना
- पर्यटन और निवेश को बढ़ावा देना
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एमपी में केज कल्चर का बड़ा स्कोप
मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग के सचिव स्वतंत्र कुमार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश में केज कल्चर का बड़ा स्कोप है। दो महीने में ही तीन लाख केज कल्चर लगाने के प्रस्ताव मिल चुके हैं और करीब 10 हजार करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव आ चुके हैं। उनके मुताबिक मछली उद्योग सबसे तेजी से फायदा देने वाला सेक्टर बनता जा रहा है और आने वाले समय में इसका बड़ा हिस्सा निर्यात बाजार से जुड़ने वाला है।












