सोहागपुर : पलकमती साहित्य परिषद की मासिक गोष्ठी में छाया रहा सोनम वांगचुक एवं छात्रों की भूख हड़ताल का मुद्दा

सोहागपुर। पलकमती साहित्य परिषद की मासिक गोष्ठी में सोनम वांगचुक एवं छात्रों द्वारा की जा रही भूख हड़ताल का मुद्दा छाया रहा। अधिकांश कवियों ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एवं छात्रों द्वारा किए जा रहे आमरण अनशन को केंद्र में रख अपनी मौलिक रचनाओं का पाठ किया।
युवा कवयित्री कृतिका दुबे कनक ने अपनी कविता पढ़ी-
तपती ज़मीं पर बैठा वो , 21 दिनों से भूखा है।
लद्दाख का पावन पानी देखो , दिल्ली आकर सूखा है।
मेरा देश महान कहें हम , किस मुख से , किस मान से?
जब छात्र न्याय मांगे , अपने ही हिंदुस्तान से।
सोनम केवल नाम नहीं , जागी हुई मशाल है।
क्या शिक्षा की कीमत अब , सियासत का सवाल है?
अन्य कवियों ने भी पढ़ी अपनी रचनाएं
इसी विषय को लेकर स्वर्णा तिवारी के द्वारा भी काव्य रचना की प्रस्तुति दी गई। उन्होंने कहा कि सरकार से सवाल करना कवियों की जिम्मेदारी भी है और जरूरत भी है। कक्षा पांचवी की छात्रा लिनिशा जायसवाल ने नानी पर कविता का पाठ किया। प्रबुद्ध दुबे ने पिता पर कविता का पाठ कर जीवन में पिता की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कलम शीर्षक से कविता का पाठ कर मीडिया पर निशाना साधते हुए जिंदा हूं , पर मरी हुई हूं। हिम्मत है , पर डरी हुई हूं कविता की प्रस्तुति दी। तारा जायसवाल ने हम भी कुछ देना सीखें शीर्षक से.देते ठंडक हरे हरे वन , भूधर नदियों के उद्गम , देती नदियां निर्मल जल , भूमि उगाए स्वस्थ फसल कविता का पाठ करते हुए पर्यावरण संरक्षण पर रचना पढ़ी।
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'हम भी कर लें कॉकरोच के मन की बात'
गोष्ठी का संचालन कर रहे वरिष्ठ कवि राजेश शुक्ला ने चलो आज हम भी कर लें , कॉकरोच के मन की बात , पेपर लीक कहां का अनशन , वांगचुक सोनम की बात कविता का पाठ किया। शायर जलज शर्मा ने देश के वर्तमान हालातो का जिक्र कर मोहब्बत के हैं दुश्मन , और मजहब की दुकानें हैं कविता का पाठ किया। कवि रवि नागेश ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन पर काव्य की प्रस्तुति दी उनके द्वारा केंद्र एवं राज्य सरकार की कुछ नामी योजनाओं के सफल होने पर भी व्यंग्य करते हुए कितने हुए लखपति , इसकी सिर्फ मुनादी हुई पंक्तियां पढ़ी गई।
समधी-समधन की बातचीत पर राई
कवि मथुरा प्रसाद जोशी ने ग्रामीण परिवेश का जिक्र कर समधी-समधन की बातचीत आधारित राई की प्रस्तुति दी। उनके द्वारा दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन एवं लोक जीवन में लज्जा पर भी काव्य की प्रस्तुति दी गई। वरिष्ठ कवि दयाशंकर शर्मा ने परिवार रूपी बगिया के फूल होते हैं बच्चे कविता का पाठ कर बालश्रम एवं कुपोषण से पीड़ित बच्चों की वेदना पर प्रकाश डाला।गीतकार पं शैलेंद्र शर्मा के द्वारा क्षेत्र में अब तक हुई अल्प वृष्टि पर चिंता व्यक्त करते हुए बदरा बरषो रे कारे कारे जीत की प्रस्तुति दी गई उन्होंने सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर भी रचना पाठ किया।
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क्रांति का इतिहास पुराना है, क्या तेरा-क्या मेरा फसाना है
श्वेतल दुबे ने क्रांति का इतिहास पुराना है , क्या तेरा क्या मेरा फसाना है ,जुल्मी तू कर ले खूब सितम , अहिंसा से आजादी का अनुभव पुराना है कविता की प्रस्तुति दी। प्रज्ञा जायसवाल ऑनलाइन कविता का पाठ किया। इस दौरान पार्षद आशीष विश्वकर्मा , बुद्धि प्रकाश शर्मा , प्रेम जासवाल , राम विनोद जायसवाल , डाॅ सोमेश सिटोके , विनीत जायसवाल , पद्माकांत सहारिया , किशोर जायसवाल , प्रतीक जासवाल सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति मौजूद रही।












